अमेरिका और इराक के बीच हुआ ऐतिहासिक समझौता, 20 साल बाद हटेगी अमेरिकी सेना
क्या है खबर?
अमेरिका और इराक ने एक ऐतिहासिक समझौते को अंतिम रूप दिया है, जिसके तहत 20 वर्ष से अधिक समय के बाद अमेरिकी सेना का इराक में मिशन पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। इस रणनीतिक कदम से पश्चिम एशिया की भू-राजनीति में एक बड़ा बदलाव आने की उम्मीद है, जिसे विश्लेषक क्षेत्र में ईरान के बढ़ते प्रभाव के लिए एक नए रास्ते के रूप में देख रहे हैं। रॉयटर्स के अनुसार, दोनों सरकारों ने इसके लिए चरणबद्ध समय-सीमा तय की है।
चरण
2 चरणों में खत्म होगा मिशन
समझौते के अनुसार, वर्तमान में इराक में मौजूद लगभग 2,500 अमेरिकी सैनिकों की वापसी और मिशन का समापन 2 चरणों में होगा।
पहला चरण सितंबर 2027 तक समाप्त हो जाएगा। इस अवधि के दौरान बगदाद और इराक के अन्य प्रमुख हिस्सों से अमेरिकी बलों को धीरे-धीरे कम किया जाएगा।
दूसरा चरण सितंबर 2028 तक पूरा होगा। इसमें इराक के स्वायत्त कुर्द क्षेत्र में जारी गठबंधन के अभियानों को पूरी तरह समेट लिया जाएगा।
जोर
द्विपक्षीय सुरक्षा संबंधों पर रहेगा जोर
इराकी और अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह कदम इराक से पूरी तरह नाता तोड़ने जैसा नहीं है, बल्कि संबंधों के स्वरूप को बदलने की एक कोशिश है।
गठबंधन मिशन खत्म होने के बाद अमेरिका और इराक 'द्विपक्षीय सुरक्षा साझेदारी' के नए युग में प्रवेश करेंगे।
सुरक्षा सहयोग के तहत कुछ अमेरिकी सैन्य सलाहकार और प्रशिक्षक इराकी सुरक्षा बलों को प्रशिक्षण और तकनीकी सहायता देने के लिए इराक में बने रह सकते हैं।
चिंता
सुरक्षा विश्लेषकों की बड़ी चिंताएं
अमेरिकी सेना के इस प्रस्थान को लेकर अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विशेषज्ञों और अमेरिकी कूटनीतिज्ञों के बीच एक गंभीर चिंता बनी हुई है।
2 दशकों के सैन्य संतुलन के बाद अमेरिकी सैनिकों के हटने से इराक में एक सुरक्षा शून्यता पैदा हो सकती है।
इराक में पहले से ही ईरान-समर्थित शिया मिलिशिया गुट बेहद शक्तिशाली हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी सेना की अनुपस्थिति का सीधा लाभ उठाकर ईरान, बगदाद पर अपना शिकंजा और अधिक मजबूत कर लेगा।
जानकारी
ISIS के दोबारा उभरने का डर
इराकी सेना ने दावा किया है कि वे अब अपनी सुरक्षा खुद संभालने में पूरी तरह सक्षम हैं, लेकिन सीरिया और इराक के सीमावर्ती इलाकों में इस्लामिक स्टेट (ISIS) के स्लीपर सेल्स के दोबारा सक्रिय होने का खतरा अभी भी टला नहीं है।
पृष्ठभूमि
साल 2003 के आक्रमण से 2026 के समझौते तक
अमेरिकी सेना ने 2003 में सद्दाम हुसैन के शासन को उखाड़ फेंकने के लिए 'वेपन्स ऑफ मास डिस्ट्रक्शन' (WMD) का हवाला देकर इराक पर हमला किया था।
साल 2011 में ओबामा प्रशासन ने सैनिकों को वापस बुलाया था, लेकिन 2014 में ISIS के उभार और इराक के बड़े हिस्से पर कब्जे के बाद इराकी सरकार के आमंत्रण पर अमेरिकी बलों को 'ऑपरेशन इनहेरेंट रिजॉल्व' के तहत दोबारा इराक लौटना पड़ा था।
अब फिर अमेरिकी सेना की वापसी हो रही है।