भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटरों की मांग बढ़ी, सितंबर में बिकने वाले हर 3 में 1 इलेक्ट्रिक
क्या है खबर?
भारत में इलेक्ट्रिक स्कूटरों की मांग तेजी से बढ़ रही है। सितंबर में देश में रजिस्टर हुए कुल स्कूटरों में करीब 33 प्रतिशत इलेक्ट्रिक थे, जबकि पिछले साल इसी महीने यह हिस्सेदारी 22 प्रतिशत थी। वाहन डैशबोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक, इलेक्ट्रिक स्कूटरों की बढ़ती लोकप्रियता से बाजार में बड़ा बदलाव दिख रहा है। सितंबर में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों का पंजीकरण भी 2.07 लाख यूनिट से अधिक पहुंच गया, जो अब तक का रिकॉर्ड है।
वजह
क्यों बढ़ी मांग?
इलेक्ट्रिक स्कूटरों की बढ़ती मांग के पीछे कम खर्च और कीमतों में अंतर कम होना प्रमुख कारण हैं।
दिल्ली में TVS आईक्यूब की शुरुआती ऑन-रोड कीमत करीब 1.02 लाख रुपये बताई गई है, जो होंडा एक्टिवा 110 DLX के बराबर है। ऐसे में खरीदार इलेक्ट्रिक विकल्प चुनने पर विचार कर रहे हैं।
इलेक्ट्रिक स्कूटर चलाने में पेट्रोल का खर्च नहीं आता, जिससे रोजाना आने-जाने वाले लोगों को बचत हो सकती है।
TVS
TVS और बजाज इलेक्ट्रिक स्कूटर बाजार में आगे
सितंबर में TVS मोटर कंपनी ने आईक्यूब की 54,000 से अधिक यूनिट बेचकर इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार में पहला स्थान हासिल किया। कंपनी की हिस्सेदारी करीब 26 प्रतिशत रही।
बजाज ऑटो अपने चेतक स्कूटर की लगभग 48,500 यूनिट के पंजीकरण के साथ दूसरे स्थान पर रही। बढ़ती मांग को देखते हुए बजाज अक्टूबर में चेतक का उत्पादन 42,000 से बढ़ाकर 62,000 यूनिट करने की योजना बना रही है।
एथर एनर्जी और हीरो मोटोकॉर्प का विदा ब्रांड भी आगे है।
बढ़ावा
सरकारी योजना से भी मिल रहा इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा
इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने में सरकार की प्रधानमंत्री ई-ड्राइव योजना और राज्य सरकारों की नीतियों की भी भूमिका है।
योजना के तहत पात्र खरीदारों को इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन पर अधिकतम 5,000 रुपये की सब्सिडी मिल सकती है। शुरुआत में यह योजना 31 मार्च, 2026 तक लागू थी, लेकिन अब इसे 2 साल बढ़ाकर 31 मार्च, 2028 तक कर दिया गया है।
कम खर्च, ज्यादा विकल्प और कंपनियों की बढ़ती भागीदारी से इलेक्ट्रिक स्कूटरों का बाजार विस्तार कर रहा है।