अमेरिका ने ईरान को दी गंभीर आर्थिक हमले की चेतावनी, ईरान की तेल रोकने की धमकी
क्या है खबर?
अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव अब चरम स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका द्वारा ईरान और उसके व्यापारिक साझेदारों (विशेषकर चीन) पर लगाए जाने वाले नए आर्थिक प्रतिबंधों की घोषणा से पहले दोनों देशों के बीच जुबानी जंग आक्रामक हो गई है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बेसेंट ने सोमवार को होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस से ठीक पहले ईरान के लिए गंभीर आर्थिक हमले (इकनॉमिक डी-डे) का ऐलान किया है। आइए पूरी चेतावनी जानते हैं।
चेतावनी
बेसेंट ने क्या दी चेतावनी?
वित्त मंत्री बेसेंट ने इकोनॉमिक टाइम्स के एक लेख और X पर अमेरिकी रणनीति को लेकर खुलासे किए हैं।
उन्होंने लिखा, 'सुबह होते ही गंभीर आर्थिक हमले शुरू हो जाएंगे। यह किसी दुश्मन के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय हमला होगा।'
उन्होंने दावा किया कि डोनाल्ड ट्रंप सरकार के नेतृत्व में अमेरिका पहले ही ईरान की सैन्य क्षमताओं को पंगु बना चुका है, उसके 100 प्रतिशत सैन्य कारखाने तबाह हो गए और परमाणु कार्यक्रम भी दफन हो गया।
जानकारी
सैन्य कार्रवाई की भी दी चेतावनी
बेसेंट ने लिखा, 'अगर ईरान ने आर्थिक प्रतिबंधों का जवाब सेना के जरिए दिया, तो राष्ट्रपति ट्रंप इसका बेहद त्वरित और निर्णायक जवाब देंगे।' उन्होंने ईरान की मदद करने वाले देशों को भी गंभीर आर्थिक परिणाम भुगतने की चेतावनी दी है।
धमकी
ईरान ने दी तेल निर्यात रोकने की धमकी
बेसेंट की घोषणा के जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी से सभी तेल निर्यात रोकने की धमकी दी है।
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव मोहसेन रेजाई ने कहा कि इस आर्थिक युद्ध का समर्थन करने या इसमें भाग लेने वाले किसी भी देश को 'युद्ध का कृत्य' करने वाला माना जाएगा।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अमेरिकी प्रतिबंध स्वतंत्र देशों पर जबरन संप्रभुता थोपने की कोशिश है।
अपील
मध्यस्थता और कूटनीति की अपील
ईरान के तेल का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा खरीदने वाले चीन ने दोनों देशों से कूटनीति का रास्ता अपनाने की अपील की है।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने भी कूटनीतिक समाधान की बात करते हुए कहा कि युद्ध को आज ही खत्म करना बेहतर होगा जब ईरान गरिमा के साथ मजबूत स्थिति में है।
हालांकि, ईरान के संसद अध्यक्ष मोहम्मद बकर कलीबाफ ने स्वीकार किया है कि इस तनाव से ईरानी अर्थव्यवस्था दबाव में है।