नेपाल में बाढ़ ने कैसे मचाई तबाही, कितना हुआ नुकसान और क्या खतरा टला नहीं?
क्या है खबर?
नेपाल में तिब्बती सीमा से सटे रसुवा जिले में बुधवार सुबह आई भयावह बाढ़ भारी तबाही मचा दी है। तिब्बत से नेपाल में प्रवेश करने वाली भोटेकोशी नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने से नेपाल के कई इलाके डूब गए। सबसे ज्यादा असर तिमुरे, रसुवागढ़ी और स्याफ्रुबेसी इलाकों में दिखा है, जहां सड़क और पुल समेत कई घर क्षतिग्रस्त हो गए। बिना बारिश के बाढ़ आने का क्या कारण है और इससे अभी तक कितना नुकसान हुआ? आइए, जानते हैं।
बाढ़
कैसे आई बाढ़?
तिब्बत में उत्पन्न भेटोकोशी नदी नेपाल में त्रिशूली नदी से जुड़ती है, लेकिन बिना बारिश बाढ़ के पीछे कई संभावित कारण बताए गए हैं।
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, सुबह साढ़े 8 बजे ऊपरी इलाके में 4.4 तीव्रता का भूकंप आया, जिससे भोटेकोशी की सहायक नदी ल्हेंडे खोला पर हिमस्खलन हुआ।
नदी अवरूद्ध होने से अचानक काफी पानी आ गया, जिसने तिमुरे सीमा चौकी के रास्ते नेपाल में प्रवेश किया और तबाही मचाई।
सैटेलाइट विश्लेषण में हिमस्खलन की पुष्टि हुई है।
तबाही
बाढ़ ने कितना और कहां-कहां पहुंचाया नुकसान?
बाढ़ ने सबसे अधिक तबाही रसुवा और नुवाकोट जिलों में मचाई है। यहां भोटेकोशी नदी के किनारे बसे 3 इलाकों में कई गांव, बाजार, कई घर, दुकानें, बैंक, दर्जनों कंक्रीट के पुल और दूसरी इमारतें बह गई हैं।
यह इलाका नेपाल और चीन सीमा का प्रमुख सीमा व्यापार बिंदु है। यहां बाढ़ से 300 से ज्यादा वाहन और ट्रक बह गए।
बेट्रावती से रसुवागढ़ी चीन सीमा तक जाने वाली 42 किलोमीटर सड़क क्षतिग्रस्त हो गई।
नुकसान
बिजली परियोजनाओं को नुकसान, चीन को भी झटका
बाढ़ ने सबसे अधिक भोटेकोशी-त्रिशूली क्षेत्र के कई जल विद्युत परियोजनाओं को नुकसान पहुंचाया है। बिजली से जुड़ी ट्रांसमिशन संरचनाएं क्षतिग्रस्त हो गई हैं।
रॉयटर्स के मुताबिक, करीब 430 मेगावाट क्षमता प्रभावित हुई है, जो नेपाल के कुल क्षमता का 12 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा है और 220केवी सबस्टेशन को नुकसान पहुंचा है। कई इलाकों में बिजली प्रभावित है।
तिब्बत की तरफ क्यिरोंग बंदरगाह के आसपास सड़क संपर्क और बिजली संचार सीमा व्यापार प्रभावित हुआ है।
लापता
105 भारतीय समेत 400 से अधिक लोग लापता
रसुवा क्षेत्र में 400 से अधिक पर्यटक संपर्क से बाहर हैं। इसमें 93 नेपाली शामिल हैं और बाकी विदेशी हैं।
नेपाल पर्यटन बोर्ड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हिकमत सिंह के अनुसार, पर्यटकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। खोज और बचाव कार्य जारी है।
रॉयटर्स के मुताबिक, लापता लोगों में 105 भारतीय, 3 अमेरिकी, 12 ब्रिटिश, 17 मलेशियाई, 4 दक्षिण अफ्रीकी, ऑस्ट्रेलिया-नीदरलैंड से एक-एक व्यक्ति शामिल हैं।
एक जलविद्युत संयंत्र में कार्यरत 8 दक्षिण कोरियाई नागरिक भी लापता हैं।
मृतक
अब तक 95 लोगों के मारे जाने की खबर
नेपाल में बाढ़ से कम से कम 95 लोगों के मारे जाने की खबर है। चीन के ग्यिरोंग बंदरगाह पर भी काफी लोगों की मौत हुई है। इसका वीडियो भी साने आया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेपाल के करीब 26 पुलिसकर्मी, 9 सशस्त्र पुलिस और 44 सेना सहित 80 से अधिक सैन्यकर्मी और कस्टम से जुड़े कर्मचारी लापता हैं।
करीब 18 हेलीकॉप्टर से बचाव चल रहा है, लेकिन पानी ऊंचा होने से लैंडिंग मुश्किल है।
ट्विटर पोस्ट
नेपाल में बाढ़ से कई दर्जनों पुल टूटे हैं
#नेपाल में तबाही का भयानक मंजर.... ब्रिज में ब्रिज को उड़ाया यह किसी फिल्मी सीन का दृश्य नहीं बल्कि हकीकत है अचानक आई बाढ़ में नेपाल में काफी तबाही मचाई है सैकड़ो लोगों की जान चली गई आंकड़ा अभी और बढ़ जाएगा pic.twitter.com/B0zhFi11KE
— Dr.Ahtesham Siddiqui (@AhteshamFIN) August 26, 2026
खतरा
क्या खतरा अभी टला नहीं है?
