भारत समेत दुनियाभर में भीषण अल नीनो से 6 महीनों में 4.50 लाख मौत का अनुमान
क्या है खबर?
जलवायु संकट और तापमान में तेजी से बढ़ोतरी के कारण भारत समेत दुनिया के कई देशों में अतिरिक्त गर्मी पड़ेगी, जिससे 4.50 लाख से अधिक मौतों की संभावना है। यह चिंता शिकागो विश्वविद्यालय स्थित क्लाइमेट इम्पैक्ट लैब ने जताई है, जिसने अपनी गंभीर चेतावनी में कहा कि जून से फरवरी के अंत तक गर्मी से होने वाली मौतों में 4,51,000 तक वृद्धि हो सकती है। यह मौतें सामान्य वर्ष में गर्मी से होने वाली मौतों की तुलना में अधिक है।
गर्मी
वैज्ञानिक का क्या कहना है?
समूह के सह-संस्थापक और अध्ययन के सह-लेखक माइकल ग्रीनस्टोन ने कहा कि फरवरी के बाद भी गर्मी का खतरा बना रहने की संभावना है, भले ही तब तक अल नीनो के समाप्त होने की उम्मीद है।
उन्होंने आगे कहा कि इस मौसम संबंधी घटना का असर अगली गर्मियों तक महसूस किया जा सकता है और इसका सबसे ज्यादा नुकसान गरीब देशों में होने की आशंका है।
मृत्यु का यह अनुमान सितंबर से फरवरी 2027 की अवधि के लिए है।
खतरा
इन 10 देशों पर बड़ा खतरा
अगले 6 महीनों में सबसे अधिक प्रभावित होने वाले देश नाइजीरिया, इंडोनेशिया, सूडान, भारत और ब्राजील हैं।
अमेरिका भी सबसे अधिक प्रभावित 20 देशों में शामिल है, जहां भीषण गर्मी से 3,500 अतिरिक्त मौतों का अनुमान है।
सबसे अधिक मौत 31,320 नाइजीरिया में, इंडोनेशिया में 19,251, सुडान में 17,430, भारत में 15,670, ब्राजील में 13,271, कांगो में 10,014, नाइजर में 9,900, चाड में 7,953, फिलीपींस में 6,504 और वियतनाम में 5,566 मौत का अनुमान है।
तापमान
इस दौरान कितना बढ़ेगा तापमान?
ग्रीनस्टोन का अनुमान है कि इस दौरान वैश्विक भूमि का तापमान लगभग 1.2 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है, और अत्यधिक गर्म दिनों की संख्या औसत वर्ष की तुलना में 44 प्रतिशत अधिक हो सकती है।
उन्होंने कहा, "अगर आप पहले से ही किसी गर्म जगह पर हैं, तो कुछ डिग्री का अतिरिक्त तापमान कहीं अधिक खतरनाक साबित होगा।"
उन्होंने कहा कि अधिक समृद्ध स्थानों में एयर कंडीशनिंग, पानी की नियमित आपूर्ति और स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच होती है।
अल नीनो
क्या है अल नीनो?
अल नीनो मौसमी घटना है, जिसमें मध्य और पूर्वी भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्री सतह का पानी सामान्य से अधिक 0.5 डिग्री सेल्सियस तक गर्म होता है।
इसके चलते पूर्व से पश्चिम की ओर बहने वाली हवाएं कमजोर पड़ती हैं और अमेरिका के पश्चिमी तट जाने लगती है।
जब समुद्री सतह का तापमान 1.5 डिग्री तक बढ़ता है तो स्ट्रॉन्ग और 2 डिग्री सेल्सियस तक होने पर सुपर अल नीनो कहते हैं।
वर्ष 1997-98 और 2015-16 सुपर अल नीनो था।