दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति को आजीवन कारावास की सजा, क्या है कारण?
क्या है खबर?
दक्षिण कोरिया के पूर्व राष्ट्रपति यून सुक योल को वर्ष 2024 में मार्शल लॉ घोषित करने के लिए गुरुवार को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। सियोल केंद्रीय जिला कोर्ट ने फैसला सुनाते कहा कि यून 3 दिसंबर, 2024 को हुए विद्रोह के जिम्मेदार हैं। उनको मार्शल लॉ लागू करने के असफल प्रयास के लिए विद्रोह और सत्ता के दुरुपयोग का दोषी पाया गया है। कोर्ट ने पूर्व रक्षा मंत्री किम योंग ह्यून को 30 साल की सजा सुनाई।
फैसला
अभियोजकों ने की थी मृत्युदंड की मांग, अपील करेंगे येओल
न्यायाधीश जी ग्वी-येओन ने अपने फैसले में कहा कि यून ने मार्शल लॉ लागू करके सेना द्वारा राष्ट्रीय विधानसभा और राष्ट्रीय चुनाव आयोग पर छापेमारी की, जो एक प्रकार का दंगा था, इससे देश की शांति और स्थिरता को नुकसान पहुंचाया। अभियोजकों ने कोर्ट में यून के लिए मौत की सजा की मांग की थी और तर्क दिया था कि उन्होंने विधायिका को पंगु बनाने और राजनीतिक विरोधियों को गिरफ्तार करने की कोशिश की थी।
मुकदमा
अपील करेंगे यून
अल जजीरा के मुताबिक, 65 वर्षीय यून ने कोर्ट में अपनी बेगुनाही का दावा किया है। वह फैसले के खिलाफ अपील करेंगे। अभी यून मार्शल लॉ आदेश से संबंधित एक अन्य मामले में दोषी पाए जाने के कारण जेल में है। उसे इससे संबंधित 2 और मुकदमों का सामना करना है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने फैसले को एक महत्वपूर्ण कदम बताया और कहा, "दक्षिण कोरिया में कोई भी कानून से ऊपर नहीं है, जिसमें एक पूर्व राष्ट्रपति भी शामिल हैं।"
घटना
क्या है मार्शल लॉ लगाने का मामला?
वर्ष 2024 में 3 दिसंबर को यून ने विपक्षी पार्टियों पर देश में व्यवधान पैदा करने का आरोप लगाते हुए रात में आनन-फानन में आपातकालीन मार्शल लॉ लगा दिया था। मार्शल लॉ को रात में 6 घंटे बाद संसद में रद्द कर दिया गया और यून के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया, जिसमें 14 दिसंबर को उनके खिलाफ वोट पड़े। उनको राजनीतिक संकट पैदा करने का दोषी पाते हुए हटाया गया। वे 15 जनवरी, 2025 से जेल में हैं।
राष्ट्रपति
दक्षिण कोरिया में राष्ट्रपतियों का काला इतिहास
दक्षिण कोरिया में यून पहले राष्ट्रपति नहीं हैं, जो जेल गए हों। इससे पहले 4 अन्य पूर्व राष्ट्रपतियों पर बड़ी कार्रवाई हो चुकी है। वर्ष 1980-1988 के बीच तख्तापलट और राजद्रोह के लिए चून डू-ह्वान को मौत की सजा मिली थी, जो उम्रकैद में बदली गई। वर्ष 1988-1993 के बीच रोह ता-वू को चून के साथ मिलने पर जेल की सजा मिली। 2013-2017 के बीच पार्क ग्यून-हे को भ्रष्टाचार के मामले में जेल हुई थी। पार्क पहली महिला राष्ट्रपति थीं।