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ओमान पर हमला नहीं करना चाहता था ईरान, क्या विशिष्ट सैन्य टुकड़ी खुद कर रही हमले?
IRGC ने अपनी मर्जी से किया था ओमान पर हमला

ओमान पर हमला नहीं करना चाहता था ईरान, क्या विशिष्ट सैन्य टुकड़ी खुद कर रही हमले?

Mar 02, 2026
06:10 pm

क्या है खबर?

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने दावा किया है कि ओमान बंदरगाह पर हालिया हमला उनकी पसंद नहीं थी। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि देश की विशेष सैन्य टुकड़ी यानी इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) स्वतंत्र रूप से काम कर रही है। उनका कहना है कि इजरायल और अमेरिका के हमलों के बाद ईरानी सेना अलग-थलग पड़ गई। अराघची का यह बयान बड़ी चिंता का विषय है और मध्य पूर्व में स्थिति को और बिगाड़ सकता है।

बयान

अराघची ने क्या कुछ कहा?

अराघची ने अल जजीरा से कहा, "अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद ईरान की सेना अब अलग-थलग पड़ गई है और स्वतंत्र रूप से कार्रवाई कर रही है। इन हमलों में देश के अधिकांश वरिष्ठ नेता मारे गए, जिनमें सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई भी शामिल थे।" उन्होंने कहा, "ओमान में जो हुआ वह हमारी मर्जी से नहीं हुआ। हमने अपने सशस्त्र बलों को पहले ही निर्देश दे दिए हैं कि वे अपने लक्ष्यों को लेकर सतर्क रहें।"

जानकारी

पूर्व के सामान्य निर्देशों का पालन कर रही सेना- अराघची

अराघची ने कहा, "हमारी सैन्य इकाइयां अब स्वतंत्र और एक तरह से अलग-थलग हो गई हैं। ऐसे में इस माहौल में वह पहले से दिए गए निर्देशों यानी सामान्य निर्देशों के आधार पर ही काम कर रही हैं। उन्हें कोई नए निर्देश नहीं मिले हैं।"

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स्थापना

ईरान में कब हुई IRGC की स्थापना और क्या है इसका कार्य?

ईरान में 1979 की क्रांति के बाद रुहोल्लाह खुमैनी द्वारा IRGC की स्थापना की गई थी। IRGC का मुख्य उद्देश्य सर्वोच्च नेता की रक्षा करना और देश में इस्लामी राजनीतिक व्यवस्था को सुरक्षित रखना है। इराक, सीरिया, लेबनान और यमन में सशस्त्र आतंकवादी समूहों को समर्थन देने के कारण अमेरिका ने 2019 में IRGC को एक विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया था। IRGC के पास अपनी खुद की थल सेना, वायु सेना और नौसेना भी है।

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ताकत

IRGC कितनी ताकतवर है?

खामेनेई ने IRGC को निजी संगठन के रूप में स्वतंत्र रूप से कार्य करने के लिए विशेष शक्तियां भी प्रदान की थीं। IRGC के पास लगभग 2 लाख सैनिक हैं, लेकिन ईरान की सैन्य संरचना पर उसका दबदबा बना हुआ है। वह पारंपरिक सेना के निर्देशों का पालन नहीं करती है और सीधे सर्वोच्च नेता के आदेशों पर कार्रवाई करती है। वर्तमान में खामेनेई की मौत के बाद वह पूर्व में उनसे मिले निर्देशों के तहत हमले कर रही है।

तनाव

मध्य पूर्व में बना हुआ है तनाव का माहौल

अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों में खामेनेई की मौत के बाद से मध्य पूर्व में तनाव बना हुआ है और सभी पक्ष एक-दूसरे पर तनाव बढ़ाने का आरोप लगा रहे हैं। खाड़ी देशों समेत वैश्विक नेताओं ने ईरान से स्थिति को और न बढ़ाने का आग्रह किया है और कहा है कि तेहरान की लड़ाई अपने पड़ोसियों से नहीं है। स्थिति पर चर्चा करने के लिए पिछले सप्ताह संयुक्त राष्ट्र (UN) की आपातकालीन बैठक भी आयोजित की गई थी।

बदला

ईरान ने अमेरिका से बातचीत करने से किया इनकार

मौजूदा हालात में रूस, चीन और भारत समेत सभी देश संयम बरतने की अपील कर रहे हैं। हालांकि, ईरान ने कहा है कि वह क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों पर हमले जारी रखेगा। सोमवार को उसने एक वीडियो भी जारी किया जिसमें ड्रोन, रॉकेट लॉन्चर और मानवरहित हवाई वाहन (UAV) से भरी एक भूमिगत सुरंग दिखाई दे रही थी। विश्लेषकों का मानना ​​है कि यह इस बात का संकेत है कि मध्य पूर्व में स्थिति और बिगड़ सकती है।

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