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ईरान और अमेरिका के बीच हुए शांति समझौते से किसे सबसे बड़ा फायदा हुआ है?
ईरान और अमेरिका के बीच शांति समझौता हो गया है

ईरान और अमेरिका के बीच हुए शांति समझौते से किसे सबसे बड़ा फायदा हुआ है?

Jun 18, 2026
11:49 am

क्या है खबर?

अमेरिका और ईरान के बीच 100 दिन से ज्यादा तक चले युद्ध के बाद बुधवार रात को आखिरकार 14 सूत्रीय शांति समझौता हो गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस के भव्य वर्साय महल में आयोजित रात्रिभोज में समझौते पर हस्ताक्षर किए और फिर मीडिया को इसकी जानकारी दी। उसी समय ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी समझौते पर हस्ताक्षर किए। ऐसे में आइए जानते हैं इस समझौते में क्या है और इससे किसे सबसे अधिक फायदा हुआ है।

उद्देश्य

क्या है इस शांति समझौते का उद्देश्य?

करीब 800 शब्दों वाले इस समझौता ज्ञापन (MOU) का उद्देश्य ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम को आगे बढ़ाना और होर्मुज जलडमरूमध्य से यातायात को सुचारू रूप से चलाना है। हालांकि, इसमें कई महत्वपूर्ण पहलुओं को बाद के लिए छोड़ दिया गया है, जिनमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम का संवेदनशील मुद्दा भी शामिल है। ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते को एक जीत के रूप में प्रचारित किया है, लेकिन कई विशेषज्ञ इसे ईरान के लिए ज्यादा फायदेमंद मान रहे हैं।

बयान

समझौते को लेकर क्या बोले ट्रंप?

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने समझाैते की आवश्यकता को लेकर भी अहम बयान दिया है। उन्होंने कहा, "इस युद्ध के परिणामस्वरूप एक वैश्विक मंदी आ सकती थी। अगर यह समझौता नहीं होता, तो होर्मुज जलडमरूमध्य कभी नहीं खुलता और तेल संकट बना रहता।" इधर, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि दस्तावेज को दोनों राष्ट्रपतियों के हस्ताक्षर के साथ अंतिम रूप दिया गया है। इससे पश्चिम एशिया में शांति की बहाली का रास्ता साफ हो गया है।"

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युद्ध

समझौते के तहत सभी मोर्चों पर होगा युद्ध का अंत

समझौते के पहले बिंदु में अमेरिका-ईरान और उनके सहयोगियों ने लेबनान सहित सभी मोर्चों पर हमले तुरंत और स्थायी रूप से खत्म करने की घोषणा की है। दूसरे बिंदु में अमेरिका-ईरान एक-दूसरे की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करेंगे और आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे। तीसरे बिंदु में कहा गया कि दोनों देश अधिकतम 60 दिनों में एक अंतिम समझौते तक पहुंचने के लिए प्रतिबद्ध हैं। हालांकि, आवश्यकता के हिसाब से आपसी सहमति पर समय-सीमा बढ़ सकती है।

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नाकाबंदी

अमेरिका 30 दिन में हटा देगा नौसैनिक नाकाबंदी

चौथे बिंदु के मुताबिक, अमेरिका तुरंत ईरान के खिलाफ अपनी नौसैनिक नाकेबंदी हटाएगा और 30 दिनों में इसे खत्म कर देगा।आवाजाही का स्तर ईरान द्वारा बहाल युद्ध-पूर्व यातायात के अनुपात में होगा। 5वें बिंदु के अनुसार, ईरान 60 दिनों तक फारस की खाड़ी से ओमान सागर तक और इसके विपरीत दिशा में वाणिज्यिक जहाजों का सुरक्षित आवागमन बिना किसी शुल्क के करेगा। तकनीकी, सैन्य बाधाओं और बारूदी सुरंग हटाने के बाद 30 दिनों में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही शुरू होगी।

मदद

ईरान को 28 लाख करोड़ रुपये की मदद देगा अमेरिका

समझौते के छठे बिंदु के अनुसार, अमेरिका अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर (लगभग 28 लाख करोड़ रुपये) की मदद देगा। सभी वित्तीय भुगतान के लिए आवश्यक लाइसेंस, छूट और अनुमतियां दी जाएंगी। 7वें बिंदु के अनुसार, अमेरिका एक तय समय-सीमा में ईरान के खिलाफ सभी प्रतिबंध हटाएगा। इसी तरह आठवें बिंदु में ईरान-अमेरिका तेहरान के पास पहले से मौजूद समृद्ध यूरेनियम से निपटने के लिए सहमत हुए हैं।

यथास्थिति

अंतिम समझौते तक दोनों देश बनाए रखेंगे यथास्थिति

नौवें बिंदु में कहा गया कि अंतिम समझौते तक अमेरिका और ईरान यथास्थिति बनाए रखेंगे। 10वें बिंदु में अमेरिका ने वादा किया कि समझौते पर हस्ताक्षर होते ही, ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात, बैंकिंग लेनदेन, बीमा, परिवहन आदि सभी संबंधित सेवाओं के लिए छूट दी जाएगी। 11वें बिंदु में अमेरिका ने वादा किया कि इस समझौते के लागू होने पर ईरान के फ्रीज किए गए या प्रतिबंधित फंड को इस्तेमाल के लिए पूरी तरह उपलब्ध करा दिया जाएगा।

तंत्र

समझौते के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए स्थापित किया जाएगा तंत्र

12वें बिंदु में समझौते को सफलतापूर्वक लागू करने और कार्यान्वयन की निगरानी के लिए एक तंत्र स्थापित किया जाएगा। 13वें बिंदु के अनुसार, समझौते के अधीन इसके पैरा 1, 4, 5, 10 और 11 के कार्यान्वयन की शुरुआत, इनको लागू करने और इन उपायों के निरंतर कार्यान्वयन के बाद ही दोनों देश अंतिम समझौते पर बातचीत शुरू करेंगे। 14वें बिंदु में कहा गया कि अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक प्रस्ताव द्वारा अनुमोदित किया जाएगा।

फायदा

समझौते से किसे हुआ सबसे अधिक फायदा?

इस समझौते को अमेरिका अपनी बड़ी जीत मान सकता है, लेकिन इससे ईरान के व्यापक परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा हल नहीं होता। विशेषज्ञों के अनुसार, इसमें कई ऐसे मुद्दे हैं जिनका समाधान अगली बातचीत में होगा। इनमें ईरान के परमाणु सामग्री अपने पास रखने, सभी प्रमुख परमाणु सुविधाओं को बंद करने और नई सामग्री को समृद्ध करने की अनुमति जैसे सवाल स्पष्ट नहीं हुए हैं। ऐसे में यह समझौता अभी भी ईरान के लिए ज्यादा फायदेमंद है।

जानकारी

समझौते की भाषा नहीं है मजबूत

CNN की रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समझौते की भाषा 2015 के समझौते जितनी मजबूत नहीं है, जिसमें ईरान ने पुष्टि की थी कि वह किसी भी परिस्थिति में परमाणु हथियार बनाने, विकसित करने या हासिल करने का प्रयास नहीं करेगा।

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