कंपनियां IPO के लिए उठा रहीं SEBI की गोपनीय फाइलिंग सुविधा का फायदा
भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) का आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (IPO) लाने के लिए गोपनीय फाइलिंग का रास्ता अब काफी लोकप्रिय हो रहा है।
पिछले 12 महीनों में (जून 2025 से मई 2026 तक) 39 कंपनियों ने इसका इस्तेमाल किया है। इस सुविधा से कंपनियां अपने IPO से जुड़े प्लान SEBI के पास बिना तुरंत सार्वजनिक किए जमा कर पाती हैं।
इसका फायदा यह है कि वे अपनी संवेदनशील जानकारियां, जैसे कंपनी की आर्थिक स्थिति और बिजनेस रणनीति, IPO लॉन्च होने से ठीक पहले तक गोपनीय रख सकती हैं। इस तरह कंपनियों को बिना ज्यादा शोर-शराबा किए बाजार का माहौल परखने का मौका मिल जाता है।
गोपनीय फाइलिंग देती है 18 महीने का वक्त
गोपनीय फाइलिंग कंपनियों को 18 महीने तक की छूट देती है। इससे वे अपनी लिस्टिंग का सही समय तय कर पाती हैं या बाजार की परिस्थितियों के हिसाब से अपनी योजनाओं में बदलाव कर सकती हैं।
हालांकि, कोई कंपनी अपनी योजना बदलती है तो उसे कागजी कार्रवाई थोड़ी ज्यादा करनी पड़ती है। इस तरीके से कुछ निवेशकों में शायद शुरुआत में ज्यादा उत्साह न दिखे, लेकिन कई स्थापित कंपनियां इसे पसंद करती हैं। उन्हें यह मौका मिलता है कि वे अपनी IPO रणनीति को परदे के पीछे रहकर अच्छी तरह तैयार कर सकें।