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ट्रंप का दावा, चीन ने 2020 के चुनाव में 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं का डेटा चुराया
ट्रंप ने चीन पर 2020 के चुनाव में 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं का डेटा चुराने का आरोप लगाया

ट्रंप का दावा, चीन ने 2020 के चुनाव में 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं का डेटा चुराया

लेखन गजेंद्र
Jul 17, 2026
09:28 am

क्या है खबर?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को चीन पर अमेरिका के चुनावी डेटा में सेंध लगाने का आरोप लगाया है। व्हाइट हाउस से प्रसारित 25 मिनट के टेलीविजन भाषण में ट्रंप ने दावा किया कि बीजिंग ने 2020 के चुनाव के दौरान 22 करोड़ अमेरिकी मतदाताओं की व्यक्तिगत जानकारी अवैध रूप से हासिल की थी। उन्होंने कहा कि उनका प्रशासन अमेरिकी चुनावी प्रणाली में चौंकाने वाली कमजोरियों वाले खुफिया दस्तावेजों को सार्वजनिक कर रहा है।

भाषण

ट्रंप ने चीन को लेकर क्या कहा?

ट्रंप ने कहा, "आज रात मैं महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी को तत्काल सार्वजनिक करने और जारी करने की घोषणा कर रहा हूं, जिससे हमारे चुनाव ढांचे में चौंकाने वाली कमजोरियां उजागर होती हैं। 2020 के चुनाव चक्र से शुरू होकर,कई वर्षों की अवधि में, पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना ने चुनाव डेटा के इतिहास में सबसे बड़े उल्लंघन को अंजाम दिया, जिसके परिणामस्वरूप चीन ने अवैध रूप से 22 करोड़ अमेरिकी मतदाता फाइलों का अधिग्रहण किया।"

आरोप

लीक हुए डेटा में मतदाताओं की पूरी जानकारी थी

ट्रंप ने आरोप लगाया कि कथित तौर पर लीक हुए डेटा में नाम, घर के पते, फोन नंबर, राजनीतिक दल से संबद्धता और मतदाता पंजीकरण से जुड़ी अन्य जानकारी शामिल थी, जिनकी आवश्यकता मतदान के लिए पंजीकरण करने और अन्य नापाक गतिविधियों में शामिल होने के लिए होगी।

उन्होंने दावा किया, "डेटा का यह नुकसान चुनाव सुरक्षा के लिए एक अभूतपूर्व दुःस्वप्न है। चीन ने इस नई परियोजना के लिए विशेष रूप से एक डेटा विश्लेषण इकाई नियुक्त की थी।"

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आऱोप

रूस-चीन के पास अमेरिकी चुनाव को प्रभावित करने की क्षमता

ट्रंप ने दावा किया कि यह सबूत बताया है कि अमेरिका की मौजूदा चुनाव प्रणाली हैकिंग, दुरुपयोग और विदेशी हस्तक्षेप के लिए खतरनाक रूप से असुरक्षित है और यह महत्वपूर्ण जानकारी कई वर्षों तक छुपाई गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिकी खुफिया समुदाय के सदस्यों ने चीन की गतिविधियों को जानबूझकर दबा दिया।

उन्होंने आधिकारिक खुफिया आकलन से बताया कि रूस, चीन, ईरान, उत्तर कोरिया, गैर-सरकारी समूहों सहित अमेरिकी विरोधियों के पास अमेरिकी चुनावों को प्रभावित करने की क्षमता है।

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जांच

नए नहीं हैं ये आरोप

चीन पर अमेरिकी मतदाताओं के डेटा को एकत्रित करने का आरोप नया नहीं है।

इससे पहले, साइबर सुरक्षा के लिए राष्ट्रीय खुफिया अधिकारी ने 2020 में तैयार और 2022 में आंशिक सार्वजनिक एक रिपोर्ट में कहा कि चीनी खुफिया अधिकारियों ने जनमत विश्लेषण के लिए कई अमेरिकी राज्यों से मतदाता पंजीकरण डेटा का विश्लेषण किया है।

ट्रंप और उनके सहयोगियों ने मामले पर 60 से अधिक मुकदमे दायर किए, लेकिन चुनाव परिणाम बदलने का कोई धोखाधड़ी साबित नहीं हुआ।

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