ईरान युद्ध के कारण 3.2 करोड़ लोग गरीबी में धकेले जा सकते हैं- संयुक्त राष्ट्र
क्या है खबर?
ईरान युद्ध के आर्थिक असर से दुनियाभर में करीब 3.2 करोड़ लोग गरीबी में धकेले जा सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, इसका सबसे ज्यादा असर विकासशील देशों पर पड़ेगा। यह रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब ईरान युद्धविराम को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। एजेंसी ने इसे वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका बताया है, जो कई देशों की आर्थिक स्थिति को कमजोर कर सकता है।
बयान
इसका असर लंबे समय तक रहेगा- UNDP प्रमुख
रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया "ट्रिपल शॉक" का सामना कर रही है, जिसमें ऊर्जा, खाद्य और आर्थिक विकास तीनों पर असर पड़ रहा है। बेल्जियम के पूर्व प्रधानमंत्री और UNDP प्रमुख अलेक्जेंडर डी क्रू ने कहा कि यह "विकास का पीछे जाना" जैसी स्थिति है। उनके अनुसार, युद्ध भले ही रुक जाए, लेकिन इसका असर लंबे समय तक रहेगा और गरीब देशों में लोग फिर से गरीबी की ओर धकेले जाएंगे।
महंगाई
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी दी चेतावनी
युद्ध के बाद दुनियाभर में तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित होने से कीमतों में तेज उछाल आया है। खासतौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से वैश्विक बाजार पर दबाव बढ़ा है। इसका असर उर्वरक और शिपिंग लागत पर भी पड़ा है, जिससे खाद्य संकट का खतरा बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी चेतावनी दी है कि यह संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था पर ऐसे गहरे असर छोड़ेगा, जिनका नुकसान लंबे समय तक महसूस किया जाएगा।
समाधान
ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर होगा असर
UNDP ने सुझाव दिया है कि सबसे गरीब लोगों की मदद के लिए करीब 6 अरब डॉलर (करीब 560 अरब रुपये) की जरूरत होगी, ताकि उन्हें गरीबी रेखा से नीचे जाने से रोका जा सके। इसके लिए नकद सहायता, सब्सिडी या वाउचर जैसे उपाय अपनाए जा सकते हैं। हालांकि, एजेंसी ने सभी के लिए सब्सिडी देने के खिलाफ चेतावनी दी। रिपोर्ट के मुताबिक, अगर हालात बिगड़े तो ज्यादा असर ऊर्जा आयात करने वाले देशों पर होगा।