क्या यूनाइटेड किंगडम को होगा विभाजन? स्वतंत्रता जनमत संग्रह के अधिकार के लिए मिलेंगे ये नेता
क्या है खबर?
यूनाइटेड किंगडम (UK) के राजनीतिक इतिहास में एक अभूतपूर्व कूटनीतिक हलचल शुरू हो गई है। स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड के शीर्ष नेता UK से अलग होने की प्रक्रिया को गति देने के लिए सोमवार (14 सितंबर) को एक ऐतिहासिक समझौते पर हस्ताक्षर करेंगे। द टेलीग्राफ के अनुसार, कार्डिफ में होने वाले एक शिखर सम्मेलन के दौरान ये तीनों राष्ट्र स्वतंत्रता जनमत संग्रह आयोजित करने के कानूनी अधिकार की मांग करते हुए एक संयुक्त घोषणापत्र जारी करेंगे।
कारण
क्या इस घटनाक्रम के पीछे का कारण?
UK के इतिहास में पहली बार तीनों गैर-अंग्रेजी क्षेत्रों में स्वतंत्रता समर्थक या राष्ट्रवादी पार्टियों की सरकारें हैं।
वेल्स में मई 2026 में लेबर पार्टी की हार के बाद स्वतंत्रता समर्थक दल प्लैड सिमरू सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और रून एप इयोएर्थ फर्स्ट मिनिस्टर बने।
स्कॉटलैंड में स्कॉटिश नेशनल पार्टी (SNP) ने अपनी स्थिति मजबूत की और उसके नेता जॉन स्विनी फर्स्ट मिनिस्टर हैं।
उत्तरी आयरलैंड में सिन फेन पार्टी सत्ता में है और मिशेल ओ'नील फर्स्ट मिनिस्टर हैं।
चिंगारी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान बना चिंगारी
इस साझा कदम को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान से भारी हवा मिली है, जो उन्होंने हाल ही में अपनी डबलिन यात्रा पर दिया था।
उन्होंने कहा था कि वे एक संयुक्त आयरलैंड देखना बेहद पसंद करेंगे।
ट्रंप के इस रुख ने UK से अलग होने की मांग कर रहे अलगाववादी नेताओं के हौसलों को और मजबूत कर दिया है।
कार्डिफ में होने वाली इस बैठक में आयरलैंड की मुख्य विपक्षी नेता मैरी लू मैकडोनाल्ड भी शामिल होंगी।
रुख
क्या है ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बर्नहैम का रुख?
इस पूरे विवाद के केंद्र में ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम का संसद में दिया गया एक बयान है।
उन्होंने संसद में संकेत दिया था कि यदि स्कॉटलैंड में स्वतंत्रता के पक्ष में 'स्पष्ट जनमत' दिखाई देता है, तो वह दूसरे जनमत संग्रह की अनुमति देने पर विचार कर सकते हैं।
इसके बाद स्कॉटिश फर्स्ट मिनिस्टर जॉन स्विनी ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर एक वैध और कानूनी जनमत संग्रह के तंत्र पर वार्ता शुरू करने की मांग कर दी।
बदलाव
प्रधानमंत्री बर्नहैम ने बदला बयान
स्विनी ने दावा किया कि प्रधानमंत्री अब इस कड़वे सच का सामना कर रहे हैं कि वह इतिहास में UK के अंतिम प्रधानमंत्री के रूप में दर्ज होने जा रहे हैं।
इसके बाद प्रधानमंत्री बर्नहैम ने स्विनी को जवाबी पत्र लिखकर स्पष्ट किया कि स्कॉटलैंड की स्वतंत्रता के लिए दूसरा मतदान पूरी तरह अस्वीकार्य है।
उन्होंने कहा कि उनके पिछले बयान का गलत मतलब निकाला गया। उनका कहना था कि फिलहाल स्कॉटलैंड में जनमत संग्रह के लिए सहमति नहीं है।
दावा
स्विनी का दावा- वर्तमान स्थिति को बरकरार रखना नामुमकिन
प्रधानमंत्री बनहैम के इनकार के बावजूद, स्कॉटिश नेता स्विनी ने रविवार को दो टूक शब्दों में कहा कि अब वर्तमान स्थिति को लंबे समय तक बरकरार रखना नामुमकिन है और वेस्टमिंस्टर (ब्रिटिश संसद) को UK के बाद के भविष्य के लिए मानसिक रूप से तैयार रहना चाहिए।
बता दें कि सोमवार को होने वाला यह समझौता लंदन स्थित केंद्र सरकार के लिए एक बहुत बड़ी कूटनीतिक और राजनीतिक चुनौती बनने जा रहा है।