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सऊदी क्राउन प्रिंस ने हुथियों पर हमलों के लिए डोनाल्ड ट्रंप को किया था फोन- रिपोर्ट
सऊदी क्राउन प्रिंस ने हुथियों पर हमलों के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 2 बार फोन किया था

सऊदी क्राउन प्रिंस ने हुथियों पर हमलों के लिए डोनाल्ड ट्रंप को किया था फोन- रिपोर्ट

Sep 11, 2026
03:05 pm

क्या है खबर?

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच चौंकाने वाली भू-राजनीतिक खबर सामने आई है। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को 2 बार फोन कर यमन के चरमपंथी संगठन हुथियों के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने और हवाई हमले लॉन्च करने की पुरजोर मांग की थी। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मांग को साफ तौर पर खारिज कर दिया है और हुथियों पर सीधे हमले करने से इनकार कर दिया।

योजना

ट्रंप प्रशासन की हूथियों के खिलाफ सीधे हस्तक्षेप की योजना नहीं

एक्सियोस की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी प्रिंस ने राष्ट्रपति ट्रंप को 2 बार फोन कर हूथियों के खिलाफ हमला करने का आग्रह किया था। हालांकि, ट्रंप ने हमला करने से इनकार कर दिया।

2 अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ट्रंप प्रशासन की फिलहाल हूथियों के खिलाफ सीधे हस्तक्षेप की योजना नहीं है।

मामले से परिचित लोगों ने यह भी बताया कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड के कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर तत्काल समन्वय बैठकों के लिए रियाद भी गए थे।

गुहार

लाल सागर में नाकाबंदी और बढ़ते तनाव के बीच गुहार

ईरान समर्थित हुथी विद्रोहियों ने वैश्विक व्यापार के प्रमुख चौराहे 'लाल सागर' की घेराबंदी कर रखी है, जिससे वैश्विक आपूर्ति और सऊदी अरब के तेल निर्यात के रूट पर भारी संकट खड़ा हो गया है।

बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने यमन में बढ़ते संघर्ष और मध्य-पूर्व के बिगड़ते हालातों पर गंभीर चिंता व्यक्त की, लेकिन वे अमेरिका को सीधे इस जंग में नहीं झोंकना चाहते।

ऐसे में उन्होंने प्रिंस की मांग को सिरे से खारिज कर दिया।

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जंग

जुलाई से दोबारा भड़की है सऊदी-हुथी जंग

सऊदी अरब और हुथियों के बीच चल रहा यह टकराव जुलाई 2026 में उस समय अचानक दोबारा भड़क गया, जब रियाद ने एक ईरानी विमान को यमन की राजधानी सना में उतरने से रोक दिया था।

इस विमान में हुथी संगठन का एक बहुत वरिष्ठ अधिकारी सवार था।

इस घटना के प्रतिशोध में हुथियों ने लाल सागर में सऊदी तेल टैंकरों पर घातक हमले करना शुरू कर दिया, जिससे सऊदी का पूरा तेल व्यापार खतरे में पड़ गया।

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