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क्या तुर्की-पाकिस्तान और सऊदी के 'इस्लामिक NATO' में शामिल होगा बांग्लादेश? क्या होगा फायदा
तुर्की-पाकिस्तान और सऊदी अरब ने किया है मक्का संयुक्त रक्षा समझौता

क्या तुर्की-पाकिस्तान और सऊदी के 'इस्लामिक NATO' में शामिल होगा बांग्लादेश? क्या होगा फायदा

लेखन गजेंद्र
Aug 31, 2026
06:14 pm

क्या है खबर?

सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान की ओर से 7 अगस्त को हस्ताक्षरित मक्का संयुक्त रक्षा समझौते ने खाड़ी क्षेत्र से लेकर दक्षिण एशिया तक नई रणनीतिक वास्तविकता को जन्म दिया है। रक्षा समझौते की सोमवार को मंत्रिस्तरीय बैठक तुर्की में हुई है, जिसमें अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा स्थिति पर चर्चा हुई है। गठबंधन में शामिल होने को लेकर बांग्लादेश सरकार का रुख भी सामने आने लगा है। क्या बांग्लादेश 'इस्लामिक NATO' में शामिल होगा और उसे क्या फायदा है? आइए, जानते हैं।

गठबंधन

क्या है मक्का संयुक्त रक्षा समझौता?

मध्य पूर्व में बढ़ते युद्ध संकट को देखते हुए सऊदी, तुर्की और पाकिस्तान ने मिलकर 7 अगस्त को मक्का संयुक्त रक्षा समझौता किया है।

इसका सिद्धांत NATO के सामूहिक रक्षा सिद्धांत जैसा है, यानी गठबंधन के किसी देश पर हमला हुआ तो उसे गठबंधन में शामिल सभी देशों पर हमला माना जाएगा।

समझौते का उद्देश्य सामूहिक सुरक्षा, सैन्य सहयोग बढ़ाना और क्षेत्रीय सुरक्षा है। इसे वास्तविक सैन्य ढांचे में बदलने के लिए रणनीतिक राजनीतिक और रक्षा समिति बनाई गई है।

बांग्लादेश

 मक्का समझौते पर बांग्लादेश का क्या रुख है?

बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने कहा कि मक्का समझौते को लेकर सऊदी अरब और तुर्की के साथ बातचीत चल रही है और बांग्लादेश को शामिल करने के संबंध में दोनों देशों का रुख सकारात्मक है।

उन्होंने कहा कि सरकार को बांग्लादेश के इसमें शामिल होने से कोई खतरा नहीं दिखता।

विदेश मंत्री खलीलुर रहमान पहले ही संकेत दे चुके हैं कि अगर बांग्लादेश को निमंत्रण मिलता है तो वह सकारात्मक रूप से विचार रहेगा।

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संबंध

बांग्लादेश गठबंधन का हिस्सा क्यों बनना चाहता है?

बांग्लादेश इस गठबंधन के पीछे भले ही रणनीतिक रूप से पूरी तरह विचार न कर पाया हो, लेकिन वह सुरक्षा और आर्थिक फायदे को महत्वपूर्ण मान रहा है।

बांग्लादेश अपने रेडीमेड गारमेंट्स निर्यात के लिए पश्चिमी बाजारों पर निर्भर है। चीन के साथ महत्वपूर्ण आर्थिक-रणनीतिक संबंध है, भारत के साथ भौगोलिक-राजनीतिक संबंध है और खाड़ी देशों में उसके लोग बड़े पैमाने पर कार्यरत हैं।

इसलिए ढाका बड़े आर्थिक और रणनीतिक संबंध के साथ सैन्य तकनीक विस्तार को देख रहा है।

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खतरा

बांग्लादेश को किससे खतरा है?

डेली स्टार के मुताबिक, ढाका की तात्कालिक चिंताएं बंगाल की खाड़ी, समुद्री सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, आतंकवाद, अंतरराष्ट्रीय अपराध, आपदा, साइबर खतरे और अपने व्यापार और ऊर्जा मार्गों की सुरक्षा से संबंधित हैं।

इस्लामिक NATO में शामिल तुर्की ने एक मजबूत स्वदेशी रक्षा उद्योग खड़ा किया है, पाकिस्तान को सैन्य अभियानों और रक्षा उत्पादन का व्यापक अनुभव है और सऊदी अरब के पास वित्तीय संसाधन है।

ऐसे में साझेदारी बांग्लादेश को पारंपरिक हथियार खरीद से परे अवसर प्रदान कर सकती है।

भारत

क्या भारत से रिश्तों की जटिलता को देखते हुए ढाका कदम बढ़ा रहा है?

अतीत में पाकिस्तान से शत्रुता के बाद हाल में बांग्लादेश-पाकिस्तान के रिश्तों में काफी सुधार हुआ है, वहीं भारत के साथ बांग्लादेश के रिश्तों में जटिलता आई है।

इसके बाद भी बांग्लादेश के भारत के साथ भौगोलिक और राजनीतिक संबंध है। व्यापार, पारगमन, सीमा प्रबंधन, जल संसाधन, ऊर्जा और क्षेत्रीय संपर्क के लिए उसे नई दिल्ली के साथ सुचारू संबंध आवश्यक हैं।

इसलिए, पाकिस्तान के साथ औपचारिक सैन्य गठबंधन को भारत में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव माना जा सकता है।

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