ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए सख्त होंगे इथेनॉल ब्लेंडिंग के नियम
क्या है खबर?
सरकार ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) और ऑटोमोटिव फ्यूल सप्लाई चेन से जुड़ी कंपनियों के लिए इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल में क्लोराइड की सीमा 3 पार्ट्स पर मिलियन (ppm) से कम रखना अनिवार्य करने पर विचार कर रही है। यह कदम वाहन निर्माता कंपनियों की ओर से ईंधन की गुणवत्ता और वाहन के पार्ट्स पर इसके संभावित असर को लेकर जताई गई चिंताओं के बीच उठाया जा रहा है। यह सीमा अभी इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल के लिए स्वैच्छिक गुणवत्ता मानकों का हिस्सा है।
शिकायत
वाहन निर्माताओं की शिकायत के बाद उठाया कदम
ईंधन की गुणवत्ता के मानक तय करने वाली संस्था भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) मिलावट से जुड़ी इस जरूरत को अनिवार्य बनाने पर काम कर रही है।
BIS के एक अधिकारी ने कहा, "हम अशुद्धियों की सीमा को अनिवार्य बनाना चाहते हैं।" इस कदम का मकसद पूरे भारत में ऑटोमोटिव ईंधन की बेहतर गुणवत्ता सुनिश्चित करना है।
यह फैसला तब लिया गया है, जब वाहन निर्माताओं ने E20 पेट्रोल में क्लोराइड का लेवल और नमी की अधिकता की शिकायत की।
नुकसान
ज्यादा मिलावट से हो रहा यह नुकसान
वाहन निर्माताओं का कहना है कि E20 पेट्रोल में क्लोराइड का ज्यादा लेवल और ज्यादा नमी होने की वजह से गाड़ी के कुछ पार्ट्स खराब हो रहे हैं।
गाड़ियों के टैंक से लिए गए फ्यूल के सैंपल में कई बार क्लोराइड की मात्रा ज्यादा पाई गई है, जिससे इसकी गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
यह मुद्दा इसलिए अहम है क्योंकि नीति निर्माता और उद्योग भविष्य में ज्यादा इथेनॉल वाले मिश्रण की तरफ बढ़ने पर विचार कर रहे हैं।