शहबाज शरीफ ने PoK विरोध प्रदर्शनों को खत्म करने के लिए रखा बातचीत का प्रस्ताव
क्या है खबर?
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में लोगों की शिकायतों के समाधान के लिए बातचीत का प्रस्ताव रखा है। इस क्षेत्र में महंगाई, बिजली की ऊंची दर और विवादित क्षेत्रीय चुनाव प्रक्रिया को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। शरीफ ने जोर दिया कि मुद्दों को टकराव के बजाय बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए। उन्होंने प्रतिबंधित संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) से बातचीत की संभावना का भी संकेत दिया।
तैयारी
JAAC से बातचीत के लिए तैयार है PML-N
शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (PML-N) पार्टी के मौजूदा चुनावों के बाद PoK में सरकार बनाने की संभावना है।
पार्टी ने JAAC के साथ बातचीत करने की इच्छा जताई है, जिस पर जून से प्रतिबंध लगा हुआ है।
शरीफ ने कहा, "अगर कोई मुद्दे हैं, तो उन्हें बातचीत के जरिए सुलझाया जाना चाहिए।"
उन्होंने उम्मीद जताई कि नई सरकार के तहत बातचीत जारी रहेगी। बता दें कि JAAC पिछले 2 महीने से लगातार प्रदर्शन कर रही है।
अंतर
शरीफ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और अशांति फैलाने वालों के बीच किया अंतर
शरीफ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और उन लोगों के बीच एक स्पष्ट रेखा खींच दी है जिन पर अशांति फैलाने का आरोप है।
उन्होंने कहा कि सरकार शांतिपूर्वक अपनी चिंताओं को उठाने के इच्छुक लोगों के प्रति अलग दृष्टिकोण अपनाएगी।
उन्होंने आगे कहा, "जो लोग शांति, धैर्य और सहिष्णुता के साथ मुद्दों पर चर्चा करना चाहते हैं, नई सरकार उन्हें यह अवसर प्रदान करेगी। अहिंसा फैलाकर महौल खराब करने वालों पर कार्रवाई होगी।"
अशांति
3 चरणों के चुनावों के दौरान PoK में अशांति
धांधली और हिंसा के आरोपों से घिरे 3 चरणों के चुनावों के दौरान PoK में अशांति और बढ़ गई है।
पहले 2 चरण 27 जुलाई और 3 अगस्त को आयोजित किए गए थे, जिसमें PML-N ने बहुमत हासिल किया था। तीसरे चरण का मतदान सोमवार को 4 सीटों पर होना था।
हालांकि, जारी अशांति के कारण 7 अन्य निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया है। अभी क्षेत्र में तनाव बरकरार है।
चिंता
नागरिकों की मौत के दावों पर संयुक्त राष्ट्र की चिंता
JAAC का दावा है कि जून की शुरुआत से अब तक लगभग 400 प्रदर्शनकारी मारे गए हैं। हालांकि, पाकिस्तान सरकार इस आंकड़े का खंडन करती है।
अधिकारियों ने नागरिकों की मौत से इनकार किया है और JAAC के आंकड़ों को अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया बताया है।
एमनेस्टी इंटरनेशनल और पाकिस्तान मानवाधिकार आयोग ने विरोध प्रदर्शनों में हुई हिंसा की जांच की मांग की है। संयुक्त राष्ट्र ने जवाबदेही की मांग की है।