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कैसे भारतीय मूल के व्यवसायी ने CIA एजेंट बनकर इंडोनेशियाई राष्ट्रपति से किए रक्षा सौदे?
भारतीय मूल के अमेरिकी व्यवसायी गौरव श्रीवास्तव ने CIA एजेंट बनकर इंडोनेशियाई राष्ट्रपति से किए रक्षा सौदे

कैसे भारतीय मूल के व्यवसायी ने CIA एजेंट बनकर इंडोनेशियाई राष्ट्रपति से किए रक्षा सौदे?

Jul 06, 2026
04:29 pm

क्या है खबर?

भारतीय मूल के एक व्यवसायी के अमेरिका की केंद्रीय खुफिया एजेंसी (CIA) एजेंट बनकर बड़ी धोखाधड़ी करने का मामला सामने आया है। आरोप है कि इस व्यवसायी ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ संबंध विकसित करने के बाद इंडोनेशिया में हजारों करोड़ रुपये के प्रारंभिक रक्षा सौदे भी हासिल किए थे। इस व्यवसायी की पहचान अमेरिकी व्यवसायी गौरव श्रीवास्तव के रूप में हुई है। आइए श्रीवास्वत की इस धोखाधड़ी का विवरण विस्तार से जानते हैं।

खुलासा

कैसे हुआ इस धोखाधड़ी का खुलासा?

ऑर्गनाइज्ड क्राइम एंड करप्शन रिपोर्टिंग प्रोजेक्ट (OCCRP) और इंडोनेशियाई प्रकाशन टेम्पो की इस महीने की शुरुआत में जारी एक जांच रिपोर्ट में इस धोखाधड़ी का खुलासा गया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, श्रीवास्तव ने साल 2020 से 2022 के बीच इंडोनेशियाई अधिकारियों और व्यापारिक भागीदारों के सामने यह झूठा दावा किया था कि वह अमेरिकी खुफिया एजेंसी CIA के लिए एक गुप्त एजेंट के रूप में काम करते हैं। इस आधार पर उन्हाेंने कई सौदों को अंजाम दिया था।

सौदे

इंडोनेशियाई राष्ट्रपति सुबियांटो के साथ किए थे रक्षा सौदे

संयुक्त जांच के अनुसार, श्रीवास्तव ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबावो सुबियांटो के साथ उस समय संबंध बनाए जब वे देश के रक्षा मंत्री थे। प्रारंभिक समझौतों में लड़ाकू विमान, हेलीकॉप्टर, परिवहन विमान और सैन्य कमान प्रणालियों की खरीद की योजनाएं शामिल थीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि श्रीवास्तव ने सुबियांटो के साथ संबंध विकसित किए थे। इन संबंधो के बीच ही सुबियांटो ने खुफिया रूप से श्रीवास्तव को कथित तौर पर 'मिस्टर G' उपनाम दिया था।

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बैठक

श्रीवास्तव ने सुबियांटो के साथ की थी बैठकें

टेम्पो की रिपोर्ट के अनुसार, डच तेल व्यापारी नील्स ट्रोस्ट ने कहा कि वह 2022 के मध्य में श्रीवास्तव के साथ पश्चिम जावा के हंबलांग में गरुड़ यक्सा एस्टेट स्थित सुबियांटो के आवास पर गए थे। श्रीवास्तव का दावा था कि वह अक्सर सुबियांटो के घर ठहरते थे। उन्होंने 2002 के बाली बम धमाकों के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान करने में मदद करने और सुबियांटो को अमेरिकी आव्रजन ब्लैकलिस्ट से हटवाने में भी भूमिका निभाने का दावा किया था।

