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नेपाल में शवों की पहचान के लिए भारत कैसे कर रहा मदद, क्या नमूने भारत आएंगे?
नेपाल में बाढ़ के 9 दिन बाद भी लगातार शवों का मिलना जारी है

नेपाल में शवों की पहचान के लिए भारत कैसे कर रहा मदद, क्या नमूने भारत आएंगे?

लेखन गजेंद्र
Sep 04, 2026
04:26 pm

क्या है खबर?

नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ में अब तक 1,247 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 4,700 से अधिक लोग लापता हैं। बाढ़ के बाद मुर्दाघर भरे पड़े हैं और सरकारी भवनों में भी शवों को रखा जा रहा है। अपने को ढूंढने आ रहे लोग बुरी तरह क्षत-विक्षत शवों को पहचान नहीं पा रहे। ऐसे में भारत शवों की पहचान के लिए DNA प्रोफाइलिंग में नेपाल की मदद करेगा। ये मदद कैसे होगी? आइए, जानते हैं।

मदद

DNA प्रोफाइलिंग क्या है और इसकी जरूरत क्यों पड़ी?

शव के बुरी तरह सड़ने या जलने पर उनकी पहचान मुश्किल होती है। ऐसे शव के रक्त, कोमल ऊतक, हड्डी और दांतों से DNA प्रोफाइल तैयार करते हैं।

नेपाल में 4,700 से ज्यादा लापता हैं और दुर्गम स्थानों पर महीनों तक पानी-कीचड़, धूप में रहने के बाद सड़े-गले शव मिलेंगे, जिनकी पहचान मुश्किल होगी। ऐसे में प्रोफाइलिंग जरूरी हो जाती है।

DNA प्रोफाइलिंग के लिए शवों के नमूनों को उनके जैविक संबंधी (माता-पिता, बच्चे, भाई-बहन) के नमूनों से मिलाया जाएगा।

जानकारी

नेपाल में DNA प्रोफाइलिंग कितनी कारगर?

स्वीडन के राष्ट्रीय फोरेंसिक चिकित्सा बोर्ड की आणविक जीवविज्ञानी केर्स्टिन मोंटेलियस बताती हैं कि हड्डी से DNA सामग्री तब भी निकाल सकती है, जब अधिकांश ऊतक गल चुके हों। हालांकि, शुरुआती चरण में भ्रम की स्थिति बन सकती है और DNA नष्ट भी होता है।

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भारत कैसे करेगा मदद?

नेपाल की मदद के लिए यह कदम काठमांडू स्थित भारतीय दूतावास ने निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत उठाया है, जिससे एक अतिरिक्त उपाय के रूप में नेपाल में अभी चल रही पहचान प्रक्रिया को सुगम बनाया जा सके।

विदेश मंत्रालय ने बताया कि गृह मंत्रालय लापता व्यक्तियों के प्रथम श्रेणी के जैविक संबंधियों के DNA प्रोफाइलिंग के लिए केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं (CFSL), राज्य फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं (SFSL) और राष्ट्रीय फोरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) की प्रयोगशालाओं की सेवाएं उपलब्ध कराएगा।

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जांच

भारत में रहने वाले जैविक संबंधी दे सकेंगे नमूने

इस मदद के तहत नेपाल से नमूने भारत नहीं लाए जाएंगे, बल्कि भारत में रहने वाले प्रथम श्रेणी के जैविक संबंधी यानी पिता-माता, बेटा-बेटी या भाई-बहन अपने जैविक नमूने एकत्र करवा सकते हैं।

परिवारों को CFSL, SFSL, NFSU की प्रयोगशालाएं और DNA प्रोफाइलिंग क्षमता वाली NABL-मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में जाना होगा।

मंत्रालय ने DNA प्रोफाइलिंग सुविधा वाली सरकारी फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशालाओं के नंबर और DNA प्रोफाइलिंग तैयार करने के लिए जैविक नमूना संग्रह प्रपत्र भी जारी कर दिया है।

जांच

क्या नेपाल से शवों का DNA नमूनों भारत लाया जाएगा?

इस मदद के तहत नेपाल से न तो शव भारत आएंगे और न ही DNA नमूने, बल्कि भारत में जो रिश्तेदार अपने नमूने देंगे उनकी प्रोफाइलिंग भारत में होगी और नेपाल में अज्ञात शवों की DNA प्रोफाइलिंग होगी।

इसके बाद भारत में तैयार रिश्तेदार की DNA प्रोफाइल और जरूरी प्रारंभिक जानकारी नेपाल पुलिस को सुरक्षित डिजिटल माध्यम से भेजी जाएगी।

इसके बाद, नेपाल पुलिस वहां अज्ञात शवों से तैयार DNA प्रोफाइल से उसका मिलान करेगी।

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भारत के अलावा और कितने देश कर रहे ऐसी मदद?

भारत और नेपाल में रोटी-बेटी का रिश्ता है, इसलिए यह मदद काफी कारगर है। भारत में नेपाली प्रवासियों और नागरिकों की संख्या अधिक है, जिनका नेपाल में परिवार है। कई लड़कियां विवाह करके भी भारत आई हैं।

भारत ने अपनी प्रयोगशालाओं से मदद के अलावा 19 सदस्यीय फॉरेंसिक टीम भी नेपाल भेजी है, जो वहां नेपाली विशेषज्ञों के साथ DNA जांच और विश्लेषण में मदद कर रही है।

चीन ने भी DNA पहचान विशेषज्ञों का दूसरा दल भेजा है।

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