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प्रधानमंत्री ने नीदरलैंड में 32 किलोमीटर लंबे बांध का किया दौरा, ये कितना खास?
प्रधानमंत्री मोदी ने नीदरलैंड में प्रसिद्ध अफ्सलाउटडाइक बांध का दौरा किया

प्रधानमंत्री ने नीदरलैंड में 32 किलोमीटर लंबे बांध का किया दौरा, ये कितना खास?

लेखन आबिद खान
May 17, 2026
06:18 pm

क्या है खबर?

नीदरलैंड दौरे पर पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज डच प्रधानमंत्री रॉब जेटेन के साथ विश्व प्रसिद्ध अफ्सलाउटडाइक बांध का दौरा किया। इस दौरान भारत और नीदरलैंड के बीच जल प्रबंधन, बाढ़ नियंत्रण और जलवायु परिवर्तन जैसी चुनौतियों से निपटने पर चर्चा हुई। इस बांध ने दशकों से नीदरलैंड को बाढ़ से बचाने के साथ ताजे पानी के भंडारण, अंतर्देशीय जलमार्गों और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के प्रबंधन में मदद की है।

बांध

सबसे पहले अफ्सलाउटडाइक बांध के बारे में जानिए

अफ्सलाउटडाइक बांध नीदरलैंड की सबसे मशहूर इंजीनियरिंग परियोजनाओं में है। 32 किलोमीटर लंबा ये बांध करीब 80 साल पहले बनकर तैयार हुआ था। ये बांध उत्तरी सागर को आइसेलमायर नामक मीठे पानी की झील से अलग करता है और देश के निचले इलाकों को भयंकर बाढ़ से बचाता है। ये बांध मीठे पानी के भंडारण, देश के भीतर जहाजों के आवागमन और नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के लिए भी बेहद अहम है।

उन्नत

बांध को दिया जा रहा है नया स्वरूप

इस बांध को अब आधुनिक किया जा रहा है, जिसके तहत इसे उन तूफानों का सामना करने लायक बनाया जाएगा, जिनके 10,000 साल में केवल एक बार आने की संभावना होती है। बांध में मजबूत लॉक, बेहतर जल निकासी प्रणाली, मछलियों के आने-जाने के रास्ते और नवीकरणीय ऊर्जा तकनीकें शामिल की जा रही हैं। अधिकारियों का अनुमान है कि इस आधुनिकीकरण परियोजना पर करीब 8,900 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं।

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दौरा

प्रधानमंत्री ने क्यों किया बांध का दौरा?

दरअसल, भारत भी जलवायु परिवर्तन, शहरी बाढ़, पानी की कमी और मौसम की चरम घटनाओं से जूझ रहा है। कई राज्य पानी की कमी और बाढ़ जैसी आपदाओं के दोहरे जोखिमों का सामना कर रहे हैं। जल प्रबंधन के मामले में नीदरलैंड की मिसाल दी जाती है। इस देश ने दशकों तक समुद्र तल से नीचे रहने और बाढ़ के लगातार खतरों का प्रबंधन करने में महारत हासिल की है।

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कल्पसर परियोजना

दौरे को भारत की कल्पसर परियोजना से क्यों जोड़ा जा रहा है?

दरअसल, सरकार गुजरात में खंभात की खाड़ी के आर-पार 30 किलोमीटर लंबा बांध बनाना चाह रही है। इसमें नर्मदा, माही, साबरमती और ढाडर जैसी नदियों का लगभग 10 अरब घन मीटर मीठा पानी जमा किया जाएगा। ये समुद्री वातावरण में दुनिया का सबसे बड़ा मीठे पानी का जलाशय होगा। बांध के ऊपर 10 लेन का सड़क मार्ग और रेल लाइन बनाने की योजना है। इससे सौराष्ट्र और दक्षिण गुजरात में सिंचाई, पीने के पानी और औद्योगिक जरूरतों की पूर्ति होगी।

बयान

प्रधानमंत्री ने कहा- हम भारत में ऐसी तकनीक लाने के लिए प्रतिबद्ध

प्रधानमंत्री ने कहा, 'एक क्षेत्र जिसमें नीदरलैंड ने बहुत अच्छा काम किया है, वह है जल प्रबंधन। पूरा अंतरराष्ट्रीय समुदाय इससे बहुत कुछ सीख सकता है। आज मुझे अफ्सलाउटडाइक जाने और इस परियोजना की खास बातों के बारे में जानने का मौका मिला। मैं प्रधानमंत्री जेटन का शुक्रगुजार हूं कि वे मेरे साथ यहां आए। हम भारत में आधुनिक तकनीक लाने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जिसका मकसद सिंचाई, बाढ़ से बचाव और अंतर्देशीय जलमार्गों को बढ़ाने में मदद करना है।'

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