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जर्मनी श्रमिकों की कमी की समस्या के बीच भारतीयों की ओर क्यों कर रहा है रुख?

जर्मनी श्रमिकों की कमी की समस्या के बीच भारतीयों की ओर क्यों कर रहा है रुख?

Mar 23, 2026
07:30 pm

क्या है खबर?

जर्मनी काफी समय से कुशल श्रमिकों की कमी से जूझ रहा है। तमाम प्रयासों के बाद भी उसे इस समस्या से राहत नहीं मिली है। आखिरकर अब वह इस कमी की पूर्ति के लिए भारतीयों की ओर देख रहा है। हालात यह है कि वहां की सरकार भारतीय छात्रों और युवा पेशेवरों को आकर्षित करने के लिए वीजा और भाषा संबंधी आवश्यकताओं में ढील दे रही है। ऐसे में आइए जर्मनी की इस नीति के पीछे का कारण जानते हैं।

संकट

जनसांख्यिकीय संकट से जूझ रहा है जर्मनी

जर्मनी जनसांख्यिकीय संकट का सामना कर रहा है। DW के अनुसार, 2025 में जर्मनी की जनसंख्या 8.36 करोड़ थी। जनसंख्या में 2024 में केवल 0.1 प्रतिशत और 2023 में 0.4 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई थी। साल 2024 में 60-79 वर्ष की आयु के लोगों की संख्या में 2.2 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई। 80 वर्ष से अधिक आयु की आबादी में 0.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई। 2024 के अंत में जर्मनी की 30.5 प्रतिशत आबादी 60 वर्ष या उससे अधिक आयु की थी।

समस्या

कमजोर प्रजनन दर है जर्मनी की समस्या

जर्मनी की प्रमुख समस्याओं में प्रजनन दर भी है, जो वर्तमान में 1.35 से 1.39 है। जनसंख्या प्रतिस्थापन दर (वर्तमान स्तर बनाए रखने के लिए आवश्यक जन्म लेने वालों की संख्या) 2.1 है। यहां जन्म लेने वालों की तुलना में मरने वालों की संख्या अधिक रही है। यहां विदेशी नागरिकों की संख्या 2024 में बढ़कर 1.24 करोड़ हो गई। इनमें 14 लाख तुर्की, 10 लाख यूक्रेनी, 8.89 लाख सीरियाई, 7.71 लाख रोमानियाई और 7.23 लाख पोलिश नागरिक हैं।

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जानकारी

जर्मनी को हर साल चाहिए 2.88 लाख विदेशी श्रमिक

BBC के अनुसार, 2024 के एक अध्ययन में अनुमान लगाया गया था कि देश को हर साल 2.88 लाख विदेशी कामगारों की आवश्यकता है। ऐसे न होने पर 2040 तक कर देने वाले कर्मचारियों की संख्या में 10 प्रतिशत की कमी आ जाएगी।

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रुचि

भारतीय श्रमिकों में कैसे बढ़ी जर्मनी की रुचि

जर्मनी में श्रमिकों की कमी ने ही भारतीयों की भूमिका बढाई है। भारत की 1.46 अरब आबादी में लगभग दो तिहाई 15-64 वर्ष की आयु की हैं। यह लगभग 90 करोड़ के बराबर है, जिनमें से लाखों लोग रोजगार की तलाश में हैं। साल 2021 में हैंडिर्क वॉन उंगेर्न-स्टर्नबर्ग को एक भारतीय एजेंसी से मिले ईमेल में लिखा था, 'हमारे पास बहुत से युवा, उत्साही लोग हैं जो व्यावसायिक प्रशिक्षण की तलाश में हैं। क्या आप उनमें रुचि रखते हैं।'

कंपनी

हैंडिर्क वॉन उंगेर्न-स्टर्नबर्ग क्या है?

हैंडिर्क वॉन उंगेर्न-स्टर्नबर्ग दक्षिण-पश्चिम जर्मनी के फ्रीबर्ग चैंबर ऑफ स्किल्ड क्राफ्ट्स के लिए काम करती है। यह समूह राजमिस्त्री, बढ़ई, कसाई और बेकर जैसे कुशल कामगारों का प्रतिनिधित्व करता है। कंपनी ने एक रिपोर्ट में बताया, "हमारे पास कई ऐसे नियोक्ता थे, जो भारतीय कामगारों को काम पर रखने को बेताब थे। इसलिए हमने भारतीयों को मौका देने का फैसला किया।" उसके बाद वहां भारतीय श्रमिकों की मांग बढ़ गई।

प्रयास

सरकार की ओर से क्या उठाए गए कदम

कुशल श्रमिकों की कमी को पूरा करने के लिए जर्मनी सरकार ने भी आवश्यक कदम उठाए हैं। भारत और जर्मनी ने 2022 में प्रवासन और गतिशीलता साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद 2024 के अंत में जर्मन चांसलर ओलाफ स्कोल्ज ने भारतीय नागरिकों के लिए कुशल कार्य वीजा कोटा को प्रति वर्ष 20,000 से बढ़ाकर 90,000 करने का ऐलान कर दिया। यही कारण है कि जर्मनी के लिए भारत की ओर देखना स्वाभाविक है।

फायदा

जर्मनी को कैसे हो रहा फायदा?

TOI ने जर्मनी स्थित वैश्विक गतिशीलता सेवा प्रदाता प्रोफऑर्ग के प्रबंध निदेशक रेमको रेहबर्ग के हवाले से लिखा है कि जर्मनी में कुशल श्रमिकों की भारी कमी है। उन्होंने नर्सिंग, बुजुर्गों की देखभाल और प्रमुख चिकित्सा विशेषज्ञताओं के साथ-साथ व्यापार, लॉजिस्टिक्स, आतिथ्य और बाल देखभाल जैसे क्षेत्रों का विशेष रूप से उल्लेख किया। कुल मिलाकर वहां लगभग 1.25 लाख पदों को भरने की आवश्यकता है और भारतीय इस कमी को पूरा कर सकते हैं।

लाभ

भारतीयों को कैसे मिल रहा है लाभ?

बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, जर्मन भाषा के व्यावसायिक समाचार पत्र हैंडल्सब्लाट द्वारा 2024 में किए गए एक अध्ययन से पता चला है कि जर्मनी में भारतीय श्रमिक अपने जर्मन समकक्षों की तुलना में एक तिहाई अधिक कमाते हैं। अध्ययन में पाया गया कि भारतीय कर्मचारियों की औसत मासिक सकल आय 6,202 डॉलर (लगभग 5.82 लाख रुपये) थी, जबकि जर्मन कर्मचारियों की औसत मासिक सकल आय 4,804 डॉलर (लगभग 4.51 लाख रुपये) थी।

कारण

जर्मनी में भारतीय श्रमिकों को वेतन क्यों अधिक है?

जर्मनी में भारतीय श्रमिकों के अधिक वेतन का मुख्य कारण वहां के तकनीकी और अकादमिक क्षेत्रों में भारतीयों की अधिक संख्या होना है। जर्मन अर्थव्यवस्था संस्थान ने बताया कि विदेशी कर्मचारियों की कुल औसत मासिक सकल आय 3,685 डॉलर (लगभग 3.46 लाख रुपये) थी। प्रमुख विदेशी राष्ट्रीयताओं में भारतीय कामगारों का औसत वेतन ही सबसे अधिक हैं। दूसरे नंबर पर ऑस्ट्रियाई कामगार हैं, जिनका औसत वेतन 6,120 डॉलर (लगभग 5.74 लाख रुपये) ही है।

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