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ट्रंप ने रूस प्रतिबंध विधेयक पर किए हस्ताक्षर, भारत पर बढ़ा 100 प्रतिशत टैरिफ का खतरा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रूस प्रतिबंध विधेयक पर हस्ताक्षर कर दिए हैं

ट्रंप ने रूस प्रतिबंध विधेयक पर किए हस्ताक्षर, भारत पर बढ़ा 100 प्रतिशत टैरिफ का खतरा

Sep 19, 2026
10:18 am

क्या है खबर?

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने यूक्रेन युद्ध को लेकर रूस के खिलाफ एक बेहद सख्त प्रतिबंध विधेयक को कानून के रूप में मंजूरी दे दी है। यह विधेयक रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का रास्ता साफ करता है, जिससे भारत और चीन सीधे अमेरिकी निशाने पर आ गए। ट्रंप ने यह कदम हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव द्वारा इस विधेयक को 262-159 के बहुमत से पारित करने के 2 दिन बाद उठाया है।

उद्देश्य

क्या है इस विधेयक का उद्देश्य?

इस विधेयक को 'लिंडसे ओ ग्राहम सेंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026' रखा गया है।

इसका मुख्य उद्देश्य यूक्रेन में रूस के युद्ध को बढ़ावा देने वाले वित्तीय संसाधनों को रोकना है।

यह रूसी अधिकारियों, बैंकों, ऊर्जा कंपनियों और मॉस्को के सैन्य अभियानों का समर्थन करने वाली विदेशी संस्थाओं को निशाना बनाता है।

यह कानून ट्रंप को रूसी सामानों पर 500 प्रतिशत और रूस के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने का अधिकार देता है।

जानकारी

इन देशों पर लगाया जा सकता है 100 प्रतिशत टैरिफ

डेमोक्रेटिक कांग्रेसी स्टेनी होयर द्वारा लाए गए एक संशोधन में विधेयक के द्वितीयक प्रावधानों के तहत संभावित टैरिफ के लिए विशेष रूप से 10 देशों का उल्लेख हैं। इनमें चीन, भारत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE), तुर्की, सिंगापुर, अजरबैजान, कजाकिस्तान, हंगरी, किर्गिस्तान और स्लोवाकिया शामिल हैं।

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प्रभाव

भारत पर इसका क्या और कितना असर होगा?

हालांकि, संशोधन में भारत का नाम है, लेकिन यह भारत पर तुरंत 100 प्रतिशत टैरिफ लागू नहीं करता।

यह राष्ट्रपति ट्रंप को विवेकाधीन शक्ति देता है कि यदि वह चाहें तो भारत पर यह टैरिफ लगा सकते हैं।

अगर, ट्रंप इस 100 प्रतिशत टैरिफ को लागू करते हैं, तो यह उस 10 प्रतिशत टैरिफ के ऊपर अतिरिक्त रूप से लगेगा, जो अमेरिका वर्तमान में जबरन श्रम के नियमों के उल्लंघन के जुर्माने के रूप में भारतीय सामानों पर लगाता है।

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पलटवार

भारतीय विदेश मंत्रालय ने किया पलटवार

विधेयक के अमेरिकी कांग्रेस में पारित होने के बाद भारत सरकार ने बेहद मजबूत और स्पष्ट बयान जारी किया है।

भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा, "भारत अपने 140 करोड़ लोगों के लिए ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। हम बाजार की बदलती परिस्थितियों और विभिन्न स्रोतों के विविधीकरण के आधार पर ऐसा करना जारी रखेंगे। भारत अपने व्यापारिक और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक कदम उठाने के लिए पूरी तरह दृढ़ है।"

विरोध

रिपब्लिकन खेमे के अंदर भी विरोध

विदेश मंत्रालय स्पष्ट किया कि रूस के साथ भारत के तेल व्यापार के मुद्दे पर अमेरिकी वार्ताकारों के साथ चर्चा हुई है और भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि इसका असर न केवल द्विपक्षीय संबंधों बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ सकता है।

इस विधेयक को अधिकांश रिपब्लिकन सांसदों का समर्थन तो मिला है, लेकिन बंद कमरों में कई रिपब्लिकन नेताओं ने पार्टी आलाकमान से ट्रंप की इस नई असीमित टैरिफ शक्तियों को हटाने का अनुरोध किया था।

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