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सौदे

श्रीवास्तव की कंपनियों ने सुबियांटो से किया थे 5 रक्षा खरीद समझौते

रिपोर्ट के अनुसार, श्रीवास्तव द्वारा नियंत्रित कंपनियों ने इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय और एक सरकारी स्वामित्व वाली रक्षा कंपनी से 5 प्रारंभिक समझौते किए थे। मंत्रालय ने 2020 में खरीद के लिए 3 आशय पत्र जारी किए, जिसके बाद 2021 और 2022 में एक और आशय पत्र और एक समझौता ज्ञापन जारी किया गया। प्रस्तावित सौदों में 36 F-15 विमान, UH-60 ब्लैक हॉक हेलीकॉप्टर, C-130 परिवहन विमान और इंडोनेशियाई रक्षा मंत्रालय के लिए संचालन कमान और नियंत्रण केंद्र शामिल थे।

खुलासा

श्रीवास्तव की कंपनियों का नहीं था रक्षा क्षेत्र से कोई भी संबंध

कॉर्पोरेट रिकॉर्ड के अनुसार, समझौते हासिल करने वाली श्रीवास्तव की 4 कंपनियों का पंजीकरण करों का भुगतान न करने पर रद्द कर दिया गया था। 2022 में अमेरिका ने लगभग 13.9 अरब डॉलर (1.32 लाख करोड़ रुपये) में इंडोनेशिया को 36 F-15 विमान और संबंधित उपकरण बेचने की मंजूरी दी थी। हालांकि, इसमें श्रीवास्तव की कंपनियों का उल्लेख नहीं था। श्रीवास्तव ने सुबियांटो के छोटे भाई और अरसारी समूह के अध्यक्ष हाशिम जोजोहादिकुसुमो के साथ व्यापारिक संबंध विकसित किए थे।

विवाद

श्रीवास्तव को लेकर 2024 में शुरू हुआ था विवाद

रिपोर्ट के अनुसार, श्रीवास्तव को इंडोनेशिया में अपनी व्यावसायिक गतिविधियों का विस्तार करने से पहले ही कैलिफोर्निया में कानूनी विवादों का सामना करना पड़ा था। 2024 में उनकी पूर्व साझेदार डच कंपनी नील्स ट्रोस्ट ने आरोप लगाया था कि श्रीवास्तव ने अमेरिकी राजनेताओं और सुरक्षा एजेंसियों के साथ फर्जी संपर्कों का इस्तेमाल कर उनसे करोड़ों डॉलर ठगे थे। श्रीवास्तव के इसी दावे के कारण उसने उसे कंपनी में 50 प्रतिशत हिस्सेदारी दी थी। हालांकि, बाद में यह सब गलत निकला।

चर्चा

मामले के चर्चा में आने का क्या है कारण?

जब श्रीवास्तव ने खुद को CIA एजेंट बताकर यह फर्जीवाड़ा (2020-2022 के बीच) किया था, तब सुबियांटो इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री थे, लेकिन वर्तमान में वह राष्ट्रपति बन गए हैं। ऐसे में एक संप्रभु राष्ट्र के मौजूदा राष्ट्रपति और देश के सबसे शक्तिशाली परिवार को एक फर्जी एजेंट द्वारा ठगे जाने की खबर ने वैश्विक सुरक्षा और राजनीतिक हलकों में तहलका मचा दिया है। अब यह मामला वैश्विक स्तर पर तेजी से उठता नजर आ रहा है।

कार्रवाई

इस मामले में अब तक क्या-क्या कार्रवाई हुई?

मामले में श्रीवास्तव के खिलाफ वैश्विक स्तर पर कानूनी और प्रशासनिक शिकंजा कसता जा रहा है। अमेरिकी संघीय जांच एजेंसी FBI मामले की आपराधिक जांच कर रही है। इंडोनेशिया की मनी लॉन्ड्रिंग और वित्तीय धोखाधड़ी जांचने वाली मुख्य संस्था PPATK ने भी मामले के वित्तीय लेन-देन की जांच शुरू कर दी है। इंडोनेशिया के रक्षा मंत्रालय ने आधिकारिक पुष्टि की है कि श्रीवास्तव की शेल कंपनियों के साथ हुए सभी समझौतों को पूरी तरह से रद्द कर दिया गया है।

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