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बांग्लादेश में हसीना के तख्तापलट की बरसी पर 'जुलाई जन-विद्रोह' स्मारक का हुआ उद्घाटन, सुरक्षा बढ़ाई
बांग्लादेश में हसीना के तख्तापलट की बरसी पर 'जुलाई जन-विद्रोह' स्मारक का उद्घाटन किया गया है

बांग्लादेश में हसीना के तख्तापलट की बरसी पर 'जुलाई जन-विद्रोह' स्मारक का हुआ उद्घाटन, सुरक्षा बढ़ाई

Aug 05, 2026
05:36 pm

क्या है खबर?

बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना सरकार के तख्तापलट और उनके देश छोड़कर भारत भागने की बरसी पर बुधवार को देश भर में भारी सुरक्षा व्यवस्था के बीच एक विशेष 'जुलाई जन-विद्रोह' स्मारक संग्रहालय का उद्घाटन किया गया। यह संग्रहालय वर्ष 2024 के सरकार-विरोधी प्रदर्शनों में मारे गए पीड़ितों की याद में तैयार किया गया है। प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने हसीन का आधिकारिक निवास रहे गणभवन में इस संग्राहलय का औपचारिक रूप से उद्घाटन किया है।

ऐलान

प्रधानमंत्री तारिक ने किया शहीदों के नाम पर संस्थानों के नामकरण का ऐलान

प्रधानमंत्री तारिक ने 'जुलाई जन-विद्रोह' स्मारक के उद्घाटन पर इस आंदोलन में मारे गए कार्यकर्ताओं और साल 2009 से हसीना के कार्यकाल के दौरान मारे गए लोगों के सम्मान में सरकारी संस्थानों का नामकरण करने का भी ऐलान किया।

उन्होंने जोर देकर कहा, "फासीवाद-विरोधी आंदोलन के दौरान हुए अपराधों के लिए दोषियों पर कानून के तहत निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से मुकदमा चलाया जाएगा। कानून के शासन को सुनिश्चित करने के लिए हर अपराध के लिए न्याय आवश्यक है।"

श्रद्धांजलि

सरकार और राजनीतिक दलों के नेताओं ने मृतकों को दी श्रद्धांजलि

इस मौके पर सरकार और राजनीतिक दलों के नेताओं ने प्रदर्शनों में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस भी मौजूद रहे।

इससे पहले अधिकारियों ने दिल्ली से हसीना के आभासी संबोधन को देखते हुए देश भर में सुरक्षा बढ़ा दी।

पुलिस और सुरक्षा बलों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। विशेष रूप से हसीना के पैतृक गृह जिले गोपालगंज में बॉर्डर गार्ड बांग्लादेश (BGB) के जवानों को तैनात किया गया।

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जानकारी

भाषण पर के प्रसारण पर कार्रवाई की चेतावनी

दिल्ली स्थित फॉरेन करस्पॉन्डेंट्स क्लब ऑफ साउथ एशिया में हसीना के एक आभाषी संबोधन की घोषणा के बाद बांग्लादेश सरकार के सूचना सलाहकार ने मीडिया को हसीना के भाषण का प्रसारण या प्रकाशन करने पर कानूनी कार्रवाई की चेतावनी दी थी।

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पृष्ठभूमि

आंदोलन का इतिहास और मौतें

यह ऐतिहासिक राजनीतिक उलटफेर नौकरी में विवादास्पद कोटा प्रणाली के खिलाफ छात्रों के नेतृत्व में शुरू हुए प्रदर्शनों का नतीजा था।

संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई से अगस्त 2024 के बीच भड़की इस हिंसा और सुरक्षा बलों की कार्रवाई में करीब 1,400 लोगों की मौत हुई थी।

देश में बढ़ते विरोध के बीच हसीना 5 अगस्त, 2024 को विशेष विमान से भारत आ गई थीं और तब से यहीं पर रह रही हैं।

सजा

बांग्लादेश के विशेष न्यायाधिकरण ने हसीना को सुनाई मौत की सजा

हसीना के भारत जाने के 3 दिन बाद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार के रूप में पदभार संभाला था।

उसके बाद नवंबर 2025 में बांग्लादेश के विशेष न्यायाधिकरण ने मानवता के खिलाफ अपराध और नरसंहार के मामलों में हसीना और उनके पूर्व गृह मंत्री को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी।

इसके बाद देश में हुए आम चुनावों के बाद हसीना की पार्टी 'अवामी लीग' को पूरी तरह प्रतिबंधित कर दिया गया था।

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