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अमेरिकी सांसद ने भारत के FCRA विधेयक को 'ईसाइयों पर हमला' बताया, कहा- संबंध प्रभावित होंगे
अमेरिकी सांसद ने भारत के FCRA विधेयक को 'ईसाइयों पर हमला' बताया

अमेरिकी सांसद ने भारत के FCRA विधेयक को 'ईसाइयों पर हमला' बताया, कहा- संबंध प्रभावित होंगे

लेखन गजेंद्र
Aug 05, 2026
10:18 am

क्या है खबर?

अमेरिका के सांसद रिले मूर ने भारत के विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम (FCRA) में प्रस्तावित संशोधन की आलोचना करते हुए, इसे स्पष्ट तौर पर ईसाइयों पर हमला बताया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर यह कानून सामने आता है तो इससे भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंध प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने एक्स पर कहा कि कानून से सरकार को चर्चों और धार्मिक संस्थाओं पर कब्जा करने की अनुमति मिल सकती है।

आलोचना

चर्च और धार्मिक चैरिटी संस्थाओं पर नियंत्रण करना चाहती है भारत सरकार- मूर

वेस्ट वर्जीनिया के रिपब्लिकन सांसद मूर ने FCRA संशोधन विधेयक, 2026 के प्रावधानों पर चिंता जताई, जिस पर संसद में बहस चल रही है।

उन्होंने लिखा, 'भारत में ईसाई तब से हैं जब हमारे प्रभु यीशु मसीह के पुनरुत्थान के कुछ दशकों बाद सेंट-थॉमस द एपोसल मालाबार तट आए थे।'

मूर ने लिखा कि ईसाइयों के लंबे इतिहास के बावजूद, भारतीय संसद FCRA में बदलाव का विचार कर रही है, ताकि सरकार चर्चों और धार्मिक-चैरिटी संस्थाओं पर नियंत्रण कर सके।

चिंता

ईसाइयों पर सीधा हमला- मूर

मूर ने आगे लिखा, 'यह ईसाइयों पर सीधा हमला है। अगर यह बिल इसी तरह आगे बढ़ता है, तो यह भारत के साथ हमारे द्विपक्षीय संबंधों में बड़ी चिंता का विषय बन जाएगा।'

मूर के इस पोस्ट का कैथोलिक एरिना ने समर्थन किया है और लिखा, 'मुद्दा उठाने के लिए धन्यवाद। भारत में ईसाई दुनिया में सबसे ज़्यादा सताए जाने वाले समुदायों में है। यूरोपीय संघ और अन्य लोगों को ट्रेड डील के बजाय इस मुद्दे पर आवाज़ उठानी चाहिए।'

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विधेयक

क्या है FCRA विधेयक?

FCRA यानी विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम सबसे पहले इमरजेंसी के दौरान 1976 में लाया गया था।

इसका उद्देश्य भारत में आने वाला विदेशी पैसा किन व्यक्तियों, संस्थाओं, NGO या संगठनों को मिल सकता है और कैसे इस्तेमाल करना है, यह तय करना था।

बाद में इसे पूरी तरह बदलकर FCRA 2010 बनाया गया, जिसमें पंजीकरण, विदेशी चंदे के इस्तेमाल, निगरानी से जुड़े नियमों को व्यवस्थित किया गया।

फिर 2020 में नियंत्रण कड़े किए गए और अब FCRA 2026 प्रस्तावित है।

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विवाद

प्रस्तावित विधेयक पर क्यों है विवाद?

केंद्र सरकार जो संशोधन विधेयक ला रही उसमें केंद्र सरकार द्वारा नियुक्त एक नामित प्राधिकरण की तैनाती करना शामिल है।

प्राधिकरण किसी संगठन का FCRA पंजीकरण रद्द होने, आत्मसमर्पण करने या नवीनीकृत न होने की स्थिति में विदेशी अंशदान और संपत्तियों के प्रबंधन को अपने हाथ में ले सकेगा।

साथ ही, विधेयक के मुताबिक, जिन संगठनों ने पिछले 2 वित्तीय-वर्षों में 10 लाख रुपये से कम विदेशी योगदान प्राप्त किया या उपयोग किया है, वे नवीनीकरण के पात्र नहीं होंगे।

जानकारी

2019 से 2022 के बीच पंजीकृत संगठनों को मिला 55,741 करोड़ रुपये विदेशी योगदान

15 जुलाई, 2026 तक भारत में FCRA के तहत 14,449 पंजीकरण थे। इसके अलावा 22,498 पंजीकरण रद्द हुए थे, जबकि 15,212 पंजीकरणों की वैधता समाप्त हो गई थी। 2019 से 2022 के बीच, पंजीकृत संगठनों को 55,741 करोड़ रुपये का विदेशी योगदान प्राप्त हुआ।

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