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बस चालक से वेनेजुएला के राष्ट्रपति पद तक पहुंचने वाले निकोलस मादुरो कौन हैं?
वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को अमेरिकी सेना ने गिरफ्तार कर लिया है

बस चालक से वेनेजुएला के राष्ट्रपति पद तक पहुंचने वाले निकोलस मादुरो कौन हैं?

Jan 03, 2026
06:51 pm

क्या है खबर?

अमेरिका ने शनिवार को वेनेजुएला की राजधानी काराकस समेत 4 शहरों पर हमला करते हुए उसके कई सैन्य अड्डों को निशाना बनाया। इसके साथ ही अमेरिकी सेना वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सीलिया फ्लोरेस को पकड़कर अपने साथ ले गई। दोपहर में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट किया कि दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया है और उन्हें अमेरिका में आपराधिक आरोपों के लिए मुकदमे का सामना करना पड़ेगा। आइए जानते हैं निकोलस मादुरो कौन हैं।

पुष्टि

ट्रंप ने की मादुरो को हिरासत में लेने की पुष्टि

ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर लिखा, 'अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के खिलाफ बड़े पैमाने पर सफलतापूर्वक हमला किया है, जिन्हें उनकी पत्नी के साथ पकड़ लिया गया है और देश से बाहर ले जाया गया। यह ऑपरेशन अमेरिकी लॉ एनफोर्समेंट के साथ मिलकर किया गया। जल्द ही ज्यादा जानकारी दी जाएगी।' उसके बाद रिपब्लिकन सीनेटर माइक ली ने बताया कि राष्ट्रपति मादुरो को अमेरिकी सेना ने आपराधिक आरोपों में मुकदमा चलाने के लिए गिरफ्तार कर लिया है।

परिचय

कौन हैं निकोलस मादुरो?

मादुरो का जन्म 23 नवंबर, 1962 को एक श्रमिक वर्ग परिवार में हुआ था। वह ट्रेड यूनियन नेता के पुत्र हैं। उन्होंने 1990 के दशक की शुरुआत में एक बस चालक के रूप में काम किया, लगभग उसी समय जब सेना अधिकारी ह्यूगो चावेज ने 1992 में एक असफल तख्तापलट का प्रयास किया था। बाद में मादुरो ने चावेज की जेल से रिहाई के लिए अभियान चलाया और उनकी वामपंथी राजनीतिक परियोजना के एक प्रतिबद्ध समर्थक के रूप में उभरे।

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राजनीति

मादुरो ने 1998 में किया था राजनीति में प्रवेश

1998 में चावेज के राष्ट्रपति बनने के बाद मादुरो ने औपचारिक राजनीति में प्रवेश किया और विधायिका में सीट हासिल की। ​​उन्होंने नेशनल असेंबली का अध्यक्ष बने और बाद साल 2006 से 2012 तक विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया। उन्होंने वेनेजुएला के तेल संपदा द्वारा समर्थित अंतरराष्ट्रीय गठबंधन बनाने के लिए बड़े पैमाने पर यात्रा की। साल 2012 में चावेज ने अपनी मृत्यु से पहले मादुरो को उपराष्ट्रपति बनाकर सार्वजनिक रूप से अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया था।

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चुनौती

राष्ट्रपति पद के दौरान आर्थिक पतन और दमन की घटनाएं हुईं

साल 2013 में चावेज की मौत के बाद मादुरो ने मात्र 50 प्रतिशत से अधिक वोटों के साथ विशेष चुनाव में मामूली अंतर से जीत हासिल की। ​​ यह मामूली जनादेश जल्द ही अधिक सत्तावादी शासन शैली में तब्दील हो गया वह राष्ट्रपति बन गए। उनके कार्यकाल में देश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई, जिसमें मुद्रास्फीति, भोजन, दवाओं की कमी और बड़े पैमाने पर पलायन शामिल रहा। उनके शासनकाल में धांधली वाले चुनावों और दमनकारी नीति अपनाने के भी आरोप लगे।

प्रतिबंध

मादुरो के शासनकाल में विभिन्न देशों ने लगाए प्रतिबंध

अमेरिका और अन्य देशों ने मादुरो सरकार पर व्यापक प्रतिबंध लगाए। अमेरिका ने 2020 में उन पर भ्रष्टाचार और अन्य आरोपों में मुकदमा भी चलाया। विपक्ष और अंतरराष्ट्रीय पर्यवेक्षकों द्वारा 2024 के चुनाव को धोखाधड़ी करार दिए जाने के बाद मादुरो ने जनवरी 2025 में तीसरे कार्यकाल के लिए शपथ ली। संयुक्त राष्ट्र के एक हालिया तथ्य-जांच मिशन ने वेनेजुएला के बोलिवेरियन नेशनल गार्ड पर गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन और मानवता के खिलाफ अपराध करने का आरोप लगाया है।

आरोप

नोबेल पुरस्कार विजेता विपक्षी नेता ने लगाया मानवाधिकारों के हनन का आरोप

इस वर्ष वेनेजुएला के विपक्षी नेता मारिया कोरिना मचाडो को 2025 का नोबेल शांति पुरस्कार दिए जाने के बाद वेनेजुएला सरकार के दमनकारी रवैये पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फिर से ध्यान खींचा गया। इस कदम को व्यापक रूप से मचाडो के नेतृत्व वाले गुट के सत्तावादी शासन के खिलाफ संघर्ष का वैश्विक समर्थन और मादुरो द्वारा राजनीतिक असहमति पर की जा रही कार्रवाई की कड़ी निंदा के रूप में देखा गया। इससे मादुरो के खिलाफ विरोध के स्वर फूट पड़े।

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