ईरान युद्ध की लागत कितनी रही और इसके प्रभाव कितने समय तक बने रहेंगे?
क्या है खबर?
अमेरिका और ईरान के बीच 100 दिन से ज्यादा तक चले युद्ध के बाद बुधवार रात को आखिरकार 14 सूत्रीय शांति समझौता हो गया। करीब 800 शब्दों वाले इस समझौता ज्ञापन (MOU) का उद्देश्य ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम को आगे बढ़ाना और होर्मुज जलडमरूमध्य से यातायात को सुचारू रूप से चलाना है। संघर्षों के लिहाज से देखा जाए, तो यह युद्ध अपेक्षाकृत कम समय तक चला, लेकिन इसके परिणाम और लागतें संभवतः कई सालों तक बनी रहेंगी।
मौत
ईरान युद्ध में हुई 7,200 से अधिक लोगों की मौत
कई महीनों तक चले इस युद्ध में दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना का मुकाबला एक अपेक्षाकृत कमजोर, लेकिन रणनीतिक रूप से कुशल शत्रु से हुआ था। इस युद्ध में 7,200 से अधिक सैनिक और लोगों की मौत हो गई। अमेरिकी सरकार के अनुसार, इस युद्ध में 13 अमेरिकी सैनिक और 3,300 से अधिक ईरानी सैनिक शहीद हो गए। इसी तरह लेबनान में 3,826, इजरायल में लगभग 60 और खाड़ी देशों में दर्जनों लोग इस युद्ध का शिकार हो गए।
आर्थिक
ईरान युद्ध का अमेरिका पर पड़ा यह प्रभाव
ईरान युद्ध के कारण अमेरिका में तेल की कीमतें बढ़ीं, मुद्रास्फीति और बंधक ब्याज दरें चरमरा गई। इस युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजारों को भी बड़े स्तर पर प्रभावित किया और महत्वपूर्ण जलमार्ग होर्मूज जलडमरूमध्य को ठप कर दिया। इससे एशिया और अफ्रीका के देशों में ईंधन की राशनिंग शुरू हो गई, सेमीकंडक्टर से लेकर उर्वरकों तक की आपूर्ति बाधित हो गई और मध्य पूर्व के प्रमुख देशों की अर्थव्यवस्थाएं भी बुरी तरह प्रभावित हुई।
लागत
क्या रही ईरान युद्ध की घरेलू लागत?
मूडीज एनालिटिक्स का अनुमान है कि इस युद्ध के कारण अब तक अमेरिकी उपभोक्ताओं और करदाताओं को लगभग 132 अरब डॉलर (लगभग 12,536 करोड़ रुपये) का नुकसान हो चुका है। इस लागत का सबसे स्पष्ट प्रभाव ऊर्जा की बढ़ती कीमतों में देखा जा सकता है। युद्ध शुरू होने के समय गैसोलीन की औसत कीमत लगभग 3 डॉलर प्रति गैलन थी, लेकिन कच्चे तेल की आपूर्ति बाधित होने से इसकी कीमत 4.56 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई।
ईंधन
डीजल की कीमतों में भी आया उछाल
अमेरिकन ऑटोमोबाइल एसोसिएशन (AAA) के अनुसार, युद्ध की पूर्व संध्या पर डीजल की कीमतें 3.76 डॉलर प्रति गैलन से बढ़कर अप्रैल में 5.69 डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंच गईं। इससे ट्रक या ट्रेन से सामान परिवहन समेत हवाई टिकटों की कीमतों में भी 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उर्वरकों की कीमतें 47 प्रतिशत तक बढ़ने से खाद्य पदार्थों की कीमतों में भी इजाफा देखने को मिला। इसी तरह ब्याज दरों में उछाल से घर खरीदना महंगा हो गया।
लागत
ईरान युद्ध की वैश्विक लागत क्या रही?
ईरान युद्ध ने वैश्विक स्तर पर उथल-पुथल मचा दी। इस महीने विश्व बैंक ने 2026 के लिए वैश्विक आर्थिक विकास के अपने पूर्वानुमान को घटाकर 2.5 प्रतिशत कर दिया है, जो कोरोना वायरस महामारी के बाद से सबसे कम है। विश्व बैंक का अनुमान है कि खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्थाओं का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) इस वर्ष केवल 1.3 प्रतिशत बढ़ेगी, जो 2025 में 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान था। यह खाड़ी देशों के लिए बड़ी चिंता का विषय है।
सैन्य
युद्ध की सैन्य लागत क्या रही है?
पेंटागन के नियंत्रक जूल्स हर्स्ट के अनुसार, ईरान युद्ध पर परिचालन लागत का नवीनतम अनुमान 29 अरब डॉलर (लगभग 2.74 लाख करोड़ रुपये) है। उन्होंने 12 मई को सीनेट सशस्त्र सेवा समिति की सुनवाई के दौरान यह आंकड़ा प्रस्तुत किया। यह अनुमान अप्रैल में प्रशासन द्वारा दिए गए आंकड़े से 4 अरब डॉलर (37,710 करोड़ रुपये) अधिक था। हर्स्ट ने समिति को बताया कि बढ़ी हुई राशि उपकरणों की मरम्मत और प्रतिस्थापन लागत के कारण है।
राजनीति
क्या रही राजनीतिक लागतें?
अमेरिका और इजरायल के नेतृत्व में ईरान पर हुए युद्ध की राजनीतिक कीमत स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। 28 फरवरी को हमला शुरू होने के समय न्यूयॉर्क टाइम्स के सर्वेक्षण के अनुसार राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की समग्र अनुमोदन रेटिंग -15 प्रतिशत अंक थी, यानी उनकी अस्वीकृति (56 प्रतिशत) उनकी अनुमोदन (41 प्रतिशत) रेटिंग से 15 अंक अधिक थी। युद्ध के बाद अनुमोदन रेटिंग -22 प्रतिशत अंक गिर गई थी। हालांकि, अब इसमें थोड़ा सुधार देखने को मिल रहा है।