भारत में दाईं तरफ क्यों होता है गाड़ियों का स्टीयरिंग व्हील?
क्या है खबर?
अमेरिका में चलने वाली गाड़ियों में आपने स्टीयरिंग व्हील बाईं (लेफ्ट) तरफ देखा होगा, लेकिन भारत में दाईं (राइट) तरफ बैठकर गाड़ी चलाई जाती है। क्या आपने सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? यह अंतर न संयोगवश है और न ही आधुनिक इंजीनियरिंग के कारण, बल्कि सदियों पुराने इतिहास, सड़क सुरक्षा और ड्राइविंग आदतों की वजह से है। आइए जानते हैं भारत में चलने वाली गाड़ियों में लेफ्ट-हैंड स्टीयरिंग की शुरुआत कैसे हुई।
शुरुआत
घोड़ों से हुई थी शुरुआत
ब्रिटेन में 1700 के दशक में जब लोग घोड़ों पर सवारी करते थे और तलवारें रखते थे, तब ज्यादातर घुड़सवार दाहिने हाथ से काम करते थे और बाईं ओर से घोड़े पर चढ़ते थे। वे अपनी बाईं कमर पर तलवार पहनते थे ताकि दाहिने हाथ से आसानी से इस्तेमाल कर सकें। ऐसे में सड़क पर चलते समय वे बाईं ओर यात्रा करना सुरक्षित समझते थे, क्योंकि इससे उनकी तलवार सड़क पर चलने वाले अन्य लोगों से सुरक्षित रहती थी।
बदलाव
ऐसे शुरू हुआ लेफ्ट-हैंड ड्राइविंग सिस्टम
जब गाड़ियों का चलन शुरू हुआ, तब गाडियां भी घोड़ों जैसे सड़क के बाईं ओर चलने लगी। किसी ड्राइवर को आगे चल रहे वाहन से आगे निकलते समय दूसरी दिशा से आ रहे अन्य वाहन साफ दिख सकें, इसके लिए गाड़ियों में स्टीयरिंग व्हील दाईं तरफ लगाए गए। 1835 में पूरे ब्रिटेन में सड़क के बाईं तरफ वाहन चलाने वाले नियम लागू कर दिए। भारत पर जब ब्रिटेन का शासन था, तब यहां भी ब्रिटेन वाले नियम लागू हुए।
वैश्चिक भागीदारी
कितने देशों ने अपनाई यह प्रथा?
विश्व स्तर पर भारत के अलावा UK, जापान, ऑस्ट्रेलिया, थाईलैंड और दक्षिण अफ्रीका सहित 54 देशों के वाहनों में दाईं तरफ स्टीयरिंग व्हील का उपयोग करते हैं। इनमें UK की अहम भूमिका है, जिसने इस ड्राइविंग सिस्टम को वैश्विक पहचान दी। दूसरी तरफ अमेरिका, चीन, रूस, मिडिल ईस्ट और यूरोपीय देशों में गाड़ियां सड़क के दाईं ओर चलती हैं। इस कारण यहां स्टीयरिंग व्हील बाईं तरफ होता है। इसके पीछे मुख्य रूप से फ्रांस और अमेरिका का प्रभाव है।