अजरबैजान में कांस्य युग की कलाकृतियों पर मिले स्वास्तिक निशान, क्या बताता है ये?
क्या है खबर?
अजरबैजान में कांस्य युग की कलाकृतियों पर स्वास्तिक निशान पाया गया है, जिसने भारत समेत दुनिया भर की दिलचस्पी बढ़ा दी है। यह निशान शामकिर जिले में स्थित गाराजामिरली में कांस्य युग की चीजों पर दिखे हैं, जो प्रागैतिहासिक काल में पूरे यूरेशिया में इस प्राचीन प्रतीक के व्यापक इस्तेमाल को दिखाते हैं। अजरबैजान में भारतीय दूतावास ने एक्स पर वीडियो साझा कर ऐसी चीजों को दिखाया है, जिस पर ये निशान दिखाई दे रहे हैं।
निशान
प्रतीकात्मक परंपराओं को उजागर करने वाली खोज
दूतावास ने बताया कि ये खोजें उन समृद्ध सांस्कृतिक लेन-देन और साझा प्रतीकात्मक परंपराओं को उजागर करती हैं जिन्होंने विशाल क्षेत्रों में प्राचीन समाजों को आपस में जोड़ा था।
दूतावास ने एक्स पर लिखा कि ये हमें भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण काकेशस के लोगों के बीच मौजूद गहरे ऐतिहासिक संबंधों और आदान-प्रदान को जानने-समझने के लिए प्रेरित करती हैं।
यह चिन्ह मिट्टी के बर्तन, आभूषण और कुछ मुहर पर बने दिखे हैं।
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भारत के लिए क्या महत्व रखता है स्वास्तिक?
स्वास्तिक दुनिया के सबसे पुराने पवित्र प्रतीकों में से एक है। हिंदू धर्म में, यह शुभता, भलाई, समृद्धि और जीवन के शाश्वत चक्र का प्रतीक है और हज़ारों सालों से धार्मिक अनुष्ठानों, मंदिरों और त्योहारों में इसका इस्तेमाल होता रहा है।
इसे 'सौभाग्य चिन्ह' माना जाता है और ऋग्वेद में इसका उल्लेख है।
हालांकि, 20वीं सदी में हिटलर ने इसे राजनीतिक प्रतीक बनाकर दुरुपयोग किया, जिससे पश्चिम में इसका नकारात्मक अर्थ जुड़ गया, लेकिन भारत में इसका महत्व है।
मायने
अजरबैजान में स्वास्तिक मिलना क्या बताता है?
अजरबैजान में स्वास्तिक का मिलना प्राचीन सांस्कृतिक आदान-प्रदान, इंडो-ईरानी या इंडो-यूरोपियन प्रवास की ओर इशारा करता है।
यह दिखाता है कि स्वास्तिक केवल भारतीय नहीं, बल्कि यूरो-एशियाई प्राचीन संस्कृतियों का साझा प्रतीक था। यह प्राचीन काल में भारत और काकेशस क्षेत्र के बीच सांस्कृतिक या व्यापारिक संपर्क को भी बताता है।
स्वास्तिक निशान पहले मध्य एशिया, ईरान, ग्रीस, यूक्रेन और यूरोप के कई प्राचीन स्थलों पर भी मिल चुका है।
ट्विटर पोस्ट
अजरबैजान में मिला स्वास्तिक
The Swastika is one of the oldest known sacred symbols in the world. In Hinduism, it represents auspiciousness, well-being, prosperity, and the eternal cycle of life, and has been used for thousands of years in religious rituals, temples, and festivals.
— India in Azerbaijan (@indembassybaku) July 15, 2026
Interestingly, swastika… pic.twitter.com/CAtM7Jz34A