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बेल्जियम के प्रधानमंत्री का 20 साल बाद भारत दौरा क्यों है इतना खास, क्या-क्या समझौते हुए?
बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर ने गुरुवार को प्रधानमंत्री मोदी से मुलाकात की

बेल्जियम के प्रधानमंत्री का 20 साल बाद भारत दौरा क्यों है इतना खास, क्या-क्या समझौते हुए?

लेखन गजेंद्र
Sep 03, 2026
08:35 pm

क्या है खबर?

बेल्जियम के प्रधानमंत्री बार्ट डी वेवर गुरुवार को अपनी 3 दिवसीय यात्रा पर भारत पहुंचे हैं। वह 2 से 4 सितंबर तक दिल्ली और मुंबई का दौरा करेंगे। यह मौका 20 साल बाद आया है, जब बेल्जियम का कोई मौजूदा प्रधानमंत्री भारत यात्रा पर हैं। उनसे पहले प्रधानमंत्री गाय वेरहोफस्टाट 2 से 7 नवंबर, 2006 को भारत आए थे और तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की थी। इस बार का यह दौरा कितना खास है? आइए, जानते हैं।

संबंध

भारत और बेल्जियम के कितने पुराने संबंध?

भारत और बेल्जियम के संबंध काफी पुराने हैं। पहले विश्व युद्ध में बेल्जियम के फ्लैंडर्स क्षेत्र में 9,000 से अधिक भारतीय सैनिकों ने बलिदान दिया था।

इसी ऐतिहासिक संबंध को आज भी दोनों देश अपनी साझा विरासत का हिस्सा मानते हैं।

साथ ही, बेल्जियम उन पहले यूरोपीय देशों में था, जिसने सितंबर 1947 में स्वतंत्र भारत के साथ राजनयिक संबंध स्थापित किए थे और 2027 में दोनों देश अपने राजनयिक संबंधों के 80 साल पूरे करेंगे।

व्यापार

UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता की पैरवी करता रहा है बेल्जियम

भारत और बेल्जियम के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंध साझा मूल्यों पर आधारित हैं, जिनमें कानून के शासन, संघवाद और बहुलवाद के प्रति प्रतिबद्धता शामिल है।

दोनों देश संघीय व्यवस्था रखते हैं, बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक हैं। बेल्जियम संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत की स्थायी सदस्यता की दावेदारी का समर्थन करता रहा है।

भारत यूरोपीय संघ (EU) के साथ साझेदार है, ऐसे में बेल्जियम के साथ उसके रिश्ते और प्रगाढ़ हैं।

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व्यापार

दोनों देशों के बीच कितना है व्यापार?

भारत सरकार के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-बेल्जियम का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 13.01 अरब डॉलर का रहा है।

इसमें भारत का निर्यात 6.32 अरब डॉलर और बेल्जियम से आयात 6.88 अरब डॉलर रहा था। बेल्जियम से भारत में अप्रैल 2000 से दिसंबर 2025 तक प्रत्यक्ष विदेश निवेश (FDI) करीब 4.2 अरब डॉलर का रहा।

दोनों देशों ने अगले 5 वर्षों में व्यापार दोगुना करने का लक्ष्य रखा है। भारत-EU मुक्त व्यापार समझौते (FTA) से सहयोग बढ़ेगा।

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व्यापार

हीरे का प्रमुख खरीदार है बेल्जियम

भारत और बेल्जियम के बीच हीरे, कीमती पत्थर और कीमती धातुओं के अलावा रक्षा-सुरक्षा और स्वच्छ ऊर्जा का व्यापार होता है। हालांकि, इसमें हीरा प्रमुख है।

बेल्जियम का एंटवर्प शहर जहां वैश्विक हीरा हब है, तो भारत कटिंग-पॉलिशिंग का वैश्विक केंद्र है।

बेल्जियम से भारत आने वाली प्रमुख चीजें कीमती पत्थर, धातुएं, मशीनरी, रसायन, टेक्सटाइल से जुड़े उत्पाद, बेस मेटल हैं, जबकि भारत से हीरे, कीमती पत्थर, कीमती धातुएं, रसायन, बेस मेटल और उनसे बने उत्पाद बेल्जियम भेजे जाते हैं।

