#NewsBytesExplainer: NATO से बाहर निकल सकता है अमेरिका, दुनिया पर क्या होगा असर?
क्या है खबर?
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि वे NATO से बाहर निकलने पर गंभीरता से विचार कर रहे हैं। उन्होंने NATO को कागजी शेर बताते हुए कहा कि वे पहले भी इससे ज्यादा प्रभावित नहीं थे। ट्रंप का ये बयान ऐसे वक्त आया है, जब NATO देशों ने ईरान युद्ध में शामिल होने से इनकार कर दिया है। आइए अमेरिका के NATO से बाहर निकलने के मायने समझते हैं।
NATO
सबसे पहले NATO के बारे में जानिए
NATO यानी नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन। 4 अप्रैल, 1949 को सैन्य गठबंधन NATO की शुरुआत हुई थी। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद सोवियत संघ के विस्तार को रोकने के लिए इसका गठन किया गया था। अमेरिका, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम (UK) समेत कुल 12 देशों ने इसकी स्थापना की थी। अभी सदस्यों की संख्या 32 है। NATO का अनुच्छेद-5 कहता है कि अगर कोई NATO देश पर हमला करता है तो इसे सभी देशों पर हमला माना जाता है।
रुख
NATO को लेकर कैसा रहा है ट्रंप का रुख?
ट्रंप अक्सर NATO की आलोचना करते रहे हैं। खासतौर पर अमेरिका द्वारा ज्यादा वित्तीय योगदान दिए जाने को लेकर। दिसंबर 2024 में ट्रंप ने कहा था कि NATO अमेरिका का फायदा उठा रहा है और अमेरिका इसका सदस्य तभी रहेगा, जब दूसरे सदस्य भी खर्च उठाएंगे। पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन के अनुसार, अगस्त 2019 में ट्रंप ने ये तक कह दिया था कि उन्हें NATO की कोई परवाह नहीं है।
अहमियत
NATO के लिए कितना अहम है अमेरिका?
अमेरिका NATO की लगभग 44 प्रतिशत सैन्य क्षमताएं और जरूरी परमाणु प्रतिरोधक क्षमता मुहैया कराता है। अमेरिका NATO का मुख्य सुरक्षा गारंटर भी है। अमेरिका NATO के बजट में सबसे बड़ा योगदान देता है, जिससे इसकी कमांड संरचना और साझा अभियानों की फंडिंग होती है। NATO के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में कुल रक्षा व्यय में अमेरिका का हिस्सा 63 प्रतिशत था। 2016 में ये आंकड़ा 72 प्रतिशत पर था।
असर
अमेरिका के NATO छोड़ने का क्या होगा असर?
अमेरिका NATO के कुल रक्षा खर्च का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा देता आया है। अमेरिका के गठबंधन छोड़ने से सैन्य, वित्तीय और परमाणु क्षमताएं काफी कमजोर हो जाएंगी। इसकी भरपाई के लिए यूरोपीय सहयोगियों को लगभग 93 लाख करोड़ रुपये का निवेश करना होगा। अनुमान है कि रूस को देखते हुए यूरोप को 3 लाख अतिरिक्त सैनिकों और रक्षा पर सालाना 2,700 करोड़ रुपये से ज्यादा खर्च करने की जरूरत होगी। रूस के मुकाबले गठबंधन की परमाणु क्षमताएं पिछड़ जाएंगी।
तरीका
क्या NATO से बाहर निकल सकता है अमेरिका?
NATO से बाहर निकलना अमेरिका के लिए इतना आसान नहीं है। दरअसल, 2024 के एक अमेरिकी कानून के मुताबिक, NATO से बाहर निकलने के किसी भी राष्ट्रपति के फैसले को या तो दो-तिहाई सीनेट की मंजूरी लेनी होगी या कांग्रेस के एक अधिनियम के माध्यम से अधिकृत किया जाना होगा। हालांकि, कुछ जानकारों का मानना है कि ये कानून पूरी तरह से पुख्ता नहीं है और ट्रंप इसे दरकिनार कर सकते हैं।
अमेरिका
अमेरिका के लिए कितना अहम है NATO?
NATO अमेरिका को 30 से ज्यादा सहयोगी देता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय संकटों से निपटने की उसकी क्षमता बढ़ जाती है। NATO देश यूरोप में 28 अमेरिकी सैन्य अड्डों की मेजबानी करते हैं। ये अड्डे अमेरिका को किसी संकट पर प्रतिक्रिया देने में आगे रखते हैं खासतौर पर मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में मिशनों के लिए। इसके अलावा NATO देश अमेरिका के बड़े व्यापारिक साझेदार हैं, खुफिया जानकारी उपलब्ध कराते हैं और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए अहम है।