Loading...
कौन हैं मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर, जो बन सकते हैं बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति?
बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी के महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर राष्ट्रपति चुनाव के उम्मीदवार हैं

कौन हैं मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर, जो बन सकते हैं बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति?

लेखन गजेंद्र
Aug 13, 2026
08:03 pm

क्या है खबर?

बांग्लादेश में नए राष्ट्रपति चुनने की कवायद तेज हो गई है। मोहम्मद शहाबुद्दीन ने अपना कार्यकाल समाप्त होने से 2 साल पहले 24 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद 20 अगस्त को राष्ट्रपति चुनाव का ऐलान किया गया है। बांग्लादेश की सत्तारूढ़ बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (BNP) ने अपने महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को उम्मीदवार बनाया है। संसद में बहुमत को देखते हुए उनके राष्ट्रपति बनने की संभावना अधिक है। आइए, जानते हैं कौन हैं मिर्जा?

चुनाव

मिर्जा का मुकाबला जमात के ओली अहमद से

बांग्लादेश में इस बार 23वें राष्ट्रपति का चुनाव 20 अगस्त को होगा। इसके लिए नामांकन शुरू हो गए हैं।

BNP के राष्ट्रीय अध्यक्ष और प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने गुरुवार को मिर्जा फखरुल का नाम घोषित किया है, जिन्होंने नामांकन भी दाखिल कर दिया।

बांग्लादेश की प्रमुख विपक्षी पार्टी जमात-ए-इस्लामी ने अपने गठबंधन के नेता लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष कर्नल (सेवानिवृत्त) ओली अहमद को उम्मीदवार बनाया है।

अभी संसदीय अध्यक्ष हाफिज उद्दीन अहमद कार्यवाहक राष्ट्रपति हैं।

पहचान

राजनीतिक परिवार से आते हैं मिर्जा फखरुल

78 वर्षीय मिर्जा बांग्लादेश के राजनीतिक परिवार से आते हैं। उनके पिता मिर्जा रूहुल अमीन वकील, राजनेता और सांसद रहे हैं।

उन्होंने ढाका विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र की पढ़ाई की है और अर्थशास्त्र में ऑनर्स और मास्टर किया है। उन्होंने अपना राजनीतिक सफर 1960 में छात्र जीवन से ही शुरू किया था।

तब 60 के दशक में ढाका विश्वविद्यालय में पढ़ते हुए वे पूर्वी पाकिस्तान छात्र संगठन (EPSU) से जुड़े थे। संगठन पूर्वी पाकिस्तान कम्युनिस्ट पार्टी की छात्र इकाई थी।

ADVERTISEMENT

आंदोलन

मुक्ति बाहिनी से नहीं रहा वास्ता

जब 1971 में पूर्वी पाकिस्तान आजाद होकर बांग्लादेश बना, तब मिर्जा ढाका विश्वविद्यालय में पढ़ाई कर रहे थे। हालांकि, उनके मुक्ति बाहिनी में शामिल होने का कोई पुख्ता प्रमाण नहीं मिलता।

उनके पिता पर स्वतंत्रता विरोधी आंदोलन में शामिल होने के आरोप लगते हैं, लेकिन उनके चाचा मुक्ति बाहिनी से जुड़े थे। पिता को लेकर खबरों का मिर्जा खंडन करते हैं।

हालांकि, मिर्जा अयूब खान के खिलाफ जन-विरोधी आंदोलन में जेल जरूर गए थे, लेकिन हथियार नहीं उठाया था।

ADVERTISEMENT

पद

1990 में BNP में शामिल हुए, महासचिव के पद तक पहुंचे

मिर्जा 1988 में ठाकुरगांव नगरपालिका के निर्दलीय चेयरमैन बने थे। 1990 में हुसैन मुहम्मद इरशाद के सैन्य शासन के खिलाफ वे BNP में शामिल हो गए।

उनको 1992 में ठाकुरगांव BNP का अध्यक्ष बनाया गया और यहीं से पार्टी में मजबूत होते गए। उन्होंने 2001 में पहली बार संसदीय चुनाव जीता।

मिर्जा तारिक की मां खालिदा जिया की सरकार में कई मंत्रालय संभाल चुके हैं।

उनको 2016 में पार्टी महासचिव बनाया गया। वे तारिक के बाद सबसे मजबूत नेता हैं।

चुनाव

बांग्लादेश में राष्ट्रपति चुनाव कैसे होता है?

बांग्लादेश के संविधान के अनुच्छेद-48 के मुताबिक राष्ट्रपति का चुनाव सांसद करते हैं, जनता सीधे वोट नहीं देती। बांग्लादेश की संसद में 300 निर्वाचित सीटें हैं।

राष्ट्रपति चुनाव में बहुमत से अधिक वैध सांसदों के वोट से राष्ट्रपति चुनाव जीता जा सकता है। इस बार संसद में BNP मजबूत है, जिसके पास 209 सीटे हैं।

जमात के पास 68 और नेशनल सिटिजन पार्टी के पास 6 सीट है। BNP और उसके सहयोगी दलों के पास 249 सांसदों का समर्थन है।

चुनाव

1991 के बाद अब होगा मतदान के जरिए राष्ट्रपति का चुनाव

बांग्लादेश में 1991 में अंतिम बार सांसदों के मतदान से राष्ट्रपति चुनाव हुआ था। तब BNP के अब्दुर रहमान बिस्वास ने आवामी लीग के बद्रुल हैदर चौधरी को हराया था। बिस्वास को 172, जबकि चौधरी को 92 वोट मिले थे।

इसके बाद लगभग हर राष्ट्रपति चुनाव में सत्तारूढ़ पार्टी का उम्मीदवार अकेला उतरा। दूसरे उम्मीदवार के नाम वापस ले लेने से निर्विरोध फैसला होता था।

वर्ष 1996 से लेकर 2023 तक उम्मीदवार आम तौर पर निर्विरोध जीतते रहे।

ADVERTISEMENT