ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने अमेरिकी जनता को पत्र लिखा, कहा- इजरायल का प्रॉक्सी बना अमेरिका
क्या है खबर?
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने गुरुवार तड़के अमेरिकी जनता के नाम एक खुला पत्र सोशल मीडिया पर साझा किया है, जिसमें उन्होंने जनता से राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के मौजूदा संघर्ष पर सवाल उठाने की अपील की है। पेज़ेश्कियन ने पत्र में तेहरान को सुरक्षा खतरे के रूप में बताए जाने को खारिज किया और लिखा कि ईरान ने कभी भी इतिहास में आक्रामकता, विस्तारवाद, उपनिवेशवाद या प्रभुत्व का मार्ग नहीं चुना है। उन्होंने अमेरिका को इजरायल का प्रॉक्सी बताया।
संदेश
ईरान ने कभी कोई जंग शुरू नहीं की- पेजेश्कियन
पेजेश्कियन ने लिखा, "ईरान ने कभी कोई जंग शुरू नहीं की। अमेरिका ने अपनी सैन्य मौजूदगी ईरान के आसपास बढ़ाकर हमले किए, जिसने दिखाया कि ऐसी मिलिट्री मौजूदगी सच में कितनी खतरनाक है। जाहिर है, ऐसे हालात का सामना करने वाला कोई भी देश अपनी रक्षा क्षमता को मज़बूत करने से पीछे नहीं हटेगा। ईरान ने जो किया है वह सही आत्मरक्षा पर आधारित एक नपा-तुला जवाब है, और किसी भी तरह से जंग या हमले की शुरुआत नहीं है।"
युद्ध
युद्ध से अमेरिकी लोगों को कौन सा फायदा हो रहा- पेजेश्कियन
राष्ट्रपति ने लिखा कि ईरान पर कई बार दबाव पड़ा, लेकिन इसके उलट, देश शिक्षा, माॉर्डन तकनीक, स्वास्थ्य सेवाओं और बुनियादी ढांचों में तेजी से विकास किया है। उन्होंने लिखा कि युद्ध जिंदगी, घरों, शहरों और भविष्य को ऐसा नुकसान पहुंचाता है जिसकी भरपाई नहीं हो सकती, लेकिन इससे एक बुनियादी सवाल उठता है कि इस युद्ध से असल में अमेरिकी लोगों का कौन सा फायदा हो रहा है?" उन्होंने पूछा की क्या ईरान की तरफ से कोई खतरा था?
प्रॉक्सी
क्या इजरायल का प्रॉक्सी बना अमेरिका- पेजेश्कियन
राष्ट्रपति ने लिखा, "ईरान ने बातचीत जारी रखी, एक समझौते पर पहुंचा, और अपने सभी वादे पूरे किए। उस बातचीत के बीच 2 हमले करने का फैसला खतरनाक था, ये हमले एक विदेशी हमलावर के भ्रम को पूरा करते थे।" उन्होंने पूछा कि क्या अमेरिका इजरायल के नियंत्रण में है और हमले में उसका प्रॉक्सी बना, इजरायल, दुनिया का ध्यान अपने अपराधों से हटाना चाहता है और ईरान से आखिरी अमेरिकी सैनिक और करदाता के डॉलर-शिफ्टिंग तक लड़ना चाहता है।"
संदेश
राष्ट्रपति ने टकराव को महंगा और बेकार बताया
राष्ट्रपति ने अमेरिकी जनता से अनुरोध किया कि वह उन लोगों से बात करें जो ईरान गए हैं। उन्होंने बताया कि ईरान में पढ़े-लिखे कई कामयाब लोग दुनिया में अपना योगदान देते हैं। उन्होंने पूछा कि क्या ये सच्चाईयां उन गलतफहमियों से मेल खाती हैं जो लोगों को ईरान के बारे में बताई जा रही हैं। उन्होंने कहा कि टकराव के रास्ते पर चलना पहले से अधिक महंगा और बेकार है, इसका नतीजा आने वाली पीढ़ियों का भविष्य तय करेगा।