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अमेरिकी नाकाबंदी के विरोध में ईरान ने खुद को शांति समझौते से अलग किया
अमेरिकी नाकाबंदी के विरोध में ईरान ने खुद को शांति समझौते से अलग किया (प्रतीकात्मक तस्वीर)

अमेरिकी नाकाबंदी के विरोध में ईरान ने खुद को शांति समझौते से अलग किया

लेखन गजेंद्र
Jul 15, 2026
10:47 am

क्या है खबर?

अमेरिका की सेना द्वारा लगातार ईरानी ठिकानों पर हो रहे हमले और ईरानी बंदरगाहों पर एक बार फिर नाकाबंदी शुरू किए जाने के बाद ईरान शांति समझौता तोड़ने का विचार कर रहा है। ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने अमेरिका पर समझौता ज्ञापन की शर्तों का उल्लंघन करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वह हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन से अब बंधा नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वह होर्मुज जलडमरूमध्य पर पूर्ण युद्धकालीन नियंत्रण रखेगा।

बयान

क्या बोले गरीबाबादी?

ईरान की तसनीम न्यूज एजेंसी से बात करते हुए गरीबाबादी ने कहा कि तेहरान होर्मुज पर अपनी संप्रभुता को लागू करेगा, चाहे इसकी कितनी भी कीमत चुकानी पड़े।

उन्होंने कहा, "अमेरिका ने समझौते का उल्लंघन करने से कहीं आगे बढ़कर काम किया है। आज रात की नौसैनिक नाकाबंदी के साथ, समझौता प्रभावी रूप से समाप्त हो गया है। ईरान अब खुद को इस समझौते से बंधा हुआ नहीं मानता।"

बयान

राजनयिक संवाद की संभावना को भी खारिज किया

गरीबाबादी ने होर्मुज पर तेहरान के रुख को और भी कड़ा करते हुए इसे ईरान की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए केंद्रीय बताया।

उन्होंने कहा कि हालांकि ओमान सामान्यतः रणनीतिक जलडमरूमध्य पर जिम्मेदारी साझा करता है, लेकिन युद्धकालीन परिस्थितियों के कारण ईरान को पूरे मार्ग पर नियंत्रण रखना आवश्यक हो गया है।

उन्होंने वाशिंगटन के साथ किसी भी तत्काल राजनयिक बातचीत की संभावना को भी खारिज कर दिया।

उन्होंने कहा, "ईरान कभी भी अमेरिका के साथ बातचीत का अनुरोध नहीं करेगा।"

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टकराव

ट्रंप ने ईरान को बातचीत की मेज पर आने को कहा

ईरान पर हमलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए एक साक्षात्कार में कहा कि अगर ईरान बातचीत की मेज पर वापस नहीं आता है तो वाशिंगटन अपने सैन्य अभियान का विस्तार करने के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा, "अगले हफ्ते बिजली संयंत्रों और उसके अगले हफ्ते पुलों पर हमला होगा। हम उनके सभी पावर प्लांट और सभी पुलों को तबाह कर देंगे, जब तक कि वे बातचीत की मेज पर आकर समझौता न कर लें।"

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समझौता

17 जून के समझौते पर संकट

अमेरिका और ईरान के बीच 28 फरवरी को युद्ध शुरू हुआ था, जिसको लेकर 17 जून को दोनों पक्षों में शांति समझौते पर सहमति बनी और समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए।

इसका उद्देश्य दोनों पक्षों द्वारा व्यापक समाधान पर काम करने के लिए 60 दिनों तक संघर्ष को रोकना, होर्मुज से सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय नौवहन बहाली, सैन्य तनाव को कम करने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत का मुद्दा शामिल था।

अब तनाव बढ़ने से यह समझौता संकट में है।

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