जानकारी

प्रधानमंत्री के अलावा बेल्जियम से भारत आते रहे प्रमुख लोग 

भले ही बेल्जियम के प्रधानमंत्री 20 साल बाद आए हों, लेकिन बेल्जियम के राजा अल्बर्ट द्वितीय, रानी पाओला 2008 में आए थे। तत्कालीन क्राउन प्रिंस फिलिप 2010 में, राजकुमारी एस्ट्रिड 2013 में और आर्थिक मिशनों के साथ बेल्जियम के विदेश मंत्री 2025 में आए थे।

समझौता

आज का दौरा क्यों महत्वपूर्ण?

बेल्जियम और भारत के बीच गुरुवार को हुआ द्विपक्षीय समझौता काफी खास है।

प्रधानमंत्री वेवर के साथ भारत दौरे पर रक्षा और विदेश व्यापार मंत्री थियो फ्रैंकन, व्यापारिक नेताओं का एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल और रक्षा उद्योग के प्रतिनिधि आया है।

दोनों पक्षों ने नवीकरणीय ऊर्जा, केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) और बेल्जियम फेडरल पुलिस के बीच ट्रांसनेशनल संगठित अपराध-साइबरक्राइम पर सहयोग का समझौता किया है।

स्टार्टअप, सेमीकंडक्टर, आतंकवाद के खिलाफ साझा प्रतिबद्धता और हरित ऊर्जा पर समझौता किया है।

समझौता

70 मिमी रॉकेट निर्माण से जुड़ी महत्वपूर्ण डील

बेल्जियम के पास अत्याधुनिक रक्षा तकनीक है, जबकि भारत घरेलू रक्षा उत्पादन बढ़ा रहा है।

ऐसे में दोनों देशों ने नियमित सैन्य और रक्षा वार्ता, स्टाफ वार्ता, सैन्य प्रशिक्षण, शिक्षा, रिसर्च, रक्षा उद्योग, तकनीकी सहयोग, सह-विकास और सह-उत्पादन की साझेदारी की है।

दौरे में भारत की भारत फोर्ज कंपनी ने फ्रांस की थेल्स के साथ बेल्जियम इकाई से जुड़े सहयोग के तहत 70 मिमी रॉकेट प्रणालियों के निर्माण के लिए उन्नत औद्योगिक क्षमता स्थापित करने के लिए समझौता किया है।

जानकारी

क्या है 70-मिमी रॉकेट प्रणाली

थेल्स की 70-मिमी रॉकेट प्रणालियों को हवा, जमीन या समुद्री जहाज से दागा जा सकता है। ये ड्रोन से मुकाबला करती हैं। भारतीय सेना पहले से ही इन रॉकेट प्रणालियों का उपयोग करती है। इसे बेल्जियम बनाती है। भारत में निर्माण 2027 तक शुरू होगा।

समझौता

सेमीकंडक्टर पर भारत को मिलेगा बेल्जियम के अनुभव का फायदा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और वेवर ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान आंध्र प्रदेश के काकीनाडा में दुनिया की सबसे बड़ी ग्रीन अमोनिया परियोजनाओं में सहयोग की घोषणा की।

भारत चिप निर्माण और सेमीकंडक्टर डिजाइन में तेजी से क्षमता बढ़ाना चाहता है, जिसमें उसे बेल्जियम के imec जैसी विश्वस्तरीय सेमीकंडक्टर अनुसंधान का फायदा मिलेगा।

इसके अलावा महत्वपूर्ण खनिज, बंदरगाह, व्यापार-निवेश सहयोग बढ़ाने का समझौता हुआ है।

दोनों अपनी-अपनी राजधानियों में रक्षा अताशे यानी वरिष्ठ सैन्य प्रतिनिधि भी नियुक्त करेंगे।

ट्विटर पोस्ट

दोनों प्रधानमंत्रियों की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस

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