कारों में क्यों वापसी कर रहे फिजिकल बटन? जानिए इसकी वजह
क्या है खबर?
पिछले एक दशक में कारों के इंटीरियर का चेहरा पूरी तरह से बदल गया। डैशबोर्ड से बटन गायब होने लगे और उनकी जगह बड़ी-बड़ी टचस्क्रीन ने ले ली। टेस्ला से लेकर मर्सिडीज ने 'क्लीन और मॉडर्न' लुक के नाम पर सब कुछ स्क्रीन में डाल दिया, लेकिन अब यह ट्रेंड बदल रहा है। फॉक्सवैगन, हुंडई और मर्सिडीज-बेंच जैसे कार निर्माता अपनी नई कारों में फिर से फिजिकल बटन वापस ला रही हैं। आइये जानते हैं इसके पीछे क्या कारण हैं।
सुरक्षा
सुरक्षा है सबसे बड़ा कारण
टचस्क्रीन का सबसे बड़ा नुकसान यह है कि इसे चलाने के लिए चालक को अपनी नजरें सड़क से हटानी पड़ती हैं। सही आइकन ढूंढने के लिए 2-3 टैप करने पड़ते हैं। फिजिकल बटन के साथ मसल मेमोरी काम करती है, यानि बिना देखे ही आपको पता होता है कि वॉल्यूम कम करने या AC चलाने के लिए हाथ कहां ले जाना है। स्क्रीन पर मेन्यू ढूंढने में लगने वाले कुछ सेकंड्स किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं।
फीडबैक
ग्राहकों ने बताई टचस्क्रीन को लेकर परेशानी
रिपेयरिंग लागत और टिकाऊपन: टचस्क्रीन बनाना सस्ता पड़ता है, क्योंकि इसमें वायरिंग कम होती है, लेकिन क्रैक होने, काम करना बंद करने या सॉफ्टवेयर समस्या आने पर रिपेयर या रिप्लेसमेंट काफी महंगा पड़ता है। दूसरी तरफ फिजिकल बटन सालों-साल चलते हैं और इन्हें बदलना भी सस्ता पड़ता है। ग्राहकों का फीडबैक: ग्राहक स्क्रीन-ओनली डैशबोर्ड से परेशान हो चुके हैं। लोग ड्राइविंग खासकर खराब रास्तों पर स्क्रीन पर बार-बार क्लिक करने के बजाय एक साधारण 'नॉब' घुमाना ज्यादा पसंद करते हैं।
भविष्य
कैसी होंगी भविष्य की कारें?
जानकारों के मुताबिक, भविष्य में कारों का इंटीरियर ना पूरी तरह टचस्क्रीन-आधारित होगा और ना ही पूरी तरह पुराने जमाने जैसा होगा। बड़ी स्क्रीन केवल नेविगेशन और मनोरंजन के लिए होगी, लेकिन ड्राइविंग से जुड़े जरूरी कंट्रोल के लिए फिजिकल बटन और नॉब्स मिलेंगे। यूरोप की यूरो NCAP ने 2026 से नए नियम लागू किए हैं। अब उन कारों को 5-स्टार सेफ्टी रेटिंग नहीं मिलेगी, जिनमें टर्न सिग्नल, वाइपर, हॉर्न और इमरजेंसी कॉल के लिए फिजिकल बटन नहीं होगा।