चीन की PoK-अफगानिस्तान सीमा पर बनी सेनलिंग काउंटी भारत के लिए चिंता का विषय क्यों?
क्या है खबर?
चीन ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और अफगानिस्तान की सीमाओं के निकट शिनजियांग क्षेत्र में एक नया सेनलिंग काउंटी स्थापित किया है। दिसंबर 2024 के बाद से चीन की ओर से इस अशांत क्षेत्र में बनाया गया यह तीसरा काउंटी है। नए काउंटी का स्थान चीन के लिए इसके रणनीतिक महत्व को दर्शाता है। हालांकि, यह भारत के लिए बड़ी चिंता का विषय है। ऐसे में आइए जानते हैं यह काउंटी भारत के लिए चिंता का विषय क्यों है।
काउंटी
क्या है शिनजियांग प्रांत में स्थित सेनलिंग काउंटी?
चीन ने कराकोरम पर्वतमाला के पास दक्षिण-पश्चिमी शिनजियांग में सेनलिंग काउंटी की स्थापना की है। साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट (SCMP) की रिपोर्ट के अनुसार, शिनजियांग उइघुर स्वायत्त क्षेत्र की सरकार ने 26 मार्च को इस नई काउंटी की स्थापना की घोषणा की थी। हालांकि, सेनलिंग काउंटी के सटीक प्रशासनिक विभाजन और सीमाओं को अभी तक स्पष्ट नहीं किया गया है, लेकिन खबरों के अनुसार इस काउंटी का प्रशासन काशगर प्रान्त के तहत आएगा।
प्रांत
CPEC का प्रारंभिक बिंदू है काशगर प्रांत
प्राचीन सिल्क मार्ग पर स्थित काशगर प्रांत चीन को दक्षिण और मध्य एशिया से जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है। यह चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड पहल (BRI) के एक भाग चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) का आरंभिक बिंदु भी है। भारत ने 62 अरब डॉलर (लगभग 5,789 करोड़ रुपये) की CPEC अवसंरचना परियोजना का विरोध किया है क्योंकि यह PoK से होकर गुजरती है और भारत की संप्रभुता का उल्लंघन करती है।
महत्व
चीन के लिए क्या है सेनलिंग काउंटी का महत्व?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीन ने नया काउंटी बनाकर संकरे वाखान कॉरिडोर के साथ सुरक्षा को मजबूत करने और उइघुर अलगाववादी आतंकवादियों की घुसपैठ को रोकने का लक्ष्य रखा है। वाशिंगटन स्थित स्टिमसन सेंटर में चीन कार्यक्रम के निदेशक युन सन ने कहा कि नए काउंटी प्रभावी शासन और नियंत्रण के लिए मजबूत जमीनी स्तर की सरकारी संरचना की दिशा में एक कदम का संकेत है। यह सीमावर्ती क्षेत्र में सरकार के स्थिरीकरण प्रयासों को मजबूत करेगा।
चिंता
आतंकवादी समूहों से बढ़ रही है चीन की चिंता
रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान की सीमा के निकट स्थित इस काउंटी की स्थिति मध्य एशिया के साथ क्षेत्र के गहरे सांस्कृतिक और भाषाई संबंधों का फायदा उठाने वाले अफगानिस्तान स्थित आतंकवादी समूहों के बारे में चीन की बढ़ती चिंता को दर्शाती है। शिनजियांग में मुख्य रूप से मुस्लिम उइगर, ताजिक, किर्गिज और कजाख जाति के लोग रहते हैं। चीन उइगर और अन्य मुस्लिम जातीय समूहों पर मानवता के विरुद्ध अपराध का आरोप लगाता रहा है।
संकेत
सीमावर्ती क्षेत्रों पर चीन के जोर का संकेत है सेनलिंग काउंटी
चीन ने पहले भी पूर्वी तुर्किस्तान इस्लामिक मूवमेंट (ETIM) के उइघुर आतंकवादियों द्वारा ताजिकिस्तान, पाकिस्तान और PoK को अलग करने वाले वाखान कॉरिडोर का उपयोग करके अफगानिस्तान से शिनजियांग में प्रवेश करने पर चिंता व्यक्त की है। शंघाई स्थित फुदान विश्वविद्यालय के अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संस्थान के प्रोफेसर लिन मिनवांग ने कहा, "सेनलिंग काउंटी इस क्षेत्र के रणनीतिक महत्व के प्रति चीन की गहरी समझ को दर्शाता है। यह निर्णय सीमावर्ती क्षेत्रों पर चीन के जोर का संकेत है।"
चिंता
शेनलिंग काउंटी भारत के लिए क्यों है चिंता का विषय?
सेनलिंग शिनजियांग में गठित तीसरा नया काउंटी है। अन्य दो काउंटी हेआन और हेकांग हैं, जो होटान प्रान्त में हैं। पिछले साल भारत ने इस पर विरोध दर्ज कराया था कि हेआन और हेकांग को उसके अधिकार क्षेत्र के हिस्से के रूप में बनाया गया है, जो उसके केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में आते हैं। हेआन में विवादित अक्साई चिन पठार का अधिकांश भाग शामिल है। 1962 के युद्ध में चीन ने इस पर कब्जा कर लिया था।
निंदा
भारत ने की चीन के प्रयासों की निंदा
भारत ने रविवार (12 अप्रैल) को चीन के प्रयासों की कड़ी निंदा की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा, "चीन द्वारा झूठे दावे पेश करने और निराधार कहानियां गढ़ने के ऐसे प्रयास इस निर्विवाद वास्तविकता को नहीं बदल सकते कि अरुणाचल प्रदेश सहित ये स्थान और क्षेत्र भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा थे, हैं और हमेशा रहेंगे। चीनी पक्ष की ये कार्रवाइयां द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर और सामान्य बनाने के रहे प्रयासों को बाधित करती हैं।"