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कौन हैं भारतीय मूल के कनिष्क नारायण और लिसा नंदी, जिन्हें बर्नहम मंत्रिमंडल में मिली जगह?
भारतीय मूल के कनिष्क नारायण और लिसा नंदी को एंडी बर्नहम मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है

कौन हैं भारतीय मूल के कनिष्क नारायण और लिसा नंदी, जिन्हें बर्नहम मंत्रिमंडल में मिली जगह?

Jul 21, 2026
12:28 pm

क्या है खबर?

एक दशक में ब्रिटेन के 7वें प्रधानमंत्री बनने के बाद एंडी बर्नहम ने अपने मंत्रिमंडल में बड़ा फेरबदल किया है। नई सरकार में भारतीय मूल के 2 राजनेताओं को महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसमें बिहार में जन्मे कनिष्क नारायण को देश का पहला कैबिनेट-स्तरीय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) मंत्री नियुक्त किया गया है, जबकि लीसा नंदी को संस्कृति सचिव के पद पर बरकरार रखा गया है। आइए इन दोनों भारतवंशी राजनेताओं के बारे में विस्तार से जानते हैं।

परिचय

कौन हैं कनिष्क नारायण?

कनिष्क नारायण का जन्म भारत में बिहार के मुजफ्फरपुर में हुआ था। 12 वर्ष की उम्र में उनका परिवार कार्डिफ में बस गया था।

उन्होंने कैथेज हाई स्कूल में प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय से उच्च शिक्षा पूरी की।

स्टैनफोर्ड विश्वविद्यालय से MBA करने के बाद उन्होंने वैश्विक प्रौद्योगिकी क्षेत्र में कदम रखते हुए सिलिकॉन वैली और ब्रिटेन में समय बिताया।

उन्होंने AI, फिनटेक और जलवायु परिवर्तन से जुड़ी पहलों में अग्रणी उद्यमियों का सहयोग किया।

कार्य

नारायण ने इन क्षेत्रों में भी किया है कार्य

नारायण ने साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान लॉकडाउन की घोषणा के बाद 'हेल्प योर हाई स्ट्रीट' नामक एक राष्ट्रीय अभियान की शुरुआत की, जिसने स्थानीय स्वतंत्र दुकानों को ग्राहकों से जोड़ा ताकि निरंतर डिलीवरी, मेल ऑर्डर और गिफ्ट कार्ड की खरीदारी को सुविधाजनक बनाया जा सके।

साल 2021 और 2023 के बीच उन्होंने सिटीजंस एडवाइस ब्यूरो के ट्रस्टी के रूप में कार्य किया। उन्होंने 2 वर्षों तक चैथम हाउस के सलाहकार पैनल में भी अपनी सेवाएं दीं।

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राजनीति

नारायण 2024 में बने थे सांसद

नारायण ने 2024 में ब्रिटेन में आम चुनाव लड़ने का फैसला किया, जहां उन्होंने वेले ऑफ ग्लैमोरगन सीट पर जीत हासिल कर 14 वर्षों के कंजर्वेटिव शासन के बाद लेबर पार्टी की वापसी कराई।

उन्होंने जुलाई 2024 से सितंबर 2025 के बीच पर्यावरण, खाद्य और ग्रामीण मामलों के विभाग में संसदीय निजी सचिव के रूप में कार्य किया।

वह स्थानीय मुद्दों के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता और स्वयंसेवा के अनुभवों पर गर्व करते हैं।

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जानकारी

कीर स्टार्मर सरकार में भी मंत्री थे नारायण

नारायण को सितंबर 2025 में कीर स्टार्मर सरकार में AI और ऑनलाइन सुरक्षा मंत्री बनाया गया था। उन्होंने प्रौद्योगिकी सचिव लिज केंडल के अधीन कार्य किया, जिन्हें बर्नहैम ने सोमवार को अन्य वरिष्ठ मंत्रियों के साथ पद से हटा दिया।

विचार

तकनीक को लेकर क्या हैं नारायण के विचार?

नारायण भविष्य में प्रौद्योगिकी की भूमिका के बारे में मुखर रहे हैं। उनका मानना है कि बदलती तकनीक ब्रिटेन के विकास के लिए एक बेहतरीन अवसर है।

हालांकि, वह AI के कारण होने वाले रोजगार के नुकसान को लेकर भी सचेत हैं।

उनका मानना है कि यह परिवर्तन निष्पक्ष होना चाहिए, संतोषजनक होना चाहिए और एक ऐसा परिवर्तन होना चाहिए जो एक देश के रूप में सभी लोगों के हित के लिए कारगर हो।

परिचय

कौन हैं लिसा नंदी?

भारतीय मूल की लिसा नंदी भी बर्नहैम मंत्रिमंडल में शामिल हैं। उनका जन्म 1979 में मैनचेस्टर में हुआ था।

उनके पिता दीपक नंदी कोलकाता के रहने वाले थे और उनकी मां ब्रिटिश मूल की थीं।

उन्होंने न्यूकैसल विश्वविद्यालय से राजनीति की पढ़ाई की और लंदन विश्वविद्यालय के बर्कबेक में लोक नीति का अध्ययन किया।

उसके बाद उन्होंने वाल्थमस्टो के सांसद नील गेरार्ड की सहायक, सेंटरपॉइंट संस्था में शोधकर्ता और द चिल्ड्रन्स सोसाइटी में वरिष्ठ नीति सलाहकार का भी कार्य किया।

राजनीति

नंदी ने 2010 में जीता था पहला चुनाव

नंदी को 2010 में विगन निर्वाचन क्षेत्र से लेबर पार्टी का उम्मीदवार चुना गया था। यह सीट 100 वर्षों से पार्टी के पास रही थी।

चुनाव में नंदी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 10,487 वोटों से जीत हासिल की। वह इस क्षेत्र की पहली महिला और पहली एशियाई सांसद बनी थीं।

नंदी और बर्नहम के बीच संबंध 2015 से हैं। उन्होंने लेबर पार्टी के नेतृत्व की दौड़ में उनका समर्थन किया था, जिसे अंततः जेरेमी कॉर्बिन ने जीता था।

चुनाव

नंदी ने 2020 में स्टार्मर के खिलाफ लड़ा था नेतृत्व का चुनाव

नंदी ने 2020 में नेतृत्व की दौड़ में स्टार्मर के खिलाफ चुनाव लड़ा था। हालांकि, वह तीसरे स्थान पर रहीं, लेकिन उन्हें शैडो विदेश सचिव के पद से सम्मानित किया गया।

जुलाई 2024 में स्टार्मर ने उन्हें संस्कृति सचिव नियुक्त किया।

उस समय उन्होंने कहा था, "रग्बी लीग से लेकर रॉयल ओपेरा तक, हमारी सांस्कृतिक और खेल विरासत हमारे कस्बों, गांवों और शहरों में व्याप्त है और यह हमारे देश की सबसे बड़ी संपत्तियों में से एक है।"

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