डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा फैसला, 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' का नाम बदलकर 'सुपर इंटेलिजेंस' किया
क्या है खबर?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का नाम बदलकर 'सुपर इंटेलिजेंस' करने का आदेश दिया है। यह फैसला मंगलवार को व्हाइट हाउस में कई बड़ी टेक कंपनियों के अधिकारियों के साथ हुई बैठक के बाद सामने आया। नए आदेश के मुताबिक अमेरिकी सरकार के सभी विभागों और एजेंसियों को आधिकारिक बातचीत, सार्वजनिक बयान, नीतियों और दस्तावेजों में AI या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की जगह सुपर इंटेलिजेंस शब्द इस्तेमाल करना होगा।
बैठक
व्हाइट हाउस में टेक अधिकारियों की बैठक
ट्रंप ने मंगलवार को टेक कंपनियों के प्रमुखों के साथ व्हाइट हाउस में लंच किया।
इसके बाद उन्होंने कहा कि AI का नाम आधिकारिक तौर पर बदल दिया गया है। हालांकि, टेक अधिकारियों ने जिस दो पेज के समझौते पर हस्ताक्षर किए, उसमें AI का नाम बदलने की घोषणा नहीं थी।
इसमें कंपनियों ने अपनी तकनीक को सुरक्षित तरीके से विकसित करने, मजबूत सुरक्षा व्यवस्था बनाने और भरोसा बढ़ाने के लिए आंतरिक नियंत्रण लागू करने की बात कही है।
समझौता
छह बड़े अधिकारियों ने किया समझौता
ट्रंप की सोशल मीडिया पोस्ट के मुताबिक समझौते पर गूगल के सुंदर पिचई, टेस्ला और स्पेस-X के एलन मस्क, एंथ्रोपिक के डारियो अमोदेई, मेटा के मार्क जुकरबर्ग, ओपनAI के ग्रेग ब्रॉकमैन और एनवीडिया के जेन्सेन हुआंग ने हस्ताक्षर किए।
समझौते में सुरक्षा मानकों पर नियमित बैठकें करने की बात कही गई है। इसमें यह भी कहा गया है कि भविष्य में इन सुरक्षा उपायों को कानून या नियमों का हिस्सा बनाया जा सकता है।
चिंता
AI को लेकर अमेरिका में चिंता
यह फैसला ऐसे समय आया है जब कई सर्वे में अमेरिकी लोगों के बीच AI को लेकर चिंता सामने आई है।
क्विनिपियाक यूनिवर्सिटी के 24-27 सितंबर तक हुए सर्वे में 25 प्रतिशत लोगों ने ट्रंप के AI संभालने के तरीके को मंजूरी दी, जबकि 58 प्रतिशत ने असहमति जताई।
ट्रंप ने पहले भी AI के लिए नया नाम सुझाने को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की राय मांगी थी। उन्होंने चीन से आगे रहने को भी अहम लक्ष्य बताया है।
सवाल
नाम बदलने पर उठे सवाल
ट्रंप के इस फैसले पर सीनेट इंटेलिजेंस कमेटी के उपाध्यक्ष मार्क वार्नर ने सवाल उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि AI का नाम बदलने से इससे जुड़े असली खतरे कम नहीं होंगे। उनका कहना है कि AI कंपनियां सुरक्षा को लेकर चेतावनी दे रही हैं, जबकि सरकार कंपनियों से खुद नियम बनाने को कह रही है।
वहीं हाउस स्पीकर माइक जॉनसन ने कहा कि AI में सुरक्षा और नई तकनीक का विकास साथ-साथ होना चाहिए।