क्या प्रीमियम पेट्रोल से बढ़ता है माइलेज और पावर? जानिए इसके पीछे की सच्चाई
क्या है खबर?
पेट्रोल पंप पर गाड़ी में भरवाने के लिए आपको पेट्रोल 2 विकल्प मिलते हैं। एक सामान्य पेट्रोल होता है, जबकि दूसरा प्रीमियम पेट्रोल होता है, जिसमें स्पीड, पावर या XP95 शामिल है। इसकी कीमत सामान्य से थोड़ी ज्यादा होती है। ऐसे में गाड़ी मालिक के मन में सवाल आता है कि क्या प्रीमियम पेट्रोल उनके वाहन के लिए सच में बेहतर है या फिर इससे सिर्फ पैसे बर्बाद होते हैं। आइए जानते हैं इसके पीछे सच्चाई क्या है।
अंतर
दोनों तरह के पेट्रोल में क्या है अंतर?
सामान्य और प्रीमियम पेट्रोल में सबसे बड़ा अंतर ऑक्टेन रेटिंग का ही होता है। साधारण पेट्रोल की ऑक्टेन रेटिंग आमतौर पर 91 होती है, जबकि प्रीमियम पेट्रोल की रेटिंग 95 या उससे ज्यादा होती है। ऑक्टेन रेटिंग का सीधा कनेक्शन इस बात से है कि पेट्रोल इंजन के अंदर बिना किसी गड़बड़ी के कितना दबाव झेल सकता है। जब आप अपनी गाड़ी में हाई ऑक्टेन रेटिंग वाला प्रीमियम पेट्रोल डालते हैं तो इंजन पर इसके कई असर पड़ते हैं।
फायदा
क्या होता है प्रीमियम पेट्रोल का फायदा?
कम ऑक्टेन वाले फ्यूल कभी-कभी इंजन के सिलेंडर में सही समय से पहले ही जल जाता है। इससे इंजन से खट-खट की आवाज आने लगती है, जिसे नॉकिंग कहते हैं। हाई ऑक्टेन पेट्रोल समय से पहले होने वाले ब्लास्ट को रोकता है। नॉकिंग न होने की वजह से इंजन के पिस्टम और बाकी हिस्सों पर अतिरिक्त दबाव नहीं पड़ता, जिससे इंजन की उम्र बढ़ती है। साथ ही, कुछ खास केमिकल्स इंजन के अंदर कार्बन कचरे को जमा नहीं होने देते।
चुनाव
कैसे करें दोनों में से सही पेट्रोल का चुनाव?
आपके पास महंगी स्पोर्ट्स कार, कंप्रेसर/टर्बोचार्जर इंजन वाली गाड़ी या हाई-स्पीड सुपरबाइक है तो उसके लिए प्रीमियम पेट्रोल जरूरी है। इनके यूजर मैनुअल में भी 95 ऑक्टेन पेट्रोल इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। आप सामान्य कार या 100-150cc का बाइक चलाते हैं तो प्रीमियम पेट्रोल की जरूरत नहीं है। इनके इंजन कम ऑक्टेन पर ही बेहतर प्रदर्शन देने के लिए बनाए जाते हैं। इनमें प्रीमियम पेट्रोल से न तो माइलेज बढ़ेगा और न ही अतिरिक्त पावर मिलेगी।