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दुनिया में करीब 200 साल पहले आई थी इलेक्ट्रिक कार, जानिए भारत में कब हुई शुरुआत
इलेक्ट्रिक कारों का विकास बहुत पहले हुआ था

दुनिया में करीब 200 साल पहले आई थी इलेक्ट्रिक कार, जानिए भारत में कब हुई शुरुआत

Feb 08, 2026
11:42 am

क्या है खबर?

दुनियाभर में प्रदूषण कम करने की कवायद के लिए इलेक्ट्रिक कारों को बढ़ावा दिया जा रहा है। वर्तमान में ज्यादातर कंपनियां ऐसे मॉडल्स पर ज्यादा ध्यान केंद्रित कर रही हैं। ज्यादातर लोगों यही जानते हैं कि इनका उपयोग कुछ ही सालों से ही किया जा रहा है, जबकि आज की टेस्ला या 1990 के दशक के अंत में आई जनरल मोटर्स की EV1 से बहुत पहले इनका उपयोग शुरू हो गया। आइये जानते हैं पहली इलेक्ट्रिक कार कब बनाई गई।

शुरुआत 

स्कॉटलैंड में हुई थी शुरुआत

इलेक्ट्रिक कारें आंतरिक दहन इंजन (ICE) कारों से पहले करीब 200 साल पहले अस्तित्व में आ गईं थीं। 1830 के दशक में स्‍कॉटलैंड में रॉबर्ट एंडरसन ने बिना रिचार्जेबल बैटरी के साथ पहला प्रोटोटाइप बनाया था, जो घोड़ा गाड़ी जैसी दिखती थी। यह 4 किमी/घंटा की रफ्तार से करीब 2.5 किलोमीटर चलती थी। इसके बाद 1859 में रिचार्ज करने योग्य बैटरियों का आविष्कार हुआ और 1887 में विलियम मॉरिसन ने रिचार्जेबल बैटरी वाली गाड़ी बनाई, जिसकी रेंज 80 किलोमीटर थी।

विकास

अमेरिका में भी हुई विकसित

इलेक्‍ट्रिक की शुरुआत भले ही 1830 के दशक में हो गई थी, लेकिन 1888 में जर्मनी के फ्लोकेम इलेक्‍ट्रिक वैगन सही मायने में एक कार थी। इसका निर्माण एंड्रियास फ्लोकेन ने किया। यूरोप के साथ ही अमेरिका में भी 1890 में इलेक्‍ट्रिक तकनीक से टैक्‍सी चलाई गई थीं। एक तरफ इस तकनीक पर ध्यान दिया जा रहा था, दूसरी तरफ ICE इंजन के बेहतर होने के साथ पेट्रोल-डीजल कारें तेजी से बढ़ने लगी। इस कारण इलेक्‍ट्रिक कारों बंद हो गईं।

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बंद 

ICE इंजन के विकास ने EVs से हटाया ध्यान   

इलेक्‍ट्रिक की शुरुआत भले ही 1830 के दशक में हो गई थी, लेकिन 1888 में जर्मनी के फ्लोकेम इलेक्‍ट्रिक वैगन सही मायने में एक कार थी। इसका निर्माण एंड्रियास फ्लोकेन ने किया। ICE इंजन के बेहतर होने के साथ पेट्रोल-डीजल कारें तेजी से बढ़ने लगी। इस कारण 1900 के दशक में इलेक्‍ट्रिक कारों से लोगाें का ध्यान हट गया। 1991 में लिथियम-आयन बैटरी आने और पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा होने के बाद इलेक्ट्रिक कारें फिर तेजी से बढ़ने लगी।

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भारत 

भारत में कैसे हुई थी शुरुआत

भारत में इलेक्ट्रिक कारों ने 1990 के दशक में दस्तक दी। चेतन मैनी और उनकी टीम ने 1993 में लवबर्ड पहली स्वदेशी इलेक्‍ट्रिक कार विकसित की, जो 2-सीटर, रिचार्जेबल बैटरी, DC मोटर और 60 किलोमीटर की रेंज वाली कार थी। इसका सफर कुछ खास नहीं रहा, लेकिन देश में EVs का मार्ग खोल दिया। 2001 में बिक्री के लिए रेवा इलेक्‍ट्रिक कार को उपलब्‍ध कराया। इसके बाद 2010 में प्रदूषण की चिंता बढ़ने पर इस तकनीक पर ध्‍यान दिया गया।

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