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कब और कैसे हुआ कार के सुरक्षा फीचर सीट बेल्ट का आविष्कार?
कारों में सीट बेल्ट को आज भी सबसे अहम सुरक्षा सुविधा माना जाता है

कब और कैसे हुआ कार के सुरक्षा फीचर सीट बेल्ट का आविष्कार?

Jul 11, 2026
06:25 pm

क्या है खबर?

कारों में सीट बेल्ट के एक अहम सुरक्षा सुविधा मानी जाती है। बढ़ते हादसों को देखते हुए इसे सभी यात्रियों के लिए जरूरी बना दिया गया है। इतना ही नहीं ट्रैफिक नियमों में भी इसे अनिवार्य किया गया है। इस लगाने से चूक न हो इसके लिए गाड़ियों में रिमाइंडर फीचर दिया जाता है, जो समय-समय पर यात्रियों को बेल्ट लगाने प्रेरित करता रहता है। आइए जानते हैं पहली बार किस कंपनी ने इस फीचर का आविष्‍कार किया था।

शुरुआत 

यहां से हुई थी शुरुआत 

कारों के लिए पहला सीट बेल्ट अमेरिकी में एडवर्ड क्लैगहॉर्न ने 1885 में डिजाइन किया था और न्यूयॉर्क की टैक्सियों में इसका इस्तेमाल होने लगा। सीटबेल्टों की लोकप्रियता धीरे-धीरे बढ़ने लगी। हालांकि, शुरुआती डिजाइन बहुत ज्यादा सुरक्षा नहीं दे पाते थे। 1946 में डॉ. सी हंटर शेलडन ने रीट्रैक्टेबल सीट बेल्ट तैयार किया। एयरबैग और रेसेस्ड स्टीयरिंग व्हील जैसे सुरक्षा मानकों का क्रेडिट भी उन्हें ही जाता है। 1950 के आस-पास लगभग सभी रेसिंग कारों में इसका इस्तेमाल होने लगा।

कार कंपनी 

इस कंपनी ने पहली बार पेश की 

1950 के दशक में ही पहली बार कार कंपनियों ने अपनी ओर से सीट बेल्ट लगाकर देने की शुरुआत की। इस सिलसिले में नैश और फोर्ड ऑप्शनल सीट बेल्ट देने लगीं, जिसके लिए ग्राहकों को अतिरिक्त पैसे देने पड़ते थे। हालांकि, ज्यादातर लोग बिना सीट बेल्ट वाला विकल्प ही चुन रहे थे। स्वीडन की कार कंपनी साब ने पहली बार अपनी कारों के लिए सीट बेल्ट को स्टैंडर्ड फीचर बनाया।

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आधुनिक डिजाइन 

वोल्वो के इंजीनियर ने बनाई आधुनिक सीट बेल्ट

अभी कारों में जिन सीट बेल्टों का इस्तेमाल होता है, उन्हें 3-प्वाइंट सीट बेल्ट कहा जाता है। पुराने डिजाइन सिर्फ कमर को सुरक्षा देते थे, जबकि आधुनिक पूरे शरीर को सेफ्टी देते हैं। इनका डिजाइन 1955 में अमेरिका के रोजर W ग्रिसवोल्ड और ह्यूग डीहैवेन ने तैयार किया। इसे स्वीडन के नील्स बोहलिन ने और सुधारा। वोल्वो के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के एक रिश्तेदार की सड़क दुर्घटना में मौत के बाद अपनी गाड़ियों में अनिवार्य कर दिया।

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पेटेंट 

वोल्वो ने फ्री में कराया पेटेंट 

वोल्वो के मुख्य सुरक्षा इंजीनियर नील्स बोहलिन द्वारा बनाई गई सीट बेल्‍ट का आविष्‍कार करने के बाद कंपनी ने इसका पेटेंट करवाया। इसके बाद वह चाहती तो अन्‍य निर्माताओं से अरबों रुपये की रॉयल्‍टी को ले सकती थी, लेकिन उसने इसे सिर्फ अपने तक ही सीमित नहीं रखा था, बल्कि इसका पेटेंट करवाने के बाद इसे मुफ्त कर दिया था। कंपनी को पता था कि इसके कारण दुनियाभर में लाखों लोगों की जान बचाई जा सकती है।

फायदा 

एयरबैग के लिए भी जरूरी है सीट बेल्ट 

नई कारों में भले ही कई बेहतरीन सेफ्टी फीचर्स ऑफर आ गए हैं, लेकिन आज भी सीट बेल्‍ट फीचर पर सबसे ज्यादा भरोसा किया जाता है। शुरुआत में केवल चालक और उसके पास में बैठने वाले यात्री के लिए ही सीट बेल्ट दिया जाता था। अब यह पीछे की सीटों के लिए जरूरी हो गया है। इसके अलावा, एयरबैग खुलने के लिए भी सीट बेल्ट लगा होना जरूरी होता है। इसके नहीं लगे होने पर एयरबैग भी काम नहीं करेगा।

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