तिब्बत से निकलने वाली भोटेकोशी नदी, नेपाल में आकर त्रिशूली और इसके बाद भारत में गंडक नदी से मिलती है, जिससे भारत में भी संभावित खतरे की आशंका है।
नेपाल के अधिकारियों ने दूसरी बाढ़ की संभावना जताई है क्योंकि ऊपर की ओर अभी एक अवरोध मौजूद है। यदि वह टूटता है तो दूसरी तेज लहर नीचे आ सकती है।
इसलिए रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और चितवन जैसे निचले इलाकों को सतर्क किया गया है।
ट्विटर पोस्ट
बैराज पर बाढ़ का भयावह दृश्य
"उत्तरी नेपाल के रसुवा जिले की त्रिशूली नदी का खौफनाक वीडियो.."
— Vivek K. Tripathi (@meevkt) August 26, 2026
फ्लैश फ्लड ने जैसे ही डैम को पार किया, नीचे काम कर रहे मजदूरों को भागने का मौका भी नहीं मिला.. ऊपर पहाड़ों में खड़े लोग चिल्लाए.. शोर मचाकर उन्हें बताया कि बाढ़ आ रही है.. मजदूर जान बचाने को भागे लेकिन काल के गाल से… pic.twitter.com/Y6RtkSVMW3
खतरा
क्या भारत में भी मंडरा रहा है खतरा?
त्रिशूली नदी से पानी आगे गंडक नदी में जा सकता है। उत्तर प्रदेश महराजगंज और कुशीनगर को सतर्क किया गया है। उत्तर प्रदेश सरकार नारायणी और गंडक के जलस्तर पर नजर रख रही है।
एक वरिष्ठ सिंचाई अधिकारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश में बड़ा खतरा नहीं है, क्योंकि गंडक का जलस्तर अभी खतरे के निशान से नीचे है।
बिहार में ज्यादा चिंता है क्योंकि नेपाल का पानी गंडक नदी से वाल्मीकिनगर बैराज जाएगा। बिहार में अलर्ट जारी है।
ट्विटर पोस्ट
तिब्बत के बंदरगाह का दृश्य
बेहद डरावना मंजर! तिब्बत के ग्यिरोंग पोर्ट पर आई फ्लैश फ्लड ने बाद में नेपाल में भारी तबाही मचाई। प्रभावित सभी लोगों के लिए प्रार्थना।🙏 #FlashFlood #Tibet #Nepal #Flood #NaturalDisaster #नेपाल #बाढ़ #तिब्बत #PrayForNepal pic.twitter.com/P4gtwzUBkx
— realaadil (@AadilAnsari06) August 26, 2026
समाधान
नेपाल सरकार ने चीन और भारत से मदद मांगी
नेपाली सरकार के प्रवक्ता सस्मित पोखरेल ने बताया कि नेपाल ने भारत और चीन दोनों से बचाव अभियान में मदद मांगी है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल भारत और चीन के अधिकारियों के संपर्क में हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र (बालेन) शाह से बात कर हरसंभव मदद का आश्वासन दिया है।
भारतीय वायुसेना के विमान (C-130 और C-17) तैयार हैं। राहत सामग्री (दवाइयां और राशन आदि) भेजी जा रही है।
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तिब्बत का दृश्य
अंतिम के 10 सेकंड बेहद डरावना है। शायद ही इससे कोई बच पाया होगा.
— Yogesh Mishra (@iYogeshMishra) August 26, 2026
यह चीन के तिब्बत में मौजूद गियिरोंग पोर्ट का CCTV फुटेज है, जो नेपाल के रसुवा ज़िले के ठीक सामने है।
अचानक आई बाढ़ ने सबसे पहले यहीं तबाही मचाई और बाद में नेपाल में भारी नुकसान पहुँचाया। सभी लोगों के लिए… pic.twitter.com/dxVefJEzD5