Loading...
इंडोनेशिया के अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी में हुआ भीषण विस्फोट, जकार्ता समेत 6 हवाई अड्डे बंद
इंडोनेशिया के अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी फटने से हवाई अड्डों पर फंसे हजारों यात्री

इंडोनेशिया के अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी में हुआ भीषण विस्फोट, जकार्ता समेत 6 हवाई अड्डे बंद

Sep 06, 2026
03:11 pm

क्या है खबर?

इंडोनेशिया के प्रसिद्ध माउंट अनाक क्राकाटोआ ज्वालामुखी में रविवार तड़के एक जोरदार विस्फोट हुआ है। इस विस्फोट के बाद आसमान में फैली राख के कारण राजधानी जकार्ता समेत देश के 6 प्रमुख हवाई अड्डों पर विमानों का संचालन पूरी तरह निलंबित कर दिया गया है। इस आपातकालीन कदम से 58 अंतरराष्ट्रीय उड़ानों समेत कुल 301 उड़ानें प्रभावित हुई हैं, जिससे हजारों यात्री विभिन्न टर्मिनलों पर फंस गए हैं। आइए पूरी खबर पर नजर डालते हैं।

हालात

30 सेकंड तक धधकता रहा ज्वालामुखी

देश की भूवैज्ञानिक एजेंसी के अनुसार, जावा और सुमात्रा द्वीपों के बीच सुंदर जलडमरूमध्य में स्थित इस ज्वालामुखी द्वीप में शुक्रवार से ही हलचल देखी जा रही थी।

रविवार तड़के स्थानीय समयानुसार सुबह 3:53 बजे यह ज्वालामुखी करीब 30 सेकंड तक फटा, जिसके बाद एजेंसी के कैमरों में वहां बहता लावा और भीषण आग की लपटें रिकॉर्ड हुईं।

हालांकि, अभी तक किसी के हताहत होने की खबर नहीं है। सबसे नजदीकी इंसानी बस्ती यहां से 16 किलोमीटर दूर है।

परेशानी

जकार्ता हवाई अड्डा बंद, यात्री बेहाल

जकार्ता के सोएकारनो-हट्टा अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर रविवार सुबह साढ़े 5 बजे से परिचालन रोक दिया गया। इससे लगभग 22,800 यात्री प्रभावित हुए।

अंतरराष्ट्रीय मार्गों पर सिंगापुर एयरलाइंस ने दिनभर की अपनी सभी उड़ानें रद्द कर दीं।

सिंगापुर के अलावा सिडनी, हांगकांग, एम्स्टर्डम, सियोल, दोहा और कुआलालंपुर जाने और वहां से आने वाली उड़ानें भी बाधित हुईं।

घरेलू स्तर पर बाली, लैम्पंग और सुराबाया की उड़ानें या तो रद्द कर दी गईं या मार्ग बदल दिया गया।

ADVERTISEMENT

गुबार

आसमान में बने राख के 2 विशाल गुबार

डार्विन ज्वालामुखी राख सलाहकार केंद्र और इंडोनेशियाई एजेंसी ने सैटेलाइट तस्वीरों के जरिए आसमान में राख के 2 अलग-अलग बादलों की पहचान की है।

पहला गुबार लगभग 20,000 फीट (6,100 मीटर) की ऊंचाई तक उठा और उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ा, जिससे जकार्ता, बैंटेन और पश्चिम जावा का आसमान प्रभावित हुआ।

दूसरा गुबार लगभग 50,000 फीट (15,200 मीटर) की ऊंचाई तक पहुंच गया और हिंद महासागर के हिस्सों और सुमात्रा के ऊपर छा गया।

ADVERTISEMENT