अमेरिका के साथ युद्ध के बीच ईरानी राष्ट्रपति BRICS सम्मेलन में शामिल होने भारत आएंगे
क्या है खबर?
अमेरिका के साथ तनाव के बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन अगले महीने BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेने के लिए भारत का दौरा करेंगे। यह दौरा ऐसे समय पर हो रहा है, जब भारत 2026 में अपनी अध्यक्षता में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा। यह अध्यक्षता 2026 की शुरुआत में ब्राजील से ग्रहण की थी। शिखर सम्मेलन का विषय "लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण" विषय पर है।
दौरा
पेजेश्कियन ने रूस में प्रधानमंत्री मोदी से की थी मुलाकात
इससे पहले पेजेश्कियन ने अक्टूबर 2024 में, रूस के कज़ान में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी।
तब दोनों देशों के नेताओं ने द्विपक्षीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर चर्चा की थी। सितंबर में होने वाली मुलाकात में भी द्विपक्षीय संबंधों को जोर दिया जाएगा।
इससे पहले जून में, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने के लिए भारत पहुंचे थे।
संगठन
ईरान 2024 में BRICS में शामिल हुआ
BRICS की शुरूआत 2006 में हुई थी, तब यह ब्राजील, रूस, भारत और चीन को मिलाकर BRIC था, लेकिन 2010 में दक्षिण अफ्रीका के साथ आने पर यह BRICS बना।
ईरान 2024 में मिस्र, इथियोपिया, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के साथ BRICS का पूर्ण सदस्य बन गया।
इंडोनेशिया 2025 में इस समूह में शामिल हुआ, जिससे पूर्ण सदस्यों की कुल संख्या 11 हो गई।
इसमें 10 आधिकारिक देश भी शामिल हैं।
मुलाकात
अराघची ने दिल्ली में सशस्त्र संघर्ष को व्यर्थ बताया था
BRICS विदेश मंत्रियों की बैठक में आए अराघची ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि पश्चिम एशिया में अस्थिर स्थिति को शांत करने में भारत "बड़ी भूमिका" निभा सकता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि तेहरान सशस्त्र संघर्ष में कोई भविष्य नहीं देखता। उन्होंने मौजूदा संकट का सैन्य समाधान नहीं बल्कि बातचीत से समझौते को एक व्यवहारिक रास्ता बताया था।
अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरान होर्मुज में सुरक्षा के रक्षक के रूप में अपने ऐतिहासिक कर्तव्य का हमेशा निर्वाह करेगा।
प्रभाव
ईरानी राष्ट्रपति का युद्ध के बीच दिल्ली आना भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण?
अमेरिका-इजरायल के साथ 28 फरवरी को शुरू हुआ ईरान का युद्ध अभी चल रहा है। ऐसे में पेजेश्कियन का भारत आना काफी महत्वपूर्ण है।
अगर उनकी प्रधानमंत्री मोदी से द्विपक्षीय मुलाकात होती है तो पश्चिम एशिया में शांति-स्थिरता के अलावा होर्मुज जलडमरूमध्य में भारत की सुरक्षित आवाजाही का मुद्दा भी उठ सकता है।
इसके अलावा भारत चाबहार बंदरगाह को लेकर भी बातचीत हो सकती है, जिसमें भारत ने निवेश किया है, लेकिन अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण समस्या आ रही है।