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बांग्लादेश में फैला खसरे का भीषण प्रकोप, अब तक हुई 1,000 लोगों की मौत
बांग्लादेश में फैला खसरे का भीषण प्रकोप

बांग्लादेश में फैला खसरे का भीषण प्रकोप, अब तक हुई 1,000 लोगों की मौत

Sep 09, 2026
04:02 pm

क्या है खबर?

बांग्लादेश इस समय इतिहास के सबसे भीषण खसरा प्रकोप का सामना कर रहा है। देश में मार्च 2026 से अब तक लगभग 1,000 संदिग्ध और पुष्ट मौतें दर्ज की जा चुकी हैं, जिनमें अधिकांश मासूम बच्चे हैं। राजनीतिक अस्थिरता के कारण पिछले दो वर्षों में टीकाकरण अभियानों में आई रुकावट और टीकों की भारी किल्लत ने इस जानलेवा बीमारी को तेजी से फैलने का मौका दे दिया है, जिससे देश की स्वास्थ्य प्रणाली पूरी तरह घुटनों पर आ गई है।

हालात

देश में अब तक 19,835 लोगाें में हुई खसरे की पुष्टि

बांग्लादेश के स्वाथ्य मंत्रालय के आंकड़ो के अनुसार, देश में खसरे के 1.66 लाख से अधिक संदिग्ध मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें 19,835 प्रयोगशाला-पुष्टि संक्रमण शामिल हैं।

इस प्रकोप से 999 मौतें हुई हैं, जिनमें 100 पुष्ट खसरा से हुई मौतें शामिल हैं।

इसी तरह 1.46 लाख से अधिक संदिग्ध मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। 9 महीने से कम उम्र के शिशु इस अत्यधिक संक्रामक बीमारी की चपेट में आ रहे हैं।

कारण

टीकाकरण कार्यक्रम बाधित होने से बढ़ा खतरा

पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के खिलाफ हुए हिंसक विद्रोह और उसके बाद अंतरिम सरकार के गठन के दौरान देश में टीकाकरण कार्यक्रम बाधित हुए थे।

स्वास्थ्य मंत्री सरदार मोहम्मद सखावत हुसैन ने संसद में स्वीकार किया कि खरीद नीतियों में बदलाव के कारण टीकों की भारी कमी हो गई थी।

इसके कारण साल 2024 में टीकाकरण कार्यक्रम को टालना पड़ा और 2025 में देशव्यापी खसरा-रुबेला अभियान रद्द होने से लाखों बच्चे असुरक्षित रह गए।

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परेशानी

खसरा और डेंगू का एक साथ हमला

बांग्लादेश की स्वास्थ्य व्यवस्था इस समय दोतरफा संकट झेल रही है। खसरे के साथ-साथ देश में डेंगू का प्रकोप भी चरम पर है।

इस साल अब तक 45,000 से अधिक लोग डेंगू के कारण अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं।

ढाका में 1,350 बिस्तरों की क्षमता वाले शहीद सुहरावर्दी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में वर्तमान में 2,350 से अधिक मरीजों का इलाज चल रहा है।

बेड कम पड़ चुके हैं और कई बच्चों का इलाज फर्श पर किया जा रहा है।

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प्रयास

राहत के प्रयास और आगे की चुनौती

सरकार ने स्थिति को संभालने के लिए अप्रैल में एक आपातकालीन खसरा-रुबेला टीकाकरण अभियान शुरू किया था, जिसके तहत 6 महीने से 5 वर्ष तक के 1.97 करोड़ से अधिक बच्चों को टीका दिया जा चुका है।

हालांकि, महामारी विज्ञानियों का कहना है कि सिर्फ आपातकालीन कदम काफी नहीं हैं।

इस भयानक प्रकोप को रोकने के लिए नियमित टीकाकरण व्यवस्था को मजबूत करना, विशेष 'कैच-अप' अभियान चलाना और सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।

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