अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों ने PoK में हिंसा को लेकर जताई चिंता, जानिए क्या कहा
क्या है खबर?
अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार और प्रेस की स्वतंत्रता से जुड़े संगठनों ने पाक अधिकृत कश्मीर (PoK) में जारी हिंसा पर चिंता जताई है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने रावलकोट में प्रदर्शनकारियों के खिलाफ इस्तेमाल की गई अत्यधिक बल प्रयोग की निंदा करते हुए इसे पाकिस्तान के गैरकानूनी हिंसा के इतिहास की एक चिंताजनक निरंतरता बताया है। संगठन ने घटनाओं की स्वतंत्र जांच की मांग की है और अधिकारियों से संचार सेवाएं बहाल करने का आग्रह किया है।
सख्ती
पत्रकारों को हिरासत में लिया गया
पत्रकारों की सुरक्षा के लिए गठित समिति (CPJ) ने भी PoK में बिगड़ती प्रेस की स्वतंत्रता की स्थिति पर चिंता व्यक्त की है।
संगठन ने इंटरनेट ब्लैकआउट, दूरसंचार बंद, रिपोर्टिंग प्रतिबंध और पत्रकारों की हिरासत जैसे मुद्दों को उजागर किया।
इसमें विशेष रूप से उल्लेख किया गया है कि स्वतंत्र पत्रकार रजी ताहिर और उनके सहयोगी मोहम्मद सैफ को कथित तौर पर 1 अगस्त को इस्लामाबाद स्थित उनके कार्यालय से पुलिस वर्दी पहने लोगों ने पकड़ लिया था।
स्वीकारोक्ति
पाकिस्तान को स्वीकार करनी चाहिए ताहिर और सैफ हिरासत- CPJ
CPJ ने मांग की है कि यदि ताहिर और सैफ राज्य की हिरासत में हैं, तो पाकिस्तान के अधिकारी उनकी हिरासत को स्वीकार करें।
संगठन ने उचित कानूनी प्रक्रिया और मनमाने ढंग से हिरासत में लिए जाने पर उनकी तत्काल रिहाई की भी मांग की है।
इसी तरह कश्मीरी पत्रकार राजा इकराम को भी कथित तौर पर 1 अगस्त को घटनाओं के कवरेज के दौरान हिरासत में लिया गया था। हालांकि, बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया था।
मौत
PoK में अब तक हो चुकी 80 लोगों की मौत
पाकिस्तान अधिकृत जम्मू और कश्मीर मानवाधिकार परिषद (HRC-POJK) ने मौजूदा विरोध प्रदर्शन में कम से कम 80 मौतों की सूचना दी है। मृतकों में 27 जुलाई से पहले मारे गए 33 नागरिक और उसके बाद रावलकोट, मीरपुर और मुजफ्फरबाद में मारे गए 43 लोग शामिल हैं।
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर के 4 पुलिसकर्मी भी शहीद हो गए हैं। इसको लेकर पूरी दुनिया में पाकिस्तान सरकार की निंदा की जा रही है।