ईरान-इजरायल के बीच दोबारा क्यों शुरू हुए हमले और इसका शांति वार्ता पर क्या होगा असर?
क्या है खबर?
इजरायल और ईरान एक बार फिर एक-दूसरे पर हमले कर रहे हैं, जो पश्चिम एशिया युद्ध में 8 अप्रैल को हुए युद्धविराम के बाद से सबसे भीषण तनाव है। इससे पूर्ण युद्ध का खतरा बढ़ गया है। यह हमला ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से ऐसे हमलों से बचने को कहा था। आइए जानते हैं इस मौजूदा तनाव का अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता पर क्या असर होगा।
हमला
ईरान ने इजरायल पर किए ताजा हवाई हमले
इजरायल और ईरान के बीच रविवार रात से ही हमले हो रहे हैं। इजरायली रक्षा बल (IDF) ने सोमवार सुबह कहा कि ईरान ने मिसाइलें दागी हैं। खतरे को रोकने के लिए रक्षा प्रणालियां सक्रिय हैं और संबंधित क्षेत्रों में रहने वाले आम लोगों को सतर्क कर दिया गया है। उससे पहले इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कोर (IRGC) ने नेवातिम और तेल नोफ में स्थित दो इजरायली हवाई अड्डों को निशाना बनाने का दावा किया था। उसके बाद तनाव बढ़ गया।
कार्रवाई
इजरायल ने ईरान पर की जवाबी कार्रवाई
ईरान के हमलों के बाद इजरायल ने भी जवाबी कार्रवाई की है। IDF ने कहा कि इजरायल ने ईरान के दक्षिण-पश्चिम शहर बंदर-ए महशर में स्थित करुण पेट्रोकेमिकल कंपनी पर हवाई हमला किया, जिससे संयंत्र के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा है। इससे पहले IDF ने कहा था कि वह मध्य और पश्चिमी ईरान में सैन्य ठिकानों पर हमला कर रहा है। तेहरान, इस्फहान, तबरीज और नजफाबाद सहित कई ईरानी शहरों में विस्फोटों की खबरें आई हैं।
मनमानी
ट्रंप के मना करने पर भी इजरायल ने ईरान पर किया हमला
इजरायल द्वारा लेबनान पर किए गए हमलों को लेकर ट्रंप और नेतन्याहू के बीच तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। एक अमेरिकी अधिकारी ने एक्सियोस न्यूज से कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री नेतन्याहू से ईरान के खिलाफ जवाबी कार्रवाई को रोकने के लिए कहा है। उन्होंने कहा था, "हम एक समझौते के संदर्भ में कुछ अच्छा करने के करीब हैं।" इसके बाद भी इजरायल ने हमला कर ट्रंप के साथ नए तनाव की शुरुआत की है।
जानकारी
इजरायल को स्वीकार करन होगा समझौता- ट्रंप
ट्रंप ने फाइनेंशियल टाइम्स से कहा, "नेतन्याहू को ईरान के साथ अमेरिका द्वारा किए जाने वाले समझौते को स्वीकार करना होगा क्योंकि उनके पास कोई विकल्प नहीं होगा। सभी फैसले मैं लेता हूं। वह (नेतन्याहू) फैसले नहीं ले सकते हैं।"
सवाल
इजरायल के हमलों का अमेरिका-ईरान वार्ता पर होगा असर?
आज ईरान युद्ध का 100वां दिन है। अप्रैल में अमेरिका द्वारा ईरान के साथ युद्धविराम समझौते पर पहुंचने के बाद से इजरायल और ईरान के जवाबी हमले सबसे भीषण तनाव का कारण हैं। अमेरिका, इजरायल पर हमले टालने का दबाव बना रहा है ताकि ईरान के साथ शांति समझौता हो सके। हालांकि, अब ट्रंप को चिंता है कि इजरायल की कार्रवाई से अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत गंभीर रूप से बाधित हो सकती है।
कारण
इजरायल ने क्यों नहीं मानी ट्रंप की बात?
इजरायल की कार्रवाइयों से संकेत मिलता है कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते को लेकर चिंतित हैं, जिसे वे इजरायल के लिए प्रतिकूल मानते हैं। BBC के अनुसार, कई लोगों को संदेह है कि प्रधानमंत्री नेतन्याहू युद्ध को फिर से शुरू करने के लिए परिस्थितियां उत्पन्न करने की कोशिश कर रहे हैं। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि ट्रंप को विश्वास था कि उन्होंने नेतन्याहू को हमला न करने के लिए मना लिया है।
आवश्यकता
अमेरिका-ईरान समझौते के लिए इजरायल का शांत रहना आवश्यक
विशेषज्ञों का कहना है कि ईरान और अमेरिका के बीच किसी भी संभावित समझौते के लिए इजरायल का शांत रहना बहुत आवश्यक है। इजराइल में राष्ट्रीय सुरक्षा अध्ययन संस्थान के वरिष्ठ फेलो डैनी सिट्रिनोविच ने CNN से कहा कि अगर ट्रंप ईरान के साथ समझौता करना चाहते हैं और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलना चाहते हैं, तो उन्हें ईरान को निशाना बनाना बंद करने के लिए इजराइल पर दबाव डालना होगा। इसके बिना हालात बहुत अधिक बिगड़ जाएंगे।