पाकिस्तान की युद्धविराम 45 दिन बढ़ाने की मांग, अमेरिका ने बातचीत के लिए 2 शर्तें रखीं
क्या है खबर?
अमेरिका और ईरान के बीच अगले दौर की वार्ता की योजना बन रही है। हालांकि, इससे पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सामने 2 शर्तें रखी हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका चाहता है कि ईरान के साथ अगली वार्ता होने से पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को पूरी तरह खोल दिया जाए। इसके अलावा, उसने किसी भी समझौते को अंतिम रूप देने के लिए ईरान के प्रतिनिधिमंडल को इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) से पूर्ण अधिकार लेने को कहा है।
बातचीत
ट्रंप बोले- इस हफ्ते हो सकती है बातचीत
राष्ट्रपति ट्रंप ने न्यूयॉर्क पोस्ट से बताया कि अमेरिका और ईरान के बीच 2 दिन के अंदर पाकिस्तान में एक और वार्ता हो सकती है। उन्होंने कहा कि अमेरिका से कुछ सही और अज्ञात ईरानी प्रतिनिधियों ने संपर्क किया था जो एक समझौते पर पहुंचने के इच्छुक थे। बता दें कि यह बातचीत अमेरिकी सेना द्वारा ईरानी बंदरगाहों पर नाकाबंदी करने के बाद भी शुरू हो रही है। वार्ता फिर से इस्लामाबाद में हो सकती है।
युद्धविराम
पाकिस्तान ने युद्धविराम को 45 दिन बढ़ाने की मांग की
अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की वार्ता से पहले पाकिस्तान ने युद्धविराम को 45 दिन के लिए आगे बढ़ाने की मांग की है। पाकिस्तानी डॉन अखबार ने एक पाकिस्तानी राजनयिक सूत्र के हवाले से कहा कि इस्लामाबाद कई पक्षों के संपर्क में है, ताकि युद्धविराम को बढ़ाने और वाशिंगटन-तेहरान के बीच तकनीकी स्तर का संपर्क फिर शुरू होने पर सहमति बने। मध्यस्थ दोनों पक्षों के बीच बातचीत को सुविधाजनक बनाने के लिए 45 दिनों का युद्धविराम चाहते हैं।
समझौता
इजरायल और लेबनान के बीच भी बातचीत का प्रयास
अमेरिका-ईरान के अलावा इजरायल और लेबनान भी सीधी बातचीत शुरू करने को राजी हैं। यह सहमति वाशिंगटन में दोनों पक्षों की मुलाकात के बाद बनी है। इस बातचीत का लेबनानी आतंकवादी समूह हिज़्बुल्लाह ने कड़ा विरोध किया। उसने वाशिंगटन में बैठक शुरू होते ही उत्तरी इजरायल के 12 कस्बों पर रॉकेट दागे हैं। बता दें कि वाशिंगटन इजरायल-हिज़्बुल्लाह संघर्ष को समाप्त करने के लिए दबाव बना रहा है, क्योंकि उसे डर है कि इससे नाजुक युद्धविराम भंग हो सकता है।
बैठक
अमेरिका और ईरान के बीच पहली बैठक में नहीं बनी बात
इस्लामाबाद में 10 से 12 अप्रैल के बीच हुई अमेरिका-ईरान की शांति वार्ता एक शर्ते के कारण विफल हो गई। दरअसल, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान को 20 साल तक यूरेनियम संवर्धन न करने की शर्त दी थी। ईरान ने इसे मानने से इंकार कर दिया। हालांकि, वह 5 साल तक इसे रोकने पर राजी है। ईरान को उम्मीद थी कि इसे मान लिया जाएगा, लेकिन वेंस ने समझौता विफल होने की घोषणा की, जिससे ईरान काफी नाराज हो गया।