दिल्ली में 2028 से नहीं होगा पेट्रोल दोपहिया वाहनों का पंजीकरण, EV नीति का मसौदा प्रस्तावित
क्या है खबर?
दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहन (EV) नीति 2026-2030 का मसौदा जारी किया है, जिसमें नए वाहनों के विद्युतीकरण के लिए समयसीमा निर्धारित की है। इसमें पेट्रोल और डीजल वाहनों को EVs में बदलने को गति देने के लिए प्रोत्साहन दिए हैं। यह नीति वायु प्रदूषण से निपटने पर केंद्रित है, क्योंकि राजधानी में लगभग एक चौथाई प्रदूषण वाहनों से होता है। इस कदम से अगले 4 वर्षों में वाहन खरीदने और उपयोग करने के तरीके में बदलाव आ सकता है।
उपाय
EV नीति में किए गए हैं ये उपाय
मसौदे में पूर्ण इलेक्ट्रिक वाहन पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण के लिए खरीद प्रोत्साहन, स्क्रैपिंग लाभ, चार्जिंग सुविधा का विस्तार और रीसाइक्लिंग उपायों का उल्लेख किया है। 2027 से सभी नए तिपहिया वाहनों का पंजीकरण EVs के रूप में होना अनिवार्य है, वहीं 2028 से पंजीकृत होने वाले दोपहिया वाहन केवल इलेक्ट्रिक होंगे। 2030 तक कम से कम 30 फीसदी स्कूल बसों को इलेक्ट्रिक पावर पर चलाना होगा। इस योजना के तहत सरकारी वाहनों का बेड़ा भी इलेक्ट्रिक में परिवर्तित होगा।
सब्सिडी
कितनी मिलेगी वाहनों पर सब्सिडी?
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने सब्सिडी देने का प्रस्ताव रखा है। दोपहिया वाहनों पर पहले साल में 10,000 रुपये/kWh का प्रोत्साहन मिलेगा। दूसरी और तीसरे साल में यह घटकर क्रमश: 6,600 और 3,300 रुपये रह जाएगा। तिपहिया वाहन पर 3 साल में क्रमश: 50,000, 40,000 और 30,000 रुपये सब्सिडी मिलेगी, जबकि मालवाहक वाहनों पर 1 लाख, 75,000 और 50,000 रुपये मिलेंगे। 30 लाख रुपये से कम कीमत वाली कारों पर 1 लाख रुपये का प्रोत्साहन मिलेगा।
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर
चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी दिया है ध्यान
दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड को चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए नोडल एजेंसी नामित किया गया है। मसौदे में चार्जिंग पॉइंट्स की तेजी से स्थापना के लिए सिंगल-विंडो क्लीयरेंस सिस्टम का प्रस्ताव है। इसमें सभी कंपनी डीलरशिप पर चार्जिंग स्टेशन अनिवार्य किए गए हैं। इस नीति में बैटरी रीसाइक्लिंग केंद्रों और प्रयुक्त लिथियम-आयन सेल के सुरक्षित निपटान के मानदंडों को भी शामिल किया गया है। सब्सिडी के आवेदन और अनुमोदन की प्रक्रिया अब कागज रहित डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी।