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IAEA में ईरानी राजदूत का बड़ा दावा, कहा- इजरायल-अमेरिका ने किया परमाणु संयंत्र पर हमला
IAEA में ईरानी राजदूत ने लगाया परमाणु संयंत्र पर हमले का आरोप (तस्वीर: फाइल)

IAEA में ईरानी राजदूत का बड़ा दावा, कहा- इजरायल-अमेरिका ने किया परमाणु संयंत्र पर हमला

Mar 02, 2026
05:33 pm

क्या है खबर?

अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) में ईरान के राजदूत रजा नजाफी ने दावा किया है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने ईरानी परमाणु सुविधाओं को अपना निशाना बनाया था। हालांकि, संयुक्त राष्ट्र के परमाणु निगरानी निकाय के प्रमुख ने कहा कि इस बात का कोई सबूत नहीं है कि कथित हमलों में किसी भी परमाणु स्थल को नुकसान पहुंचा है। ऐसे में किसी तरह के विकिरण खतरे की संभावना नहीं है। आइए जानते हैं उन्होंने क्या कहा।

आरोप

नजाफी ने क्या लगाया आरोप?

नजाफी ने आरोप लगाया कि अमेरिकी-इजरायली हमलों ने विशेष रूप से नतान्ज संवर्धन सुविधा को निशाना बनाया और उन्होंने इन हमलों की निंदा करते हुए इन्हें गैरकानूनी, आपराधिक और क्रूर करार दिया है। समाचार एजेंसी PTI के अनुसार, नजाफी ने कहा, "उन्होंने कल फिर से ईरान की शांतिपूर्ण और सुरक्षित परमाणु सुविधाओं पर हमला किया। उनका यह तर्क कि ईरान परमाणु हथियार विकसित करना चाहता है, लेकिन यह पूरी तरह से सिर्फ एक झूठ है।"

इनकार

IAEA महानिदेशक ने किया इनकार

IAEA के महानिदेशक राफेल ग्रॉसी ने सोमवार को एजेंसी के 35 सदस्यीय शासी मंडल को बताया कि एजेंसी के पास इस बात का कोई संकेत नहीं है कि किसी भी परमाणु प्रतिष्ठान को नुकसान पहुंचाया गया है या उस पर हमला हुआ है। ग्रॉसी ने कहा कि IAEA अभी तक ईरान के परमाणु नियामक अधिकारियों से संपर्क स्थापित करने में असमर्थ रहा है। उनके संपर्क करने के प्रयास जारी हैं, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।

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राहत

विकिरण में नहीं देखी गई है कोई वृद्धि

ग्रॉसी ने ईरान की सीमा से लगे देशों में विकिरण के स्तर में सामान्य पृष्ठभूमि स्तर से ऊपर कोई वृद्धि नहीं देखे जाने की भी बात कही है। ग्रॉसी ने कहा, "आज की स्थिति बेहद चिंताजनक है। हम रेडियोधर्मी विकिरण के रिसाव की संभावना से इनकार नहीं कर सकते, जिसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं, जिनमें बड़े शहरों जितने या उससे भी बड़े क्षेत्रों को खाली कराना शामिल है। हमें कूटनीति और बातचीत की ओर लौटना होगा।"

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संकट

मध्य पूर्व के देशों मे तीनों से बना हुआ है संकट

पिछले तीन दिनों में मध्य पूर्व में संघर्ष तेजी से फैल गया है। ईरान और ईरान समर्थित समूहों के हमलों ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र के कुछ हिस्सों को निशाना बनाया है। ईरानी रेड क्रिसेंट सोसाइटी ने कहा है कि ईरान भर में अब तक कम से कम 555 लोगों की मौत हुई है। इधर, इजराइली हमले दक्षिणी लेबनान तक भी फैल गए हैं, जहां कम से कम 31 लोगों के मारे जाने की खबर है।

शुरुआत

कैसे हुई मौजूद संघर्ष की शुरुआत?

दरअसल, इजरायल ने गत 28 फरवरी को अमेरिका की सेना के साथ मिलकर ईरान पर हमला बोल दिया था। उसने राजधानी तेहरान के अलावा करमानशाह, लोरेस्टन, तबरीज, इस्फहान और करज शहरों 30 से अधिक जगहों पर हमले किए थे। तेहरान में सर्वोच्च नेता अयातुल्लाह अली खामेनेई के कार्यालय को भी निशाना बनाया गया था, जिसमें खामेनेई समेत उनकी बेटी, दामाद, पोती और बहू की भी मौत हो गई। उसके बाद ईरान के जवाबी कार्रवाई शुरू करते ही संघर्ष भड़क गया।

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