क्यों कभी-कभी इंसानों द्वारा चलाई जाती है टेस्ला रोबोटैक्सी? कंपनी ने बताई वजह
क्या है खबर?
एलन मस्क की इलेक्ट्रिक कार कंपनी टेस्ला ने माना है कि उसकी रोबोटैक्सी कभी-कभी इंसानों द्वारा चलाई जाती हैं। यह खुलासा सेल्फ-ड्राइविंग टेक्नोलॉजी की जांच के दौरान सामने आया है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी अपनी ऑटोनॉमस गाड़ियों में 'रिमोट असिस्टेंस' सिस्टम का इस्तेमाल करती है। इसका मतलब है कि जरूरत पड़ने पर दूर बैठे ऑपरेटर गाड़ी की मदद करते हैं, जिससे सेफ्टी और कंट्रोल बनाए रखने की कोशिश की जाती है।
वजह
क्यों करनी पड़ती है इंसानी मदद?
कंपनी के अनुसार, जब गाड़ी किसी मुश्किल स्थिति में फंस जाती है, रास्ता समझ नहीं पाती या इमरजेंसी जैसी हालत बनती है, तब उसे रिमोट असिस्टेंस की जरूरत पड़ती है। ऐसे समय में ऑपरेटर गाड़ी को गाइड करते हैं और बहुत कम मामलों में कंट्रोल भी अपने हाथ में लेते हैं। यह सिस्टम इसलिए रखा गया है, ताकि ऑटोनॉमस तकनीक में आने वाली दिक्कतों को संभाला जा सके और यात्रियों की सुरक्षा बनी रहे।
काम
कैसे काम करता है रिमोट कंट्रोल सिस्टम?
रिपोर्ट के मुताबिक, टेस्ला के रिमोट ऑपरेटर जरूरत पड़ने पर गाड़ी को कम स्पीड पर कंट्रोल कर सकते हैं। आमतौर पर वे 2 मील प्रति घंटे की स्पीड पर कंट्रोल लेते हैं, जबकि कुछ मामलों में 10 मील प्रति घंटे तक भी गाड़ी चला सकते हैं। कई गाड़ियों में सेफ्टी ड्राइवर मौजूद रहते हैं, लेकिन कुछ गाड़ियां पूरी तरह रिमोट सिस्टम पर निर्भर हैं, जो अमेरिका के अलग-अलग शहरों से ऑपरेट किए जाते हैं।
सवाल
सेफ्टी को लेकर उठ रहे सवाल
रिमोट असिस्टेंस सिस्टम को सेफ्टी के लिए बहुत जरूरी माना जाता है, लेकिन इससे जुड़े खतरे भी सामने आए हैं। नेटवर्क में देरी होने पर ऑपरेटर की प्रतिक्रिया धीमी हो सकती है, जिससे दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, टेस्ला की सेल्फ-ड्राइविंग तकनीक पहले भी कई हादसों को लेकर चर्चा में रही है। ऐसे में यह सिस्टम जितना मददगार है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी माना जा रहा है।