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नेपाल में सोशल मीडिया उपयोग को लेकर सख्ती, सरकारी कर्मचारी राजनीतिक टीका-टिप्पणी नहीं कर सकेंगे
नेपाल में बालेन शाह की सरकार सोशल मीडिया उपयोग को लेकर सख्ती करने जा रही है

नेपाल में सोशल मीडिया उपयोग को लेकर सख्ती, सरकारी कर्मचारी राजनीतिक टीका-टिप्पणी नहीं कर सकेंगे

लेखन गजेंद्र
Oct 01, 2026
05:30 pm

क्या है खबर?

नेपाल में बालेंद्र (बालेन) शाह की सरकार संसद में एक ऐसा विधेयक लेकर आई है, जो सरकारी कर्मचारियों और अधिकारियों के सोशल मीडिया उपयोग पर सख्ती लगाता है। कांतीपुर के मुताबिक, नेपाल सरकार द्वारा गुरुवार को संसद में पंजीकृत विधेयक की धारा 88 कर्मचारियों को किसी भी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में बोलने से रोकती है। यह प्रावधान प्रस्तावित संघीय सिविल सेवा अधिनियम, 2083 में शामिल किया गया है।

कानून

प्रस्तावित विधेयक क्या है?

प्रस्तावित विधेयक इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या सोशल मीडिया पर किसी भी राजनीतिक दल या राजनीतिक दल के अधिकारी के पक्ष या विपक्ष में टिप्पणी करने से प्रतिबंधित करती है।

रिपोर्ट के मुताबिक, धारा-88 सामाजिक घृणा या कलह बढ़ाने और हिंसा भड़काने वाली किसी भी अभिव्यक्ति पर रोक लगाती है।

धारा में कहा गया है कि कोई भी सरकारी कर्मचारी इलेक्ट्रॉनिक मीडिया या सोशल मीडिया पर ऐसी कोई टिप्पणी नहीं करेगा जिससे सामाजिक घृणा या कलह बढ़े, हिंसा भड़के।

सोशल मीडिया

सोशल मीडिया पर भी बरतनी होगी सावधानी

प्रस्तावित विधेयक के मुताबिक, कोई भी कर्मचारी अपने निजी पेज या सोशल मीडिया अकाउंट के माध्यम से अपने आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में किए गए कार्य से संबंधित कोई भी बात सार्वजनिक या व्यक्त न करे।

विधेयक के मुताबिक, किसी सार्वजनिक अधिकारी, किसी राजनीतिक दल, राजनीतिक दल के अधिकारी के पक्ष या विपक्ष में कोई बयान न दे।

कर्मचारियों को अपने आधिकारिक कर्तव्यों का पालन करते समय सोशल मीडिया का उपयोग करते समय अत्यधिक सावधानी बरतनी होगी।

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प्रतिबंध

सोशल मीडिया पर प्रतिबंध के खिलाफ हुआ था Gen-Z आंदोलन

नेपाल में पिछले साल प्रधानमंत्री केपी ओली की सरकार ने 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रतिबंध लगा दिया था, जिसके बाद सितंबर में Gen-Z आंदोलन भड़क उठा।

इस आंदोलन में बाद में बेरोजगारी और भ्रष्टाचार के मुद्दे भी शामिल हो गए, जिसके बाद ओली को इस्तीफा देना पड़ा और सुशीला कार्की के नेतृत्व में अंतरिम सरकार बनी।

बाद में हुए चुनावों में लोगों ने काठमांडू के मेयर रहे बालेन शाह को चुना और उनको जीताकर प्रधानमंत्री बनाया।

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