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अमेरिका और इजरायल के हमलों से ईरान के किन-किन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को हुआ नुकसान?
ईरान के ऐतिहासिक-सांस्कृतिक धरोहरों को हमलों से नुकसान

अमेरिका और इजरायल के हमलों से ईरान के किन-किन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को हुआ नुकसान?

लेखन गजेंद्र
Mar 16, 2026
01:32 pm

क्या है खबर?

अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी के ईरान पर संयुक्त हमले शुरू किए हैं, जिसमें न केवल सैन्य और रिहायशी इलाकों को निशाना बनाया गया, बल्कि ऐतिहासिक धरोहर भी खतरे भी आ गई। यूनेस्को के विश्व धरोहरों में शामिल ईरान के महलों, ऐतिहासिक मस्जिद और कई स्मारक अमेरिकी-इजरायली हमलों में क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। ईरान में किन-किन वैश्विक धरोहरों को कितना नुकसान हुआ, इनकी क्या खासियत है और यूनेस्को इनको बचाने के लिए क्या कर रहा है? आइए, जानते हैं।

धरोहर 1

तेहरान का गोलेस्तान पैलेस

यह राजधानी तेहरान का सबसे पुराना ऐतिहासिक स्मारक है। 2 मार्च को आराग स्क्वॉयर के पास विस्फोट की वजह से इमारत को नुकसान पहुंचा है। इसके शीशे का हॉल टूट गया, बगीचा बर्बाद हो गया, कांच की खिड़कियां टूट गईं और लकड़ियों को नुकसान पहुंचा। पूरी तरह बर्बाद न होने से इसकी मरम्मत संभव है। इसका निर्माण 1500 के दशक में हुआ था, जो 14वीं-19वीं शताब्दी का कजर राजवंश का प्रमुख महल है। यह ईरानी वास्तुकला का प्रतीक है।

धरोहर 2

इस्फहान का चेहल सोतौन पैलेस

इस्फहान शहर में गवर्नरेट बिल्डिंग में 9 मार्च को हमलों का सीधा असर इस पर पड़ा। इसकी खिड़कियां और दरवाजे टूट गए, लकड़ी में दरारें आईं और कुछ भित्तिचित्र प्रभावित हुए। हालांकि, मुख्य संरचना सुरक्षित है। यह अपनी बारीकी भित्तिचित्रों के लिए प्रसिद्ध है। यह 17वीं शताब्दी का सफाविद राजवंश का पैलेस है, जो 40 स्तंभों के लिए प्रसिद्ध है। यहां प्रवेश द्वार के ठीक सामने केंद्रीय आयताकार जलकुंड है, जिसमें यहां के 20 स्तंभ 40 दिखते हैं।

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धरोहर 3

इस्फहान की मस्जिद-ए-जामे या जामेह मस्जिद

इस्फहान में स्थित ईरान की सबसे पुरानी शुक्रवार (जुमा) मस्जिद को भी नुकसान पहुंचा है। इसकी टाइलवर्क और मेहराबों में दरारें आईं है। कुछ हिस्सों में मलबा गिरा है। यह स्मारक ईरानी इस्लामी वास्तुकला के विभिन्न कालों की स्थापत्य निर्माण और सजावटी शैलियों के अनुक्रम को दर्शाता है, जो 12 शताब्दियों को कवर करता है। यह इमारत प्रार्थना और ऐतिहासिक बाजार के एक हिस्से के रूप में, दोनों तरह से कार्य करती है।

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धरोहर 4

लोरिस्तान प्रांत का खोर्रामबाद घाटी का प्रागैतिहासिक स्थल

खोर्रामबाद घाटी में 5 गुफाएं और एक चट्टानी आश्रय स्थल हैं, जो 63,000 वर्ष पुराने मानव बस्ती के प्रमाण प्रस्तुत करती है। अमेरिका-इजरायल के हमलों से इसको नुकसान पहुंचा है। इसके कुछ हिस्सों में दरारें आईं, लेकिन मुख्य गुफाएं सुरक्षित हैं। क्षति न्यूनतम से मध्यम है, लेकिन पुरातात्विक महत्व के कारण चिंता है। इसे संयुक्त राष्ट्र की सांस्कृतिक एजेंसी यूनेस्को ने हाल ही में 2025 में सूचीबद्ध किया गया था।

धरोहर

कुछ अन्य धरोहरों को भी नुकसान

यूनेस्को ने ईरान में 4 प्रमुख धरोहरों को नुकसान पहुंचने की बात कही है, जबकि ईरान के सांस्कृतिक मंत्रालय ने इसकी संख्या 56 बताई है। ईरान के मुताबिक, इस्फहान के अली कापू महल को भी नुकसान पहुंचा है। यहां टूटी हुई खिड़कियां, दरवाजे और उखड़ी हुई टाइलें मिली हैं। इसके अलावा खोर्रमाबाद के फलक‑ओल‑अफलक गढ़ या शापुर खस्त महल को भी नुकसान पहुंचा है।

अपराध

सांस्कृतिक इमारतों पर हमले युद्ध अपराध की श्रेणी में

अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत सांस्कृतिक स्थलों को निशाना बनाकर किए गए सैन्य हमले युद्ध अपराध माने जाते हैं। अमेरिका, इजरायल और ईरान ने संघर्ष के दौरान सांस्कृतिक विरासत की रक्षा के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। ब्लू शील्ड इंटरनेशनल संगठन ने भी चिंता जताई है। ईरान ने सभी धरोहरों पर ब्लू शील्ड फहराई है, जो धरोहरों की सुरक्षा का प्रतीक चिन्ह है। यूनेस्को ने बयान जारी कर सभी पक्षों से सांस्कृतिक स्थलों की रक्षा की अपील की है।

ट्विटर पोस्ट

ईरान की ओर से जारी वीडियो

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